किसी समय गांव में किसी के घर लड़की पैदा होने पर उसकी मौत हो जाती थी। यहां लड़कियों की संख्या कम होने लगी। गांव वाले इससे काफी परेशान थे। बड़े-बड़े वैद्य, बाबा के पास वो अपनी समस्या लेकर पहुंचे लेकिन कहीं से भी उन्हें आस नहीं मिली। इसके बाद एक दिन गांव में एक प्रसिद्ध तांत्रिक पहुंचे और फिर उनकी सलाह पर पुरुषों ने छठ शुरू की।

पटना : आस्था और सूर्योपासना का महापर्व छठ (Chhath Puja 2021) की अपनी महिमा है। छठी माई की कृपा से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। असाध्य रोगों का नाश होता है, तो परिवार में सुख-शांति, समृद्धि आती है। बिहार (bihar) में छठ को लेकर अलग-अलग परंपराएं भी हैं, जिनके पीछे कई कहानियां छिपी हैं। इन्हीं परंपराओं में शामिल है बांका जिले के एक गांव की अनूठी परंपरा। जहां बेटियों को बचाने के लिए उनके पिता छठ पूजा करते हैं। यहां महिलाओं से ज्यादा पुरुष छठ माई का व्रत रखते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ आस्था के इस पर्व को मनाते हैं। आइए आपको बताते हैं गांव की इस अनोखी परंपरा के बारें में और इसके पीछे के कारणों को...

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बेटियों को बचाने बाबा रखते हैं व्रत
कटोरिया प्रखंड के भोरसार के पिपराडीह गांव में पिता अपनी लाडली बेटियों की सुखमय जिंदगी और खुशहाली के लिए व्रत रखते हैं। कुछ महिलाएं भी गांव की छठ का पूजा करती हैं लेकिन व्रत करने वाले पुरुषों की संख्या इनसे काफी ज्यादा होती है। गांव में यह परंपरा दशकों से चली आ रही है। गांव वाले इस बात को लेकर कहते हैं कि उनको यह ठीक से पता नहीं है कि कितने समय से यह परंपरा निभाई जा रही है लेकिन जब से वो समझने लायक हुए हैं तब से यह परंपरा चली आ रही है। जिसे वो भी बड़ी भक्तिभाव से निभा रहे हैं।

कैसे हुई शुरुआत
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि उन्हें उनके पूर्वजों से यह परंपरा विरासत में मिली है। इसके पीछे कारण को लेकर वे बताते हैं कि किसी समय गांव में किसी के घर लड़की पैदा होने पर उसकी मौत हो जाती थी। इस कारण यहां लड़कियों की संख्या कम होने लगी। गांव वाले इससे काफी परेशान थे। बड़े-बड़े वैद्य, बाबा के पास वो अपनी समस्या लेकर पहुंचे लेकिन कहीं से भी उन्हें आस नहीं मिली। इसके बाद एक दिन गांव में एक प्रसिद्ध तांत्रिक पहुंचे तो गांव वाले उनके पास अपनी समस्या लेकर पहुंचे। गांव वालों की समस्या सुन उस तांत्रिक ने पुरुषों को छठ करने की सलाह दी। तब से यह परंपरा जारी है।

आखिरकार समाप्त हुई समस्या
ग्रामीणों ने बताया कि इसके बाद से गांव में लड़कियों के ऊपर आया संकट भी खत्म हो गया। गांव की आबादी वर्तमान में एक हजार की है और यहां 100 से अधिक पुरुष छठ का व्रत करते हैं। पुरुषों के इस पूजा-पाठ में महिलाएं भी बढ़-चढ़कर सहयोग करती हैं। गांव वालों का मानना है कि जब तक गांव आबाद रहेगा, पुरुष यहां छठ करते रहेंगे। गांव के प्रधान पप्पू यादव का कहना है कि यहां पुरुष वर्ग द्वारा छठ पूजा करने की परंपरा चली आ रही है। छठ मैया का व्रत करने से कल्याण होता है।

व्रत करेंगे तो बेटियां सुरक्षित रहेंगी
ग्रामीणों का कहना है कि आज से कुछ साल पहले तक गांव में सिर्फ पुरुष ही छठ करते थे, अब कुछ महिलाओं ने भी छठ पूजा को शुरू किया है। लेकिन इससे व्रत करने वाले पुरुषों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। गांव के पुरुष सदस्य मानते हैं कि उनके छठ करने से उनकी बेटियों पर कोई संकट नहीं आएगा। इन्होंने बताया कि आम तौर पर छठ मैया से लोग बेटा मांगते हैं, लेकिन यहां के लोग बेटियों के लिए यह काम करते हैं। इन्होंने बताया कि पूर्वजों की इस परंपरा का निर्वाह करने में एक विशेष आध्यात्मिक अनुभूति होती है, जिसे शब्दों में नहीं बताया जा सकता। 

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