पटना। कोरोना संकट के बीच नीतीश सरकार ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार का तबादला कर दिया है। संजय कुमार को पर्यटन विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है। जबकि पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव उदय कुमार कुमावत को स्वास्थ्य विभाग का प्रधान सचिव नियुक्त करने का पत्र जारी कर दिया गया है। 

कोरोना संकट के बीच संजय कुमार के तबादले पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कहा जाता है कि कोरोना से निपटने में संजय बेहतर काम कर रहे थे। इस बीच उन्हें बलि का बकरा बनाते हुए तबादला किए जाने पर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। फिलहाल हम आपको बता रहे हैं वे पांच कारण, जिस कारण कोरोना से जारी लड़ाई के बीच नीतीश कुमार ने अपना सेनापति बदल दिया। 

1. ईमानदारी से सभी जानकारी देना
भारत में कोरोना का जब फैलाव जब शुरू हुआ तो काफी दिनों तक बिहार इसके चपेट से बचा रहा। इस दौरान यह सवाल उठने लगा कि सरकार कोरोना की जांच और पुष्टि को छिपा रही है। 22 मार्च को जब राज्य में पहला केस सामने आया तो उसके बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग ने जांच की रफ्तार बढ़ाई। नतीजन कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी। इस बीच प्रधान सचिव राज्य में कोरोना से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर लगातार अपडेट कर रहे थे। इस दौरान कई बार ऐसे भी अवसर बने जब प्रधान सचिव और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय की ओर से दी गई जानकारी में अंतर दिखा। 

2. 372 डॉक्टरों पर करवाई का आदेश
कोरोना संकट के बीच लापरवाही बरतने वाले राज्य के 372 डॉक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई का आदेश दिया था। इन डॉक्टरों ने कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के समय दिए गए जिम्मेदारी के निर्वहन में लापरवाही बरत रहे थे। इसमें कई डॉक्टर ऐसे भी थे, जिनकी सरकार और सत्ता तंत्र में अच्छी पकड़ थी। कार्रवाई का आदेश जारी होते ही डॉक्टरों ने सत्ता तंत्र में काबिज अपने संपर्क से दवाब बनाना शुरू कर दिया था। मंत्री-विधायकों के जरिए सरकार तक यह सचिव के खिलाफ कार्रवाई करने का दवाब बनाया गया। 

3. PMCH के एक डॉक्टर पर कार्रवाई
बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के रूप में पीएमसीएच को जाना जाता है। इस अस्पताल में कार्यरत माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सत्येंद्र नारायण सिंह को कोरोना सैंपल की जांच में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में 8 अप्रैल को सस्पेंड कर दिया गया था। लेकिन पांच दिन बाद ही डॉ. सत्येंद्र नारायण सिंह का निलंबन समाप्त कर दिया गया। उन्हें फिर से अपने पुराने पद पर बहाल भी कर दिया गया। बताया जाता है कि डॉ. सत्येंद्र का निलंबन समाप्त करने का आदेश सरकार द्वारा दिया गया था। 

4. प्रधान सचिव का दरबारी नहीं होना 
प्रधान सचिव संजय कुमार की पहचान एक तेज तर्रार अधिकारी के रूप में थी। मूल रूप से रोहतास जिले के रहने वाले संजय कुमार 2018 से पहले तक झारखंड के प्रधान सचिव के पद पर थे। 1990 बैच के आइएएस संजय कुमार की पहचान ऐसे अधिकारी की रही जो सरकार के दरबारी नहीं रहे। उनका यह व्यवहार सरकार और मंत्रियों को काफी दिनों से खटक रही थी। इसके साथ-साथ एक चर्चा यह भी है कि संजय कुमार की तबियत खराब चल रही थी। 

5. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय से तकरार
बिहार सचिवालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि प्रधान सचिव का स्वास्थ्य विभाग के मंत्री मंगल पांडेय से भी बनती नहीं थी। मंत्री और प्रधान सचिव के बीच पहले भी तकरार की खबरें सामने आ चुकी थीं। मंत्री से तकरार के कारण स्वास्थ्य सचिव का भाजपा के नेताओं से भी अनबन थी। ऐसे में सरकार पर भाजपा की ओर से भी प्रधान सचिव को हटाने की मांग तेज हो रही थी।