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अमिताभ बच्चन 'महान' और दिलीप कुमार की 'बैराग' की तर्ज पर रियल लाइफ में ट्रिपल रोल निभा रहा था यह शख्स

80 के दशक में एक फिल्म 'महान' आई थी। इसमें अमिताभ बच्चन ने ट्रिपल रोल निभाया था। इससे पहले 1976 में दिलीप कुमार ने 'बैराग' फिल्म में तीन भूमिकाएं अभिनीत की थीं। यह तो हुई फिल्मों की बात, लेकिन रियल लाइफ में इस शख्स ने तीन जगह अवतार लिया। जानें पूरा मामला..

Fraud in the name of job, a man was working job together in three district
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Kishanganj, First Published Aug 24, 2019, 11:10 AM IST
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किशनगंज. यह है 30 साल का सुरेश राम। यह किशनगंज के बिहार का रहने वाला है। शायद उसने 80 के दशक में आई फिल्म 'महान' और 1976 की 'बैराग' फिल्म से प्रेरणा ली होगी, जो रियल लाइफ में ट्रिपल रोल करने लगा। उल्लेखनीय है 'महान' फिल्म में अमिताभ बच्चन, जबकि 'बैराग' में दिलीप कुमार ने ट्रिपल रोल निभाया था। लेकिन रियल लाइफ में ऐसा करना किसी जोखिम से कम नहीं होता। बावजूद सुरेश राम ने ऐसा किया। यह और बात है कि अब उसे पुलिस ढूंढती फिर रही है। चौंकिए मत! दरअसल, यह सरकारी नौकरी में एक ऐसे फ्रॉड की कहानी है, जिसमें सुरेश राम ने ट्रिपल भूमिकाएं अभिनीत कीं। यानी एक साथ तीन जगहों पर यह शख्स सरकारी नौकरी करता रहा। यही नहीं, उसे प्रमोशन भी मिलता गया।

दो विभागों में तीन पदों पर नौकरियां...
सुरेश राम तीन जिलों में दो विभागों में तीन अलग-अलग पदों पर नौकरियां कर रहा था। यानी वो तीन जगहों से सैलरी बंटोर रहा था। लेकिन सैलरी बांटने की नई टेक्निकल व्यवस्था यानी CFMS के चलते उसकी पोल खुल गई। हालांकि इससे पहले कि पुलिस उसकी गिरेबां तक पहुंचती, वो 9 दो 11 हो गया है। सुरेश राम किशनगंज में भवन निर्माण विभाग में असिस्टेंट इंजीनियर के साथ सुपौल में जलसंसाधन विभाग के पूर्वी तटबंध भीमनगर में भी जॉब कर रहा था। इसके अलावा बांका में ही जलसंसाधन विभाग में अवर प्रमंडल बेलहर में भी असिस्टेंट इंजीनियर था। सामने आया है कि उसने जलसंसाधन विभाग, पटना में भी नौकरी की थी। मामला उजागर होने के बाद उपसचिव चंद्रशेखर प्रसाद सिंह ने उसके खिलाफ FIR दर्ज कराई है।

अब जानें क्या है CFMS
CFMS फाइनेंसियल मैनेजमेंट का एक साफ्टवेयर है। इसमें सरकारी कर्मचारी का पूरा रिकॉर्ड दर्ज होता है। जैसे-सैलरी का लेखा-जोखा, आधार कार्ड की  लिंक, जन्मतिथि आदि। यानी किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न के बराबर हो जाती है। यह सॉफ्टवेयर एजी आफिस(महालेखाकार) और रिजर्व बैंक से भी जुड़ा है। इससे ई-बिलिंग की व्यवस्था शुरू हो गई है।

 

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