हम पार्टी के जीतन राम मांझी, रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा और वीआईपी पार्टी के अध्यक्ष मुकेश साहनी ने बंद कमरे में बैठक की। बैठक में बिहार आ रहे प्रवासी मजदूरों की वापसी को राजनीतिक मुद्दा बनाने पर विचार किया गया।

पटना। बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। जेडीयू-बीजेपी गठबंधन के खिलाफ आरजेडी-कांग्रेस के नेतृत्व में राज्य के कई छोटे दलों ने मिलकर महागठबंधन बनाया है। हालांकि समय-समय पर महागठबंधन में दरार की खबरें आती रहती हैं। अब खबर है कि महागठबंधन के दो बड़े दलों को बिना बुलाए तीन पार्टियों ने गुपचुप मीटिंग की है। हम पार्टी के जीतन राम मांझी, रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा और वीआईपी पार्टी के अध्यक्ष मुकेश साहनी ने बंद कमरे में बैठक की। 

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महागठबंधन के तीनों बड़े नेताओं करीब घंटे भर बैठक की। ये बैठक मुकेश साहनी के ऑफिस में हुई। चर्चाओं की मानें तो आरजेडी और कांग्रेस के किसी नेता को न तो बैठक बुलाया गया और न ही मीटिंग के बारे में कोई जानकारी दी गई है। बैठक में बिहार आ रहे प्रवासी मजदूरों की वापसी को राजनीतिक मुद्दा बनाने पर विचार किया गया। 

सीट शेयरिंग पर भी हुई चर्चा 
लोकल रिपोर्ट्स के मुताबिक मीटिंग में तीनों छोटे दलों ने महागठबंधन में अपनी स्थिति और हैसियत को लेकर भी चर्चा की। इस दौरान सीटों और उसके बंटवारे के समय को लेकर आरजेडी और कांग्रेस पर दबाब बनाने पर भी रणनीति बनी। कहा जा रहा है कि मीटिंग की तैयारी पहले से ही थी। 

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कांग्रेस पसंद नहीं आई मीटिंग 
महागठबंध के तीन बड़े नेताओं को शायद कांग्रेस की बैठक पसंद नहीं आई। पार्टी ने एक नेता प्रेमचन्द्र मिश्रा ने इस पर तंज़ कसा। उन्होंने कहा, "बैठक का कमरा छोटा होगा। शायद सोशल डिस्टेंसिंग के नियम टूटने के डर से दूसरे नेताओं को नहीं बुलाया गया।"