मध्यप्रदेश में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया अब भाजपा में शामिल हो गए हैं। उनके साथ एमपी के कांग्रेसी कांग्रेसी विधायकों ने भी कमलनाथ सरकार से इस्तीफा दे दिया है। जदयू के एक नेता ने बिहार चुनाव से पहले दावा किया है कि बिहार में कांग्रेस बड़ी टूट के कगार पर है।  

पटना। बिहार में विधानसभा का चुनाव इसी वर्ष होना है। हांलाकि अभी चुनाव में चार-पांच महीने का समय बाकी है। लेकिन चुनाव से पहले सियासी उठापटक होने के संकेत मिलने शुरू हो गए है। जिससे कई पार्टियों में खलबली मची है। जदयू ने दावा किया है कि मध्यप्रदेश का साइड इफेक्ट जल्द ही बिहार में भी देखने को मिलेगा। जदयू नेता व भवन निर्माण मंत्री डॉ. अशोक कुमार चौधरी ने कहा कि बिहार में कांग्रेस पार्टी बड़ी टूट के कगार पर खड़ी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिस तरह से राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के कुनबे के आगे नतमस्तक हो चुकी है, उससे पार्टी के विधायकों में भारी बेचैनी के साथ-साथ नाराजगी भी है। 

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कांग्रेस के दर्जनों विधायक जदयू के संपर्क मेंः अशोक चौधरी
अशोक चौधरी ने आगे कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे कद्दावर नेता ने कांग्रेस का हाल देखकर पार्टी छोड़ने जैसा कठोर फैसला लिया। इससे बिहार में कांग्रेस के विधायकों का भी पार्टी छोड़ने का हौसला बढ़ा है। चुनाव से पहले कांग्रेस में बडी टूट होगी। कांग्रेस के दर्जनों विधायक जदयू की संपर्क में हैं। कांग्रेस के विधायकों को साफ लग रहा है कि अगर चुनाव में वे राजद के साथ मैदान में उतरे तो फिर कभी विधानसभा का मुंह नहीं देख पाएंगे। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने राजद के आगे सरेंडर कर दिया था। नतीजा, राजद के साथ-साथ कांग्रेस का भी सफाया हो गया।

कांग्रेसी एमएलसी ने दावे का किया खंडन
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की लाचारी राज्यसभा चुनाव में खुल कर सामने आ गई है। बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने तेजस्वी यादव को खुला पत्र लिखकर पुराने वादे की याद दिलाई, लेकिन राजद ने राज्यसभा की दोनों सीटें खुद के लिए रखकर कांग्रेस को धोखा दिया। आखिर कांग्रेस इस कदर राजद के सामने विवश क्यों है? हालांकि कांग्रेस के एमएलसी प्रेमचंद्र मिश्रा ने अशोक चौधरी के दावे का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि यह बे-सिर-पैर के दावा है। इस पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। जदयू के नेता द्वारा कांग्रेस में तोड़फोड़ की बात करना साबित करता है कि सत्ताधारी दल राजनीतिक अपराध की साजिश रच रहा है। कांग्रेस या किसी भी दूसरी पार्टी के विधायकों को तोड़ने की बात करने की बजाय जदयू को अपना घर को संभालना चाहिए।