48 साल पहले फिल्मकार स्टेनले क्यूबरिक ने 'ए क्लाकवर्क ऑरेंज' नाम से एक फिल्म बनाई थी, जिसमें एक आदतन दुष्कर्मी को सजा देने का एक ऐसा तरीका बताया गया था कि रेपिस्ट लड़कियों की परछाई तक से कांप जाए। 

मुंबई। हैदराबाद में वेटरनरी डॉक्टर के साथ गैंगरेप के बाद उसे जिंदा जलाने के मामले में आरोपियों को सख्त से सख्त सजा देने के लिए महबूबनगर जिला न्यायालय में एक विशेष अदालत का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने एलान किया था कि महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और कत्ल के आरोपियों को सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई जाएगी। वैसे, 48 साल पहले फिल्मकार स्टेनले क्यूबरिक ने 'ए क्लाकवर्क ऑरेंज' नाम से एक फिल्म बनाई थी, जिसमें एक आदतन दुष्कर्मी को सजा देने का एक ऐसा तरीका बताया गया था कि रेपिस्ट लड़कियों की परछाई तक से कांप जाए। 

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आखिर क्या था इस फिल्म में : 
1971 में आई फिल्म 'ए क्लाकवर्क ऑरेंज' में एक अमीरजादा आदतन दुष्कर्म करता है और जेल की सजा काट रहा होता है। इस पर एक साइकोलॉजिस्ट कोर्ट से रिक्वेस्ट करता है कि उसे सिर्फ एक साल के लिए उस शख्स का इलाज करने की इजाजत दी जाए। जज साहब उस साइकोलॉजिस्ट की बात मान लेते हैं और उसे ऐसा करने की अनुमति मिल जाती है। 

साइकोलॉजिस्ट ने दी अनोखी सजा : 
साइकोलॉजिस्ट उस शख्स के इलाज को 'लुडोविको ट्रीटमेंट' का नाम देता है। इस ट्रीटमेंट में साइकोलॉजिस्ट अपराधी के हाथ-पैर बांधकर कुर्सी पर बैठा देता है। इसके बाद उसे स्क्रीन पर लगातार दुष्कर्म और मार-काट के सीन दिखाए जाते हैं। यहां तक कि उसकी पलकों तक पर रेप और हिंसा वाली क्लिप लगा दी जाती हैं। इस तरह लगातार एक साल तक उसका इलाज किया जाता है। 

लड़कियों की परछाई तक से कांपने लगा आरोपी : 
एक साल तक चले इलाज के बाद अपराधी को कोर्ट में पेश किया जाता है। वह जैसे ही अपने आसपास लड़कियों को देखता है तो डर के मारे कांपने लगता है। इतना ही नहीं, छोटी-मोटी मारपीट देखकर भी वह बेहोश होने लगता है। इस तरह अदालत नहीं बल्कि साइकोलॉजिस्ट उसे ऐसी सजा देता है कि वह बलात्कार और हिंसा के नाम से भी खौफ खाने लगता है।