मुंबई. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट को लेकर आए दिन विवाद बढ़ने लगे थे। इसे देखते हुए सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और डिजिटल मीडिया के लिए नए नियम बनाए। अब डिजिटल मीडिया पर सेल्फ रेगुलेटिंग बॉडी नजर रखेगी कि किस प्लेटफॉर्म पर किस तरह की खबरें चलाई जा रही हैं। सरकार द्वारा बनाए गए नए नियम जल्द ही प्रभाव में लाए जाएंगे। नए नियम के अनुसार आनलाइन न्यूज और करंट अफेयर्स पब्लिशर्स या ऐसे किसी प्लेटफॉर्म को कोड ऑफ एथिक्स यानी नैतिकता के एक कोड का पालन करना होगा और इस पर सेल्फ रेगुलेटिंग बॉडी नजर रखेगी। ऐसे में वेबसीरीज 'तांडव' (Tandav) के डायरेक्टर ने सेल्फ रेगुलेटिंग बॉडी को क्रांतिकारी बताया है। 

अली अब्बास जफर ने क्या कहा?

डिजिटल मीडिया के लिए जारी की गई नई गाइडलाइंस को लेकर वेब सीरीज 'तांडव' के डायरेक्टर अली अब्बास जफर (Ali Abbas Zafar) ने कहा कि 'मैं जिस इंडस्ट्री से आता हूं। मुझे ये कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी कि रेगुलेशन क्रांतिकारी है। इसे जिस तरह से इंट्रोड्यूज कराया गया, ये इंडस्ट्री के लिए महत्वकांक्षी है।' इसके साथ ही अली अब्बास ने कहा कि 'इसके तीन स्तर होंगे। पहला-सेल्फ रेगुलेशन इंडिव्यूजुअल पब्लिशर। अगर ये काम नहीं करता है तो लेवल-2 जिसमें सेल्फ रेगुलेटरी बॉडी पब्लिशर को खुद सेटअप करनी होगी। जब ये दोनों लेवल फेल होंगे तो तीसरा स्तर आएगा, जिसमें आपत्तिजनक कंटेंट को हटाना होगा, जिसकी निगरानी मंत्रालय के तहत की जाएगी।'

अली ने आगे कहा कि 'सरकार ने जिस नई गाइडलाइन्स को इंट्रोड्यूस कराया है वो आर्टिस्ट, रचानात्मकता और कानून के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए है। सरकार ओटीटी के नेचर को जानती है कि ये कैसे काम करता है, इसलिए इसके लिए सेल्फ रेगुलेशन का मॉडल का चुना गया है।'

क्या कहता है नया नियम? 

इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स, 2021 (गाइडलाइंस फार इंटरमीडियरीज एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) के अनुसार सेल्फ रेगुलेटिंग बॉडी एक इंडिपेंडेट बॉडी होगी, जो ऐसे ही पब्लिशर्स या उनके एसोसिएशन द्वारा बनाई जाएगी। यह संस्था भारत के अलग-अलग नस्ल और अलग-अलग धर्म के लोगों को ध्यान में रखेगी और किसी भी नस्लीय या धार्मिक समूह की गतिविधियों, विश्वासों, प्रथाओं या विचारों की विशेषता बताते हुए सावधानी और विवेक के साथ काम करेगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ऐसी सेल्फ रेगुलेशन बॉडी के साथ मिलकर काम करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि कोड ऑफ एथिक्स का सही से पालन हो। एप्लीकेबल एंटिटी या सेल्फ रेगुलेटिंग बॉडी ऐसे किसी कंटेंट को संचारित, प्रकाशित या प्रसारित नहीं करेगी, जो किसी भी कानून के तहत आपत्त्जिनक हो, जो भी सामग्री प्रकाशित की जा रही है, उसे भारत की संप्रभुता और अखंडता को ध्यान में रखकर देखना होगा।

36 घंटों के भीतर सोशल प्लेटफॉर्म से हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट

फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गैर कानूनी या आपत्तिजनक कंटेंट पर कंट्रोल करने के लिए सरकार ने नए आईटी रूल्स को नोटिफाई किया है। नए नियम के अनुसार सरकार के आदेश के बाद जितनी जल्दी हो अपने प्लेटफॉर्म्स से कंटेंट हटाना होगा। नए इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी नियमों के मुताबिक, सरकार के आदेश के ज्यादा से ज्यादा 36 घंटों के भीतर सोशल प्लेटफॉर्म को वह कंटेंट हटाना होगा जिस पर सरकार को आपत्ति होगी। पहले यह समय सीमा 72 घंटों की थी।

OTT प्लेटफॉर्म्स को लेकर प्रकाश जावड़ेकर ने कही ये बात

सरकार ने OTT प्लेटफॉर्म्स पर केंटेंट को लेकर बुधवार को नई गाइडलाइंस जारी की है। ऐसे में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि ओटीटी और डिजिटल न्यूज मीडिया को अपनी डिटेल्स का खुलासा करना होगा। वो रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य नहीं बना रहे हैं, जानकारी मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि ओटीटी के लिए कंटेंट को खुद वर्गीकरण करना होगा- 13+, 16+ और A कैटेगरी। उन्होंने कहा कि पेरेंटल लॉक की व्यवस्था रखनी होगी और सुनिश्चित करना होगा कि बच्चे उसे नहीं देखें।