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बिहार की कुप्रथा को दिखाती है 'जबरिया जोड़ी', कम स्टार मिलने के ये हैं 5 कारण

फिल्म 'जबरिया जोड़ी' की कहानी बिहार और उत्तर प्रदेश में होने वाले पकड़वा विवाह यानी की जबरदस्ती विवाह पर आधारित है। ये विवाह अक्सर ज्यादा दहेज की डिमांड होने के कारण किया जाता है। इसी प्रथा को कॉमेडी और लव एंगल देकर फिल्म में पिरोनी की कोशिश की गई है।

Parineeti Chopra jabariya jodi review And Rating 5 reasons to get 2.5 stars
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Mumbai, First Published Aug 9, 2019, 6:56 PM IST
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मुंबई.  सिद्धार्थ मल्होत्रा और परिणिति चोपड़ा स्टारर फिल्म 'जबरिया जोड़ी' 9 अगस्त, 2019 शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज की जा चुकी है। इस फिल्म के जरिए ये जोड़ी दूसरी बार एक साथ काम कर रही है। मूवी की बात की जाए तो इस फिल्म की कहानी बिहार और उत्तर प्रदेश में होने वाले पकड़वा विवाह यानी की जबरदस्ती विवाह पर आधारित है। ये विवाह अक्सर ज्यादा दहेज की डिमांड होने के कारण किया जाता है। इसी प्रथा को कॉमेडी और लव एंगल देकर फिल्म में पिरोनी की कोशिश की गई है।

कहानी 

हार के दबंग हुकुम सिंह (जावेद जाफरी) जबरिया जोड़ी का माफिया चलाते हैं और उसके मुताबिक यह एक समाज सेवा है जिससे दहेज से बचा जा सकता है। उसके इसी धंधे में ना चाहते हुए भी उसका बेटा अभय सिंह (सिद्धार्थ मल्होत्रा) भी आता है। इसी बीच अभय की मुलाकात होती है बबली यादव (परिणीति चोपड़ा) से जो एक मध्यम वर्गीय परिवार की बेटी है मगर स्वभाव से दबंग है। इन दोनों की मुलाकात एक शादी के दौरान होती है और बबली अभय से प्यार कर बैठती हैं। इसके बाद कहानी में थोड़ा बहुत ट्विस्ट आता है। लेकिन उसमें भी कई जगह ऐसे सीन हैं जिन्हें ऐसा लगता है कि जबरदस्ती डाला गया हो। फिल्म को सभी के द्वारा दिए गए स्टार्स का अगर एवरेज निकाला जाए तो 2.5/5 है।

ये है कम स्टार मिलने के पांच कारण

1. सिद्धार्थ मल्होत्रा के ऐसे सीन जो जबरदस्ती किया हुआ लगता है। इसके अलावा सिद्धार्थ कैरेक्टर में फिट नहीं बैठते हैं, क्योंकि वे दिल्ली में पले बड़े हैं और उन्हें अभी इसकी समझ नहीं है। छींट वाली बुश्शर्ट और सफेद पैंट पहनने से कोई बिहारी नहीं बन जाता। बिहारी एक तेवर है और यह सिर्फ जिया जा सकता है। 

2. समय काफी लंबा कर दिया गया है, जबकि फिल्म 2 घंटे में खत्म की जा सकती थी, क्योंकि सिद्धार्थ और परिणिति की प्रेम कहानी में कुछ ऐसा नहीं था जिसे 2.30 घंटे में दिखाया जा सके।

3. सेकंड हाफ में फिल्म दर्शकों रोक नहीं पाती क्योंकि फर्स्ट हाफ की स्टोरी से कहानी कनेक्ट नहीं हो पाती है। जिससे सेकंड हाफ में कई जगह बोरियत भी महसूस होती है।

4. फिल्म में ऐसा कोई सॉन्ग नहीं है, जो दर्शकों की जुबान पर चढ़े।

5. फिल्म के अंत में एकदम बदलाव आता है, जिसका पहले से कहानी में कोई कनेक्शन नहीं दिया गया।

प्रोड्यूसर- एकता कपूर, 

कलाकार- सिद्धार्थ मल्होत्रा, परिणिति चोपड़ा, संजय मिश्रा और नीरज सूद

डायरेक्टर- प्रशांत सिंह

स्क्रीनराइटर- संजीव कुमार झां

स्टार्स- 2.5/5

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