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जब धर्मेन्द्र के पोते को एक शख्स ने उठाकर पटक दिया, फिर पूछा- तू सचमुच सनी देओल का बेटा है?

करन देओल की डेब्यू फिल्म 'पल पल दिल के पास' में उनकी हीरोइन सहर बम्बा हैं। यह फिल्म 20 सितंबर को रिलीज होगी। 

Sunny Deol Son Karan Speak up about his Struggle
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Mumbai, First Published Aug 30, 2019, 8:22 PM IST
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मुंबई। सनी देओल के बेटे करण देओल की फिल्म 'पल पल दिल के पास' 20 सितंबर को रिलीज हो रही है। सनी देओल खुद इन दिनों बेटे की फिल्म के प्रमोशन में जुटे हुए हैं। बता दें कि करन देओल एक पंजाबी-जाट फैमिली में पैदा हुए हैं, लेकिन एक सुपरस्टार फैमिली में पैदा होने के कुछ नुकसान भी हैं, जिन्हें करण देओल ने एक इंटरव्यू में खुद शेयर किया। 

फेसबुक पेज हयूमन्स ऑफ बॉम्बे के साथ एक इंटरव्यू में करण ने अपने स्कूल डेज को याद किया। इस दौरान उन्होंने बताया- "जब मैं पहली क्लास में था तो स्कूल में एक स्पोर्ट्स कॉम्पिटीशन हुआ। मैंने भी इस कॉम्पिटीशन में रेस में पार्टिसिपेट किया। मैं अभी रेस के लिए खड़ा ही था, कि कुछ सीनियर्स ने आकर मुझे घेर लिया। थोड़ी देर बाद उनमें से एक ने मुझे उठाया और पटक दिया। इसके बाद उसने मुझसे पूछा कि क्या तू सचमुच सनी देओल का बेटा है? क्योंकि तू तो मुझसे लड़ भी नहीं पा रहा। ये सुनकर मैं काफी शर्मिंदा हुआ था।''

स्कूल में कई बार उड़ा मेरा मजाक...
करण ने आगे कहा, "स्कूल में या तो बच्चे मुझे जज करते थे या फिर मेरा मजाक उड़ाते। कई बार तो वहां के टीचर्स भी इसमें शामिल होते थे। एक बार जब मैं अपना असाइनमेंट ठीक से नहीं बनाया तो एक टीचर ने मुझसे कहा कि तुम सिर्फ अपने पापा के चेक ही लिख सकते हो और कुछ नहीं कर सकते।"

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

Thank You for the feature @officialhumansofbombay ・・・ “The first memory I have of school, was when I was in 1st grade. We had a sports competition and I was taking part in a race. I was standing there, when suddenly a few older boys surrounded me. One of them lifted me up, and in front of everyone, smacked me down. He then asked me, ‘Are you sure you’re Sunny Deol’s son? You can’t even fight back’. I was so embarrassed. It didn’t get any easier from there. Most kids would either judge me or make fun of me, and even the teachers were the same. Once when I didn’t do well in an assignment, in the middle of the class, a teacher came up to me and said, ‘You’re only capable of writing your dad’s cheques, and nothing else.’ My mom was my only support through all of this, she kept telling me, ‘They’re saying these things because that’s how they are as people, it says nothing about you.’ And that kept me going. It was tough but I had to stand up for myself, and answer back instead of giving up and backing down. I had to understand that no one else, but me had the right to decide my worth.  I think my turning point was when my school was hosting a talent competition, and I decided to take part. I realised that this was a chance to prove myself. I spent night after night, preparing a rap -- because that’s the only thing I knew I was good at. On the day, I remember walking up on that stage, and there was a sea of people, with all eyes on me. But I took a deep breath, and performed my heart out. All the years of being bullied, of being ridiculed, of being identified as nothing else but ‘Sunny Deol’s son’, came out when I was up on that stage. The audience was cheering me on too -- I felt so liberated; like I’d finally broken free from the shackles.  It took time, but that moment changed my life. I realised that sometimes, it doesn’t take people, and situations, to make your life better. It takes a strong belief in yourself, the power to see yourself for who you are, and not the way others want you to be. You’re not made to fit into moulds, you’re made to create your own identity -- one that’s unlike anybody else’s.”

A post shared by Karan Deol (@imkarandeol) on Aug 29, 2019 at 10:50pm PDT

मां की बातों से मिलती थी हिम्मत...
करण ने कहा, हालांकि मेरे साथ ये सब होने के बावजूद मेरी मां ने मेरा सपोर्ट किया। वो मुझे कहती थीं जो लोग तुमसे ऐसा कह रहे हैं क्या वो एक इंसान के तौर पर ऐसे ही हैं। मां की बातों से मुझे काफी हद तक हिम्मत मिलती थी। मुझे लगता था कि अगर खुद को साबित करना है तो कोई और साथ नहीं देगा।

और ऐसे आया करियर का टर्निंग प्वाइंट...
करण ने कहा, "एक बार मेरे स्कूल में टैलेंट कॉम्पिटीशन हुआ और मैंने भी उसमें पार्टिसिपेट किया। तब मैं रैप अच्छा गाता था। शो के लिए मैंने काफी मेहनत भी की। इसके बाद मैं जब स्टेज पर पहुंचा तो वहां काफी लोग थे। लेकिन मैं घबराया नहीं और परफॉर्मेंस शुरू की। थोड़ी देर बाद ऑडियंस मेरे सपोर्ट में आ चुकी थी। तब मुझे लगा कि लाइफ में चीजें तभी बेहतर होती हैं, जब आप खुद पर यकीन करते हैं। आप एक सांचे में फिट होने के लिए नहीं बने हैं बल्कि अपनी पहचान खुद तलाशनी पड़ती है।

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