8th Pay Commission Latest News: HRA, TA और बेसिक पे को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। जानें कर्मचारियों-पेंशनर्स की 8 बड़ी मांगें और आपकी सैलरी-पेंशन पर क्या असर पड़ सकता है।

8th Pay Commission Update: अगर आप भी केंद्रीय कर्मचारी हैं या रिटायरमेंट के बाद पेंशन का लाभ ले रहे हैं, तो आपके लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक बेहद जरूरी खबर आई है। आयोग ने अपने गठन के 9 महीने पूरे कर लिए हैं और अब अलग-अलग राज्यों में कर्मचारियों, पेंशनर्स और दूसरे पक्षों से सुझाव लिए जा रहे हैं। इसी बीच एक बड़ा प्रस्ताव सामने आया है, जिसमें बेसिक पे बढ़ाने, HRA और TA की समीक्षा करने और रिटायरमेंट के बाद होने वाले नुकसान को कम करने की मांग की गई है। हालांकि, अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। यह सिर्फ आयोग के सामने रखा गया एक प्रस्ताव है, जिस पर आगे विचार किया जाएगा।

8वें वेतन आयोग का काम कहां तक पहुंचा?

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई में 8वें वेतन आयोग को काम करते हुए पूरे 9 महीने हो चुके हैं। इस दौरान दिल्ली, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में कर्मचारी संगठनों के साथ बातचीत हो चुकी है। आने वाले कुछ दिनों में दिल्ली में 3 दिन की एक बड़ी मीटिंग होने वाली है। इसके बाद सितंबर में टीम चेन्नई, पुडुचेरी और चंडीगढ़ जाकर भी कर्मचारियों की राय जानेगी।

क्या है सैलरी का नया फॉर्मूला?

इस बीच रेलवे सीनियर सिटिजंस वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने वेतन आयोग को अपनी मांगों की एक लंबी लिस्ट सौंपी है। उनकी सबसे बड़ी मांग यह है कि कर्मचारियों की बेसिक सैलरी ज्यादा होनी चाहिए और भत्तों (Allowances) पर निर्भरता कम होनी चाहिए।

ऐसा क्यों है?

दरअसल, जब कोई कर्मचारी रिटायर होता है, तो उसकी पेंशन उसकी बेसिक-पे (Basic Pay) के हिसाब से तय होती है, न कि उसे मिलने वाले भत्तों के हिसाब से। मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर में भत्ते बहुत ज्यादा हैं और बेसिक सैलरी कम। इससे होता यह है कि रिटायरमेंट के बाद जब भत्ते मिलने बंद हो जाते हैं, तो पेंशन बहुत कम बनती है और इनकम में अचानक भारी गिरावट आ जाती है। सोसाइटी का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद भी घर का खर्च, इलाज और आने-जाने का खर्चा तो बना ही रहता है, इसलिए बेसिक पे को मजबूत करना बहुत जरूरी है।

HRA और TA को महंगाई से जोड़ने की मांग

RSCWS का कहना है कि आजकल शहरों में रहने और सफर करने का खर्च बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए HRA और TA का रेगुलर रिव्यू हो। ऐसा न हो कि एक बार भत्ते तय हो जाएं और सालों तक वही रहें। इन भत्तों को सीधे महंगाई या किसी ऐसे इंडेक्स से जोड़ा जाए, ताकि जैसे-जैसे बाजार में महंगाई बढ़े, कर्मचारियों के भत्ते भी अपने आप बढ़ जाएं।

8वें वेतन आयोग के सामने रखी गईं 8 बड़ी मांगें

  1. बेसिक पे का हिस्सा बढ़ाया जाए ताकि रिटायरमेंट के बाद अच्छी पेंशन मिल सके।
  2. बेसिक सैलरी और भत्तों के बीच एक सही बैलेंस बनाया जाए।
  3. पे-स्ट्रक्चर ऐसा हो कि रिटायर होने पर आमदनी एकदम से आधी न हो जाए, क्योंकि खर्चे (जैसे हेल्थ और घर) कम नहीं होते।
  4. बढ़ते किराये को देखते हुए HRA को लगातार अपडेट किया जाए।
  5. TA (ट्रांसपोर्ट अलाउंस) की समीक्षा हो यानी सफर के बढ़ते खर्चों की भरपाई के लिए इसे भी बढ़ाया जाए।
  6. मुश्किल जगहों पर पोस्टिंग के भत्ते मिले यानी जो कर्मचारी बहुत रिमोट या मुश्किल हालात में काम करते हैं, उनके भत्तों में इजाफा किया जाए।
  7. 7वें वेतन आयोग में कुछ भत्ते हटा दिए गए थे। जो लोग रिस्की या बहुत मेहनत वाला काम करते हैं, उनके भत्तों का फिर से रिव्यू हो।
  8. दो वेतन आयोग के बीच के सालों में भत्तों की वैल्यू कम न हो, इसके लिए इन्हें महंगाई के आंकड़ों से जोड़ा जाए।

कब तक आएगी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट?

वेतन आयोग को यह तय करना है कि मौजूदा कर्मचारियों और पेंशनर्स, दोनों का फायदा कैसे हो। अभी इस पर लगातार चर्चा चल रही है। उम्मीद है कि 8वां वेतन आयोग अपनी फाइनल रिपोर्ट करीब 9 महीने बाद यानी मई-जून 2027 तक केंद्र सरकार को सौंप सकता है।