सरकारी बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा ने विदेशी बॉन्ड के जरिए 70 करोड़ डॉलर (USD 700 million) जुटाए हैं। बैंक को उम्मीद से कहीं ज़्यादा, यानी 2.67 अरब डॉलर की बोलियां मिलीं, जो इश्यू साइज़ से लगभग 3.8 गुना ज़्यादा है।

सरकारी बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) ने अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार में बड़ी सफलता हासिल की है। बैंक ने विदेशी बाजार से 70 करोड़ डॉलर यानी करीब 700 मिलियन डॉलर जुटाए हैं। खास बात यह रही कि इस इश्यू को निवेशकों की ओर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और बैंक को कुल 2.67 अरब डॉलर की बोलियां प्राप्त हुईं। यानी निवेशकों की मांग अंतिम इश्यू साइज से करीब 3.8 गुना रही। बैंक के मुताबिक, यह फंड दो अलग-अलग अवधि के सीनियर अनसिक्योर्ड फिक्स्ड-रेट नोट्स जारी करके जुटाया गया है। ये बॉन्ड बैंक के 4 अरब डॉलर के मीडियम-टर्म नोट प्रोग्राम के तहत जारी किए गए हैं।

तीन और पांच साल के बॉन्ड से जुटाए 700 मिलियन डॉलर

बैंक ऑफ बड़ौदा ने कुल 70 करोड़ डॉलर की राशि दो हिस्सों में जुटाई है। इसमें 40 करोड़ डॉलर तीन साल की अवधि वाले बॉन्ड से आए हैं, जिनका सालाना कूपन 5.114 प्रतिशत है। वहीं, बाकी 30 करोड़ डॉलर पांच साल के बॉन्ड के जरिए जुटाए गए हैं। इन नोट्स पर सालाना 5.318 प्रतिशत का कूपन तय किया गया है। बैंक के लिए इस इश्यू की खास बात सिर्फ रकम जुटाना नहीं, बल्कि जिस कीमत पर यह फंडिंग हासिल हुई है, वह भी है। भारी मांग के कारण बैंक शुरुआती प्राइस गाइडेंस के मुकाबले कम स्प्रेड पर बॉन्ड जारी करने में सफल रहा।

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अमेरिकी ट्रेजरी पर मिला अब तक का सबसे कम स्प्रेड

बैंक ऑफ बड़ौदा के अनुसार, तीन साल के नोट्स को तीन साल की अमेरिकी ट्रेजरी दर से 90 बेसिस प्वाइंट ज्यादा स्प्रेड पर जारी किया गया। जबकि शुरुआती गाइडेंस 120 बेसिस प्वाइंट का था। इसी तरह पांच साल के नोट्स के लिए स्प्रेड 100 बेसिस प्वाइंट तय हुआ, जबकि शुरुआती गाइडेंस 130 बेसिस प्वाइंट था। यानी दोनों ही बॉन्ड्स में शुरुआती अनुमान के मुकाबले 30 बेसिस प्वाइंट की कीमत में सुधार हुआ। बैंक ने कहा है कि यह उसके बॉन्ड इश्यू के इतिहास में अमेरिकी ट्रेजरी के मुकाबले अब तक का सबसे कम स्प्रेड है। आम तौर पर कम स्प्रेड का मतलब जारीकर्ता के लिए अपेक्षाकृत बेहतर फंडिंग लागत और निवेशकों के मजबूत भरोसे से जोड़ा जाता है।

CEO देबदत्त चंद ने क्या कहा?

बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO देबदत्त चंद ने कहा कि 70 करोड़ डॉलर के बॉन्ड इश्यू को मिला मजबूत रिस्पॉन्स बैंक की वित्तीय मजबूती और उसकी रणनीति में बाजार के भरोसे को दिखाता है। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धी कीमत और बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की भागीदारी बैंक को अपने फंडिंग स्रोतों को बेहतर बनाने और लंबे समय के ग्रोथ लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेगी। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक बॉन्ड बाजार में ब्याज दरों, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता का सीधा असर किसी बैंक की अंतरराष्ट्रीय उधारी की लागत पर पड़ता है।

GIFT City से जारी हुए बॉन्ड

ये बॉन्ड गुजरात के GIFT City स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की International Financial Services Centre Banking Unit (IBU) के जरिए जारी किए गए हैं। बैंक की एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, नोट्स का सेटलमेंट 20 अगस्त 2026 को होगा। इन बॉन्ड्स को Singapore Exchange, India International Exchange और NSE International Exchange पर लिस्ट किया जाएगा।

तीन साल और पांच साल की अवधि वाले इन नोट्स को अलग-अलग रेटिंग एजेंसियों ने भी रेटिंग दी है। तीन साल और पांच साल के नोट्स के लिए S&P की रेटिंग BBB (Stable), Fitch की BBB- (Stable) और CareEdge Global की BBB+ (Stable) बताई गई है।

कब होंगे मैच्योर?

बैंक के मुताबिक, दोनों बॉन्ड्स का सेटलमेंट 20 अगस्त 2026 को होगा। तीन साल की अवधि वाला नोट अगस्त 2029 में और पांच साल वाला नोट अगस्त 2031 में मैच्योर होगा। कुल मिलाकर, 2.67 अरब डॉलर की बोलियों के मुकाबले 70 करोड़ डॉलर का इश्यू यह संकेत देता है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की ओर से बैंक ऑफ बड़ौदा की डॉलर बॉन्ड फंडिंग में मजबूत रुचि दिखाई गई। हालांकि, किसी बॉन्ड इश्यू की सफलता को केवल ओवरसब्सक्रिप्शन से नहीं, बल्कि उसकी कीमत, क्रेडिट रेटिंग, बाजार परिस्थितियों और बैंक की वित्तीय स्थिति के व्यापक संदर्भ में देखना चाहिए।

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