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किसान क्रेडिट कार्डधारकों को 1.35 लाख करोड़ के रियायती कर्ज की मंजूरी, स्कीम से जुड़े 1.5 करोड़ किसान

बैंकों ने किसान क्रेडिट कार्ड ( KCC) से करीब डेढ़ करोड़ किसानों को जोड़ा है। कोरोनावायरस महामारी के बीच बैंकों ने किसानों के लिए 1.35 लाख करोड़ रुपए के रियायती कर्ज की मंजूरी दी है। यह जानकारी वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) ने सोमवार को दी।

Banks sanction rs 135 lakh crore concessional loan for kcc holder farmers MJA
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New Delhi, First Published Oct 20, 2020, 2:42 PM IST
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बिजनेस डेस्क। बैंकों ने किसान क्रेडिट कार्ड ( KCC) से करीब डेढ़ करोड़ किसानों को जोड़ा है। कोरोनावायरस महामारी के बीच बैंकों ने किसानों के लिए 1.35 लाख करोड़ रुपए के रियायती कर्ज की मंजूरी दी है। यह जानकारी वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) ने सोमवार को दी। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, कोरोनावायरस महामारी के दौरान सरकार ने आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) पैकेज में किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा वाले 2.5 करोड़ किसानों को जोड़ने की बात कही थी। इसके तहत किसानों को 2 लाख करोड़ रुपए के कर्ज की सहायता देने की बात भी कही गई थी।

किसान क्रेडिट कार्ड से लाभ
वित्त मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि बैंकों ने सस्ते ब्याज दर पर कर्ज मुहैया करने का काम किया है। इसके परिणास्वरूप मत्स्यपालकों और पशुपालकों समेत 1.5 करोड़ किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत कवर कर लिया गया है। मंत्रालय के बयान के मुताबिक, जारी किए गए सभी किसान क्रेडिट कार्ड के लिए खर्च की सीमा 1.35 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गई है। 

ब्याज दर में कितनी मिलती है रियायत
किसान क्रेडिट कार्ड के तहत भारत सरकार किसानों को कर्ज पर ब्याज में 2 फीसदी की छूट देती है। समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को 3 फीसदी प्रोत्साहन छूट दी जाती है। केसीसी पर सालाना ब्याज दर 4 प्रतिशत है। साल 2019 से इसका लाभ डेयरी का कारोबार करने वालों के साथ पशुपालकों और मत्स्यपालकों को भी देने की व्यवस्था की गई है।

कर्ज सीमा में बढ़ोत्तरी
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत कर्ज बिना किसी गारंटी के दिया जाता है। पहले इस स्कीम के तहत 1 लाख रुपए का कर्ज दिया जाता था। अब इसे बढ़ा कर 1.60 लाख रुपए कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि सस्ते ब्याज पर कर्ज देने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती आएगी। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और खेती के अलावा इससे जुड़े क्षेत्रों में भी उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। किसान क्रेडिट कार्ड योजना साल 1998 में शुरू की गई थी। 


 

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