केंद्र सरकार 2026 के बजट में शादीशुदा जोड़ों के लिए जॉइंट टैक्स फाइलिंग का ऑप्शन लाने पर विचार कर रही है। अगर अमेरिका और जर्मनी जैसा यह प्रस्ताव पास हुआ, तो पति-पत्नी अपनी इनकम मिलाकर टैक्स भर सकेंगे। जानिए क्या है इसमें खास।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को 2026 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। इससे पहले, कहा जा रहा है कि भारत में शादीशुदा टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ी खुशखबरी आ सकती है। वित्त मंत्रालय शादीशुदा जोड़ों के लिए वैकल्पिक जॉइंट टैक्स (Combined Tax Returns) पर विचार कर रहा है। अगर यह पास हो जाता है, तो पति-पत्नी को कंबाइंड टैक्स रिटर्न फाइल करने का मौका मिलेगा। इससे पैसे बचाने में मदद मिलेगी, खासकर उन परिवारों को जहां सिर्फ एक व्यक्ति कमाता है।

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने अमेरिका और जर्मनी के मॉडल के आधार पर यह सिफारिश की है, जहां शादीशुदा जोड़े मिलकर टैक्स फाइल कर सकते हैं। अब केंद्र सरकार भारत में भी इसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर रही है।

अभी का सिस्टम कैसा है?

अभी हर व्यक्ति को, चाहे वह शादीशुदा हो या नहीं, अलग-अलग टैक्स देना पड़ता है। पति और पत्नी को छूट, स्लैब और कटौतियां अलग-अलग मिलती हैं। जिन परिवारों में सिर्फ एक व्यक्ति कमाता है, वे दूसरे पार्टनर की छूट का पूरा फायदा नहीं उठा पाते, जिससे टैक्स का बोझ बढ़ जाता है। इसलिए माना जा रहा है कि जॉइंट टैक्स फायदेमंद होगा।

जॉइंट टैक्स क्या है?

जॉइंट टैक्स का मतलब है कि शादीशुदा जोड़ा अपनी इनकम को मिलाकर एक साथ टैक्स रिटर्न फाइल कर सकता है। इसे 2026 के बजट में एक वैकल्पिक सिस्टम के तौर पर लाने का प्रस्ताव है। यानी, जो चाहें वे मौजूदा व्यक्तिगत टैक्स सिस्टम में रह सकते हैं, और जो चाहें वे जॉइंट टैक्स का विकल्प चुन सकते हैं। दोनों पार्टनर के पास पैन होना जरूरी होगा।

जॉइंट टैक्स क्यों जरूरी है? इसके फायदे

इस सिस्टम के तहत, पति-पत्नी की कुल आय को जोड़कर एक अलग स्लैब के तहत टैक्स लगाया जाएगा। यह खासकर उन परिवारों को राहत दे सकता है जहां सिर्फ एक व्यक्ति कमाता है। जॉइंट फाइलिंग से पति-पत्नी होम लोन के ब्याज और मेडिकल इंश्योरेंस पर मिलने वाली छूट को भी बेहतर तरीके से एडजस्ट कर पाएंगे।

टैक्स स्लैब में हो सकते हैं बदलाव

जॉइंट टैक्स के तहत, बेसिक छूट की सीमा और टैक्स स्लैब को उसी अनुपात में बढ़ाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, अगर अभी एक व्यक्ति को 3 लाख रुपये की छूट मिलती है, तो जॉइंट फाइलिंग में यह सीमा दोगुनी या उससे भी ज्यादा हो सकती है। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों को सीधा फायदा होगा।

सरचार्ज पर भी मिल सकती है राहत

अभी 50 लाख रुपये से ज्यादा की आय पर सरचार्ज लगता है। एक्सपर्ट्स इस सीमा को 75 लाख रुपये तक बढ़ाने का सुझाव दे रहे हैं। जॉइंट टैक्स में, सरचार्ज की सीमाएं भी उसी अनुपात में तय की जा सकती हैं, जिससे टैक्स का बोझ कम होगा।

प्रस्ताव यह भी है कि अगर पति-पत्नी दोनों कमाते हैं, तो दोनों को अलग-अलग स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलना जारी रहना चाहिए। अमेरिका और जर्मनी जैसे देश शादीशुदा जोड़ों को जॉइंट टैक्स रिटर्न फाइल करने की इजाजत देते हैं, जिससे परिवार को एक ही आर्थिक इकाई माना जाता है। भारत भी अपने टैक्स कानूनों को आसान और आधुनिक बनाने के लिए ऐसा ही सिस्टम अपना सकता है।