डिजिटल लोन ऐप्स 5 मिनट में पैसे देने का वादा कर कर्ज के जाल में फंसाते हैं। किस्त चूकने पर रिकवरी एजेंट धमकी व उत्पीड़न करते हैं। ये ऐप्स 25% से ज़्यादा ब्याज वसूलते हैं और आपके पर्सनल डेटा का गलत इस्तेमाल भी करते हैं।

सोचिए, महीने का आखिर चल रहा है। सैलरी आने में अभी कुछ दिन बाकी हैं। इसी बीच अचानक अस्पताल का कोई खर्चा आ जाए, गाड़ी खराब हो जाए, या क्रेडिट कार्ड का बिल भरना हो तो आप क्या करेंगे? फोन उठाते ही आपको '5 मिनट में पैसा पाएं', 'बिना कागजी कार्रवाई, बिना इंतजार' जैसे वादे करने वाले सैकड़ों ऐप्स दिख जाएंगे। सुनने में यह एक शानदार समाधान लगता है। लेकिन, हजारों भारतीयों के लिए ये 5 मिनट वाले लोन महीनों तक चलने वाले मानसिक तनाव और कभी न खत्म होने वाले कर्ज का जाल बन गए हैं। डिजिटल लोन मार्केट की गहराई में जाने पर पता चलता है कि असली कहानी पैसा मिलने की आसानी की नहीं, बल्कि किस्त चूकने पर होने वाली भयानक घटनाओं की है।

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डराने वाले अनुभव

दिल्ली की एक 28 साल की महिला का अनुभव देखिए। पिछले साल कंपनी में कुछ बदलावों के कारण उनकी नौकरी चली गई। घर का किराया और क्रेडिट कार्ड के बिल बढ़ते गए, तो उन्होंने एक डिजिटल लेंडिंग ऐप से एक लाख रुपये का लोन ले लिया।

शुरुआत में रिकवरी एजेंट दिन में एक या दो बार ही फोन करते थे। लेकिन एक हफ्ते के अंदर ही कॉल्स की बाढ़ आ गई। कभी-कभी तो हर घंटे फोन आने लगे। उन्होंने धमकी दी कि अगर पैसा वापस नहीं किया तो परिवार और जिस कंपनी में वह काम करती थीं, वहां सबको बता देंगे। इस मानसिक दबाव को वह झेल नहीं पाईं और दोस्तों से पैसे उधार लेकर उन्होंने लोन चुकाया। वह कहती हैं कि लोन उनकी सबसे बड़ी समस्या नहीं थी, बल्कि उसके पीछे का डर था।

लोन से जुड़े मामलों में कानूनी मदद देने वाली संस्था 'एक्सपर्ट पैनल' (Expert Panel) ने मुश्किल में फंसे 10,000 लोगों पर एक सर्वे किया, जिसके नतीजे भी कुछ ऐसे ही हैं। सर्वे में शामिल 72% लोगों ने कहा कि उन्हें रिकवरी एजेंट्स से उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। 67% लोगों को अलग-अलग नंबरों से लगातार कॉल्स आईं, जबकि 11% लोगों को एजेंट्स ने घर या ऑफिस आकर सीधे धमकी दी। 8% लोगों को कानूनी कार्रवाई की धमकी भी मिली।

कर्ज के जाल में फंसती युवा पीढ़ी

पहली बार लोन लेने वालों में 41% लोग जेन-ज़ी (Gen Z) यानी युवा पीढ़ी के हैं। इनमें से करीब 46% लोग स्मार्टफोन, लैपटॉप जैसे गैजेट्स खरीदने के लिए लोन लेते हैं। वहीं, पर्सनल लोन लेने वालों में लगभग 45% मिलेनियल्स (Millennials) हैं, जो लाइफस्टाइल के खर्चों, घर की सजावट या छोटे बिजनेस शुरू करने के लिए पैसा उधार लेते हैं।

जिन लोगों को बैंकों से लोन लेने में मुश्किल होती थी, डिजिटल लोन ने उन्हें मिनटों में पैसा मुहैया कराया है। लेकिन, इतनी तेजी से पैसा मिलना अक्सर लोगों को लोन से जुड़े खतरों के बारे में सोचने से रोक देता है।

जब आपका फोन ही हथियार बन जाए

पैसा उधार लेने से भी बड़ा खतरा उन ऐप्स को दी जाने वाली आपकी पर्सनल जानकारी है। ज्यादातर लोन ऐप्स आपके फोन के कॉन्टैक्ट्स, फोटो और मीडिया फाइल्स का एक्सेस मांगते हैं। यह एक सामान्य प्रक्रिया लग सकती है, लेकिन एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि कंपनियां इसका इस्तेमाल ग्राहकों को ब्लैकमेल करने के लिए एक हथियार के तौर पर करती हैं।

उन ऐप्स से हमेशा सावधान रहें जो बहुत ज्यादा प्रोसेसिंग फीस लेते हैं, सिर्फ एक या दो हफ्ते की रीपेमेंट अवधि देते हैं, या जिनका सालाना ब्याज 25% से ज्यादा है। ऐप डाउनलोड करने से पहले यह जांचना बहुत जरूरी है कि वह रिजर्व बैंक (RBI) से मान्यता प्राप्त किसी बैंक या NBFC द्वारा चलाया जा रहा है या नहीं।

सर्वे बताते हैं कि जहां बैंक आमतौर पर 10 से 20% तक ब्याज लेते हैं, वहीं डिजिटल लोन का इस्तेमाल करने वाले 45% लोग 25% से ज्यादा सालाना ब्याज चुकाते हैं। कुछ गैर-कानूनी ऐप्स तो सैकड़ों प्रतिशत तक ब्याज वसूलते हैं। इससे लोन चुकाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। छिपे हुए प्रोसेसिंग चार्ज और अस्पष्ट नियम-शर्तें हालात को और भी खराब कर देते हैं।

लोन लेने से पहले अपने अधिकार जानें

यह कभी न मानें कि किस्त चुकाने में देरी होने पर धमकी देना रिकवरी का हिस्सा है। रिकवरी एजेंट्स को ग्राहकों को धमकाने, गाली देने या सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। वे पुलिस या अदालत की तरह बर्ताव नहीं कर सकते। अगर आपके पर्सनल डेटा का गलत इस्तेमाल होता है या आपको धमकी दी जाती है, तो आप RBI लोकपाल (Ombudsman) से शिकायत कर सकते हैं। डेटा के गलत इस्तेमाल से जुड़े मामलों में आप साइबर पुलिस से भी संपर्क कर सकते हैं। और सबसे जरूरी बात जो याद रखनी है, वह यह है: एक EMI चूकना कोई क्रिमिनल जुर्म नहीं है।