सार

ईएसआईसी की स्वास्थ्य बीमा योजना इस साल के अंत तक पूरे देश में लागू की जाएगी। इस बात का निर्णय ईएसआईसी की हुई बैठक में लिया गया है। साथ ही कहा गया है कि 100 बेड वाले 23 अस्पताल पूरे भारत में बनाए जाएंगे। 

नई दिल्लीः ईएसआईसी (ESIC) की स्वास्थ्य बीमा योजना को पूरे देश में लागू करने का फैसला कर लिया है। 2022 के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अभी यह योजना देश के 443 जिलों और आंशिक रूप से 153 जिलों में लागू है। कुल 148 जिले अभी भी इस बीमा योजना के दायरे से बाहर हैं। ईएसआईसी की हुई 188वीं बैठक में देश भर में चिकित्सा देखभाल और सर्विस डिलीवरी सिस्टम के विस्तार के लिए कई अहम फैसले लिए गए। साल के अंत तक योजना के तहत आनेवाले जिलों को पूरी तरह से ईएसआईसी टोजना के दायरे में लाया जाएगा। 

 

ईएसआईसी बनाएगा 23 नया अस्पताल
ईएसआईसी की क्लिनिक और ऑफिस बनाकर सभी तरह की स्वास्थ्य सुविधा दी जाएगी। कर्मचारियों को इससे काफी फायदा भी होगा। बैठक में नए अस्पताल बनाने का भी निर्णय लिया गया। ईएसआईसी ने देशभर में 100 बिस्तरों वाले 23 नए अस्पताल खोलने का भी फैसला किया है। इनमें से छह अस्पताल महाराष्ट्र के पालघर, सतारा, जलगांव, पनवेल और चाकन में स्थापित किए जाएंगे। हरियाणा में चार क्रमशः हिसार, सोनीपत, अंबाला और रोहतक में अस्पताल खोले जाएंगे।

उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद और गोरखपुर, तमिलनाडु में चेंगलपट्टू और इरोड और कर्नाटक में तुमकुर और उडुपी अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। ईएसआईसी छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, आंध्र प्रदेश के नल्लोर, गोवा के मुलगांव, ओडिशा के झारसुगुडा, गुजरात के साणंद, मध्यप्रदेश के जबलपुर और पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में भी एक-एक अस्पताल स्थापित करेगा। 

ईएसआईसी के अस्पताल का इंफ्रास्ट्रक्चर होगा बेहतर
हॉस्पिटल के अलावा अलग-अलग जगहों पर क्लिनिक भी खोली जाएंगी। महाराष्ट्र में 48, दिल्ली में 12 और हरियाणा में 2 डिस्पेंसरियां खोली जाएंगी। हॉस्पिटल और क्लिनक के जरिये बीमा किए हुए कर्मचारी और उनके डिपेंडेंट को बेहतर गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। बेहतरीन मेडिकल केयर के लिए ईएसआईसी नए अस्पतालों की स्थापना और अभी के अस्पतालों के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है। ईएसआईसी ने ESIC ह़ॉस्पिटल, सोनागिरी, भोपाल को सीधे अपने कंट्रोल में चलाने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार द्वारा संचालित ईएसआईसी अस्पतालों में स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट के अंतर को खत्म करने के लिए बेहतर प्रोफेशनल्स की जरूरत पड़ेगी।  

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