शादी में 10 लाख रुपये कैश मिलने से एक कर्मचारी को इनकम टैक्स का डर है। सेक्शन 56 के तहत शादी के गिफ्ट टैक्स फ्री होते हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने डोनर्स की लिस्ट बनाने और टैक्स एडवाइजर से सलाह लेने का सुझाव दिया है।
शादी के सीजन में अगर आपको भी मोटा कैश गिफ्ट में मिलता है, तो क्या इनकम टैक्स वाले आपसे सवाल-जवाब कर सकते हैं? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आजकल इसी बात पर जोरदार बहस चल रही है। 'पूजा' नाम की एक यूजर ने अपने कजिन का किस्सा शेयर किया, जिसके बाद यह चर्चा शुरू हुई। पूजा का कजिन एक सरकारी कर्मचारी है और उसे अपनी शादी में करीब 10 लाख रुपये कैश गिफ्ट में मिले हैं। शादी में आए करीब 110 मेहमानों ने ये पैसे दिए। किसी ने 500 या 2,000 रुपये दिए, तो किसी ने 25,000 से लेकर 50,000 रुपये तक का शगुन दिया।
अब इतना सारा कैश हाथ में आने के बाद परिवार वाले घबराए हुए हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे इन पैसों का सोर्स कैसे साबित करेंगे और क्या इनकम टैक्स विभाग उनसे पूछताछ करेगा।
पूजा ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'मेरा कजिन सरकारी नौकरी करता है। उसे शादी में 10 लाख रुपये कैश गिफ्ट मिले हैं। लेकिन अब वह डरा हुआ है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इस मामले को किस तरह देखेगा।'
क्या कहता है नियम?
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 56 के तहत, शादी में मिलने वाले गिफ्ट्स पर टैक्स छूट मिलती है। इसमें कैश, सोने के गहने और प्रॉपर्टी जैसी चीजें शामिल हैं। यह छूट सिर्फ रिश्तेदारों से मिलने वाले गिफ्ट्स पर ही नहीं, बल्कि दोस्तों और मेहमानों से मिलने वाले शगुन पर भी लागू होती है।
हालांकि कानून में छूट है, लेकिन कई लोगों ने बिना हिसाब के इतना बड़ा कैश रखने में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों के बारे में बताया। एक यूजर ने सलाह दी कि भविष्य में अगर पैसों के सोर्स को लेकर कोई सवाल उठता है, तो बचने के लिए एक लिस्ट बनाकर रख लें। इस लिस्ट में पैसे देने वालों के नाम और रकम की जानकारी होनी चाहिए।
एक अन्य यूजर ने कहा कि सारा पैसा एक साथ बैंक में जमा करने के बजाय, इसे थोड़ा-थोड़ा करके अकाउंट में डालें। इसके अलावा, घर के खर्चों के लिए यूपीआई (UPI) की जगह इसी कैश का इस्तेमाल करें। वहीं, एक और अहम सलाह यह थी कि 'इस पैसे को बैंक में जमा करने से पहले किसी टैक्स एडवाइजर से जरूर बात कर लें ताकि कोई कन्फ्यूजन न रहे।'
