FSSAI ने ओल्ड मोंक को अपनी बोतलों पर 'रम' की जगह 'रम जैसा' लिखने का निर्देश दिया है। बात न मानने पर महाराष्ट्र में इसकी बिक्री रोक दी गई है, जिससे कंपनी को भारी नुकसान हुआ है।

मुंबई: देश के सबसे मशहूर और पुराने शराब ब्रांड 'ओल्ड मोंक' (Old Monk) को बनाने वाली कंपनी को बड़ा झटका लगा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक अजीब शर्त रख दी है। FSSAI का कहना है कि ओल्ड मोंक की बोतलों पर 'रम' (Rum) नहीं, बल्कि 'रम जैसा' (Rum-like) लिखा होना चाहिए। इस विवाद के चलते महाराष्ट्र में ओल्ड मोंक की बिक्री पूरी तरह से ठप हो गई है। इससे कंपनी को 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। अब यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है और शराब इंडस्ट्री में इसे लेकर काफी हलचल है।

हाईकोर्ट में क्या-क्या हुआ?

बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एम.सी. त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। कोर्ट में FSSAI की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह पेश हुए। उन्होंने साफ कहा कि अगर कंपनी 'रम जैसा' वाला नया लेबल लगाने को तैयार होती है, तभी उन्हें महाराष्ट्र में शराब बेचने की इजाजत मिलेगी।

ओल्ड मोंक बनाने वाली कंपनी 'मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर प्राइवेट लिमिटेड' (Mohan Rocky Springwater Pvt Ltd) के वकील वेंकटेश धोंड ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कोर्ट को बताया कि महाराष्ट्र के ठाणे जिले में मौजूद उनके प्लांट से बिक्री पर रोक लगने के कारण कंपनी को पहले ही 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा हो चुका है।

वकील ने यह भी बताया कि इस बैन से सिर्फ कंपनी को ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र आबकारी विभाग (Excise Department) को भी करीब 350 करोड़ रुपये के टैक्स का नुकसान हुआ है। इसके अलावा, प्लांट में काम करने वाले 300 से ज्यादा कर्मचारी बेरोजगार होकर सड़क पर आ गए हैं। उन्होंने दलील दी कि देश के बाकी सभी राज्यों में ओल्ड मोंक धड़ल्ले से बिक रही है, सिर्फ महाराष्ट्र में ही FSSAI ने यह अड़ंगा लगाया है।

आखिर विवाद की जड़ क्या है?

FSSAI के सख्त नियमों के मुताबिक, अगर बेस अल्कोहल में अलग से आर्टिफिशियल या नेचुरल रम फ्लेवर (Added Rum Flavouring) मिलाया जाता है, तो उसे 'रम' कहकर बेचना ग्राहकों को गुमराह करना है। FSSAI का तर्क है कि ऐसे प्रोडक्ट्स को 'फ्लेवर्ड स्पिरिट' (Flavoured Spirit) या 'रम जैसी शराब' के तौर पर लेबल किया जाना चाहिए।

इसके अलावा, FSSAI ने ओल्ड मोंक की बोतलों पर लिखे "7 इयर्स ओल्ड ब्लेंडेड" (7 years old blended) और "वेरी ओल्ड वेटेड" (Very old vatted) जैसे उम्र बताने वाले दावों पर भी ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि ये बातें नियमों के खिलाफ हैं।

23 अक्टूबर को होगी फाइनल सुनवाई

इससे पहले हाईकोर्ट ने FSSAI के आदेश पर तुरंत रोक लगाने से इनकार कर दिया था। विवाद सुलझाने के लिए कंपनी ने एक बीच का रास्ता भी निकाला था। उन्होंने उम्र वाले दावों को हटाकर लेबल पर साफ-साफ 'एडेड फ्लेवर' (Added Flavour) लिखने का प्रस्ताव दिया, लेकिन FSSAI ने इसे भी ठुकरा दिया। जब दोनों पक्षों के बीच बातचीत से कोई हल नहीं निकला, तो कंपनी ने कोर्ट से मामले की फाइनल सुनवाई करने की अपील की। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसे मंजूर कर लिया है और अब 23 अक्टूबर को इस मामले की अंतिम सुनवाई होगी, जिसके बाद फैसला सुनाया जाएगा।