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देशवासियों से प्रेसिडेंट कोविंद की अपील, 'देशवासियों के बेहतर कल के लिए खरीदें भारत में बने सामान'

रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार को कहा कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है और देश को 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
 

Ramnath Kovind's appeal to countrymen buy goods made in India for better tomorrow  kpm
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New Delhi, First Published Jan 31, 2020, 4:15 PM IST
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नई दिल्ली. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार को कहा कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है और देश को 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे 'बेहतर कल' के लिए स्थानीय उत्पादों की खरीद करें।

सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा

संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, "मैं पंचायत से लेकर संसद तक, देश के प्रत्येक जनप्रतिनिधि से, देश की हर सरकार से आग्रह करता हूं कि 'उज्ज्वल कल के लिए स्थानीय' को एक आंदोलन में परिवर्तित करें। मैं प्रत्येक भारतीय से भी आग्रह करूंगा कि वे स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें। स्थानीय स्तर पर बनी वस्तुओं का उपयोग करने पर आप अपने क्षेत्र के लघु उद्यमियों की बहुत बड़ी मदद करेंगे।"

रामनाथ कोविंद ने कहा कि

उन्होंने कहा कि आजादी के मूलमंत्र में एक भावना थी- आत्मनिर्भर भारत। आत्मनिर्भर भारत तब बनता है जब हर भारतीय, भारत में बनी हर वस्तु पर गर्व करे। उन्होंने कहा कि सरकार देश को 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस लक्ष्य को पाने के लिए सरकार सभी अंशधारकों के साथ विचार विमर्श कर के हर स्तर पर प्रयास कर रही है।"

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत 

कोविंद ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है। "हमारा विदेशी मुद्रा भंडार 450 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।" राष्ट्रपति ने कहा कि देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) भी बढ़ रहा है।

तीन अरब डॉलर अधिक विदेशी निवेश आया

चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अक्टूबर के दौरान देश में पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में तीन अरब डॉलर अधिक विदेशी निवेश आया है। राष्ट्रपति ने कहा कि 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने में देश के दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों की प्रमुख भूमिका होगी।

335 नए हवाई मार्गों की दी अनुमति 

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से ही छोटे शहरों में स्टार्ट-अप्स की 45 से 50 प्रतिशत की वृद्धि दर देखी गई है। इसी तरह उड़ान योजना के तहत करीब 35 लाख लोग अब तक हवाई यात्रा कर चुके हैं। पिछले वर्ष 335 नए हवाई मार्गों की अनुमति दी गयी है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा 

उन्होंने कहा कि अनुमान है कि आने वाले वर्षों में देश का आधे से ज्यादा डिजिटल लेन-देन इन्हीं दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में होगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि पांच लाख रुपये तक की आय को करमुक्त करने से भी सबसे अधिक लाभ छोटे शहरों के मध्यम वर्ग को हुआ है। मध्यम वर्ग के जिन परिवारों की आय 18 लाख रुपये तक की है, उन्हें 20 वर्ष तक के आवास ऋण पर 5 से 6 लाख रुपये तक की बचत हो रही है।

सरकार द्वारा 25 हज़ार करोड़ रुपये कोष की व्यवस्था की गई

कोविंद ने कहा, "घरों को बनाने की अधूरी और लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा 25 हज़ार करोड़ रुपये कोष की व्यवस्था की गई है। इसका सबसे अधिक लाभ मध्यम वर्ग को ही मिलेगा।" कोविंद ने कहा, "आज देश में 121 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास आधार कार्ड है तथा लगभग 60 करोड़ लोगों के पास रूपे कार्ड है। दिसंबर 2019 में यूपीआई के माध्यम से रिकॉर्ड दो लाख करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ है। हाल ही में सरकार ने भीम एप का नया संस्करण भी पेश किया है।" उन्होंने कहा कि जनधन-आधार और मोबाइल की त्रिशक्ति यानी 'जेएएम' का इस्तेमाल करते हुए सरकार द्वारा अपनी लगभग 450 योजनाओं को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) से जोड़ा जा चुका है। डीबीटी के माध्यम से पिछले 5 वर्षों में 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डाली गई है।

एक देश एक फास्टैग योजना की शुरूआत

उन्होंने कहा कि इसमें गड़बड़ियां रुकने से 1.70 लाख करोड़ रुपये की राशि गलत हाथों में जाने से बची है। उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल में एक देश एक फास्टैग योजना शुरू की है, जिससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात में रुकावट समाप्त होगी।

एक देश एक राशन कार्ड की भी शुरुआत

कोविंद ने कहा कि इसके अलावा एक देश एक राशन कार्ड की भी शुरुआत भी की जा रही है।

वहीं एक देश एक कर यानी जीएसटी ने भी प्रौद्योगिकी के जरिये देश में पारदर्शी व्यापार को बढ़ावा दिया है। "जब जीएसटी नहीं था तो दो दर्जन से ज्यादा अलग-अलग कर लागू थे। अब कर का जाल तो समाप्त हुआ ही है, कर भी कम हुआ है।"

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)
 

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