RBI Gold Sale Controversy Fact Check: क्या रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए देश का सोना बेच दिया है? सोना बेचने का यह दावा कहां से शुरू हुआ, इस पर क्या विवाद है और इसमें सच्चाई कितनी है? इस विवाद से आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा? क्या सरकार का अब तक कोई जवाब आया?
Gold Reserves India: पिछले 24 घंटों से सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक, हर जगह बस एक ही चर्चा चल रही है, 'क्या सरकार ने देश का सोना बेच दिया है?' एक ग्लोबल रिपोर्ट के बाद देश में इस मुद्दे पर भारी सियासी घमासान छिड़ गया है। इससे आम आदमी के मन में भी कई तरह के सवाल चलने लगे हैं। लेकिन क्या सच में ऐसा हुआ है? क्या भारत का गोल्ड रिजर्व कम हो रहा है? और क्या आपको इसकी चिंता करनी चाहिए? आइए पूरे मामले को 5 पॉइंट्स में समझते हैं...

गोल्ड रिजर्व को लेकर कहां से शुरू हुआ विवाद?
पूरे मामले की शुरुआत ब्लूमबर्ग (Bloomberg) की एक रिपोर्ट से हुई। इस रिपोर्ट में एक आर्थिक एक्सपर्ट ने दावा किया कि रिजर्व बैंक (RBI) ने मई महीने के आखिरी दो हफ्तों में करीब 12 अरब डॉलर (लगभग ₹1 लाख करोड़) का सोना बेचा है। रिपोर्ट में कहा गया कि मिडिल ईस्ट (इजराइल-अमेरिका-ईरान संकट) में चल रहे तनाव के बीच विदेशी मुद्रा भंडार (डॉलर) को बचाने के लिए आरबीआई को शायद यह कदम उठाना पड़ा।
सरकार और RBI का क्या कहना है?
जैसे ही यह खबर फैली, सरकार और बैंकिंग सूत्रों ने तुरंत सामने आकर इसका खंडन किया। CNBC-TV18 की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी सूत्रों ने साफ-साफ कहा है कि यह खबर पूरी तरह से झूठी (False) और बेबुनियाद है। रिजर्व बैंक ने देश की विदेशी मुद्रा को सुरक्षित रखने के लिए अपने सोने के भंडार में से एक ग्राम सोना भी नहीं बेचा है। देश का खजाना पूरी तरह सुरक्षित है।
तो फिर रिपोर्ट में सोना कम होने का दावा क्यों किया गया?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार ने सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) बढ़ाई थी, जिसके हिसाब से आरबीआई के पास रखे सोने की कीमत कागजों पर बढ़नी चाहिए थी, लेकिन वह कम दिखाई दे रही थी। इसी अंतर को देखकर एक्सपर्ट ने अनुमान लगा लिया कि सोना बेचा गया है। जबकि असलियत यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव और वैल्यूएशन के तौर-तरीकों की वजह से वह आंकड़ा अलग दिख रहा था, न कि सोना बेचने की वजह से।
सोशल मीडिया और राजनीति में क्यों मचा है घमासान?
सोने की खबर आते ही इस पर राजनीति भी तेज हो गई। कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सरकार को घेरते हुए पोस्ट किया कि 'यह अमृत काल है। मोदी सरकार ने देश का सोना बेच दिया है।' विपक्ष के इस हमले के बाद आम लोग सोशल मीडिया पर 1991 के उस दौर की चर्चा करने लगे जब देश को अपना सोना गिरवी रखना पड़ा था। लेकिन आज की हकीकत उस दौर से बिल्कुल अलग और बेहद मजबूत है।
आपकी जेब, बैंक खाते और निवेश पर क्या असर होगा?
- एक्सपर्ट्स और सरकार के अनुसार, आपका पैसा बैंकों में पूरी तरह से सुरक्षित है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) रिकॉर्ड स्तर पर है, इसलिए किसी भी अफवाह में आकर अपनी एफडी तोड़ने या पैनिक होने की कोई जरूरत नहीं है।
- ग्लोबल मार्केट में युद्ध के हालातों की वजह से थोड़ी हलचल हो सकती है, लेकिन देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत है।
- सरकार के स्पष्टीकरण के बाद घरेलू सर्राफा बाजार में कोई पैनिक नहीं है।


