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RBI ने मांग की खारिज, क्रेडिट कार्ट डेटा स्टोर नहीं कर सकतीं ई-कॉमर्स कंपनियां

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने जुलाई 2021 से लागू होने जा रहे पेमेंट एग्रीगेटर्स और पेमेंट गेटवे नियमों के तहत ई-कॉर्मस कंपनियों की कस्टमर्स का क्रेडिट डेटा स्टोर करने की मांग को ठुकरा दिया है।

RBI rejects demand of e commerce companies for storage of data of credit card MJA
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New Delhi, First Published Feb 26, 2021, 3:11 PM IST
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बिजनेस डेस्क। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने जुलाई 2021 से लागू होने जा रहे पेमेंट एग्रीगेटर्स और पेमेंट गेटवे नियमों के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों की कस्टमर्स का क्रेडिट डेटा स्टोर करने की मांग को ठुकरा दिया है। बता दें कि इन कंपनियों ने रेग्युलेटर्स के साथ एक मीटिंग करने की मांग की थी। इस मांग को भी रिजर्व बैंक ने नहीं माना था। रिजर्व बैंक का साफ कहना है कि अमेजन (Amazon), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), नेटफ्लिक्स (Netflix), फ्लिपकार्ट (Flipkart) और जोमैटो (Zomato) जैसे ऑनलाइन मर्चेंट्स कस्टमर्स का क्रेडिट कार्ड डेटा अपने पास नहीं रख सकते। रिजर्व बैंक का मानना है कि इससे साइबर सिक्युरिटी को खतरा पहुंच सकता है। बता दें कि वीसा और मास्टरकार्ड जैसे क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले ऑपरेटर्स ने भी कस्टमर का डेटा स्टोर करने की मांग का समर्थन किया था, लेकिन रिजर्व बैंक ने इस मानने से इनकार कर दिया।

क्या है गाइडलाइन
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की नई गाइडलाइन के तहत ये ऑनलाइन कंपनियां और सर्विस प्रोवाइडर अपने सर्वर पर कस्टमर का डेटा स्टोर नहीं कर सकते। इसी गाइडलाइन के तहत पेमेंट एग्रीगेटर्स भी ऐसा नहीं कर सकते। वहीं, इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि डेटा स्टोर करने की परमिशन नहीं देने से कस्टमर्स की परेशानी बढ़ सकती है। इससे डिजिटल इकोसिस्टम भी प्रभावित होगा। 

पैदा हो सकता है संकट
एक रिपोर्ट के मुताबिक, डेटा स्टोर नहीं करने से ऑनलाइन कंपनियों को कस्टमर के साथ ट्रांजैक्शन करते वक्त हमेशा ऑथेंटिकेशन के लिए बैंक से संपर्क करना होगा और एपीआई (API) को कॉल करना होगा। इससे सब्सक्रिप्शन वाली सर्विसेस में भी परेशान पैदा हो सकती है। इसमें कस्टमर्स को बिल भेजने के लिए क्रेडिट कार्ड का डेटा स्टोर करना जरूरी होता है।

क्या कहना है ऑनलाइन कंपनियों का
ऑनलाइन कंपनियों और मर्चेंट्स का कहना है कि रेगुयुलेटर पेमेंट कार्ड इंडस्ट्री डेटा सिक्युरिटी स्टैंडर्ड (PCI-DSS) को मान्यता देता है। इसी के आधार पर कंपनियां अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रही थीं। उनका कहना है कि अब रिजर्व बैंक अपने पहले वाले रुख से अलग हट रहा है और उसका यह रवैया मनमानी वाला है। इनका कहना है कि कार्ड की सुरक्षा के लिए PCI-DSS स्टैंडर्ड दुनिया भर में सबसे सही माना जाता है। कंपनियों का कहना है कि रिजर्व बैंक ने अपने 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स इन इंडिया : विजन 2019-2021' में इसे स्वीकार किया है। बहरहाल, अभी इस मुद्दे का कोई हल सामने नहीं आ सका है। 

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