दिवाली से ठीक पहले देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) समेत कुछ निजी बैंकों ने ने भी ग्राहकों को एक बड़ा झटका दिया है। दरअसल, एसबीआई समेत इन बैंकों ने अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) बढ़ा दिए हैं। इसके चलते अब सभी तरह के लोन महंगे हो जाएंगे। 

SBI Hikes MCLR: दिवाली से ठीक पहले देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) समेत कुछ निजी बैंकों ने ने भी ग्राहकों को एक बड़ा झटका दिया है। दरअसल, एसबीआई समेत इन बैंकों ने अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) बढ़ा दिए हैं। इसके चलते अब सभी तरह के लोन महंगे हो जाएंगे और कस्टमर्स को ज्यादा EMI चुकानी पड़ेगी। बता दें कि बढ़ती महंगाई के बीच बैंकों के MCLR बढ़ाने का सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ेगा।

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SBI ने कितना बढ़ाया MCLR?
SBI ने एक साल की अवधि के लिए MCLR को 0.25% बढ़ाकर 7.95 फीसदी कर दिया है। नई दरें 15 अक्टूबर से लागू हो चुकी हैं। बैंक ने दो और तीन साल वाले MCLR को भी बढ़ाकर क्रमश: 8.15% और 8.25% कर दिया है। ये पहले 7.90 प्रतिशत और 8 प्रतिशत थीं। एक साल की अवधि वाली एमसीएलआर वो दर है, जिससे ज्यादातर ग्राहकों के कर्ज लिंक होते हैं।

बाकी बैंकों ने इतना किया इजाफा : 
कोटक महिंद्रा बैंक अलग-अलग अवधि के लिए MCLR 7.70 से बढ़ाकर 8.95 फीसदी कर दिया है। ये दरें 16 अक्टूबर से लागू हो गई हैं। एक साल की अवधि वाले कर्ज पर बैंक ने ब्याज दर को बढ़ाकर 8.75% कर दिया है। इसके अलावा फेडरल बैंक ने भी लोन और एडवांस पर एक साल की अवधि वाले एमसीएलआर में बदलाव कर 16 अक्टूबर से 8.70% कर दिया है। 

क्या है MCLR और इसके बढ़ने से क्या होगा?
MCLR वो न्यूनतम दर है, जिस पर बैंक ग्राहकों को लोन ऑफर करते हैं। किसी भी बैंक द्वारा MCLR में किए गए इजाफे के बाद कार, पर्सनल और होम लोन महंगे हो जाते हैं। साथ ही जो लोग नया लोन लेना चाहते हैं, उनके लिए भी एमसीएलआर का बढ़ना अच्छा नहीं माना जाता है। इससे उन्हें ज्यादा महंगा कर्ज मिलेगा। 

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