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UBI को विलय से 2,500 करोड़ रुपए के लाभ की उम्मीद, एक अप्रैल से प्रभाव में आएगा विलय

सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) को उम्मीद है कि प्रस्तावित विलय से शाखाओं को युक्तिसंगत बनाने और संयुक्त नयी इकाई के कारण प्रौद्योगिकी खर्च में बचत से उसे 2,500 करोड़ रुपये का लाभ होगा

UBI expects Rs 2500 crore profit from merger merger will come into effect from April 1 kpm
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New Delhi, First Published Mar 29, 2020, 8:15 PM IST
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नई दिल्ली: सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) को उम्मीद है कि प्रस्तावित विलय से शाखाओं को युक्तिसंगत बनाने और संयुक्त नयी इकाई के कारण प्रौद्योगिकी खर्च में बचत से उसे 2,500 करोड़ रुपये का लाभ होगा।

यूबीआई में आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का विलय कर एक बैंक बनाया जा रहा है। तीनों बैंकों का विलय एक अप्रैल से प्रभाव में आएगा। यह सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों को मिलाकर चार बड़े बैंक बनाने का हिस्सा है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिककारी राजकिरण राय जी ने कहा कि इस विलय प्रक्रिया से आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक के ग्राहकों और कर्मचारियों को कोई समस्या नहीं होगी।

शाखाओं को युक्तिसंगत बनाया जाएगा

उन्होंने फोन पर पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘शाखाओं के युक्तिसंगत होने तथा प्रौद्योगिकी की लागत कम होगी। हम अगले तीन साल में इस विलय के कारण 2,500 करोड़ रुपये से अधिक लाभ की उम्मीद कर रहे हैं।’’ इस विलय के बाद संयुक्त इकाई की शाखाओं की संख्या 9,500 और 12,000 एटीएम होंगे।

राय ने कहा, ‘‘कुल 9,500 शाखाओं में से 700 से अधिक शाखाओं को युक्तिसंगत बनाया जाएगा। इसका कारण इन शाखाओं का एक-दूसरे के आसपास होना है। पहले साल संभवत: 300 शाखाओं को यक्तिसंगत बनाया जाएगा।’’ इस विलय के बाद कर्मचारियों की संख्या 75,000 हो जाएगी। इसमें 37,000 कर्मचारी आंध्रा बैंक तथा कॉरपोरेशन बैंक के होंगे।

एकीकरण में एक साल का समय

राय ने कहा कि प्रौद्योगिकी के एकीकरण में एक साल का समय लग सकता है। उन्होंने कि सितंबर तक कॉरपोरेशन बैंक की और दिसंबर तक आंध्रा बैंक का एकीकरण होगा। उसके बाद नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग को जोड़ने में तीन महीने का और समय लगेगा। राय ने कहा कि ‘लॉकडाउन’ के कारण कुछ प्रकियाएं धीमी हुई हैं लेकिन बैंक उन मसलों के समाधान के लिये काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के एकीकरण का काम पूरा हो चुका है और निदेशक मंडल ने विलय के बाद अस्तित्व में आने वाली इकाई के लिये उत्पाद, प्रक्रियाएं और नीतियों को मंजूरी दे दी है। राय ने कहा, ‘‘मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि ग्राहकों और कर्मचारियों के लिये कोई समस्या उत्पन्न नहीं होगी।’’

नकद जमा लेने की व्यवस्था पहले ही शुरू

कॉरपोरेशन बैंक और आंध्रा बैंक के ग्राहकें के लिये नकद अंतरण और नकद जमा कोष अंतरण, नकद जमा लेने की व्यवस्था पहले ही शुरू हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि रिजर्व बैंक रेपो दर में जो कटौती की है, उसका पूरा लाभ विलय के बाद के बाद अस्तित्व में आने वाला बैंक अपने ग्राहकों को देगा।

राय ने कहा कि आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक की कुछ संपत्तियों को चिन्हित किया गया है और धीरे-धीरे उनका निपटान कर दिया जाएगा।

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)

(फाइल फोटो)
 

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