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सरकार ने दी टैक्सपेयर्स को राहत, 'विवाद से विश्वास' स्कीम के तहत 31 मार्च तक बढ़ी पेमेंट की डेडलाइन

सरकार ने प्रत्यक्ष कर से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए ‘विवाद से विश्वास’ (Vivad se Vishwas) स्कीम के तहत विवरण देने की डेडलाइन बढ़ाकर 31 मार्च कर दी है। इसकी जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ट्वीट करके दी है।

vivad se vishwas scheme deadline extended till March 31st 2021 MJA
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New Delhi, First Published Feb 27, 2021, 2:04 PM IST
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बिजनेस डेस्क। सरकार ने प्रत्यक्ष कर से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए ‘विवाद से विश्वास’ (Vivad se Vishwas) स्कीम के तहत विवरण देने की डेडलाइन बढ़ाकर 31 मार्च कर दी है। इसकी जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ट्वीट करके दी है। इसके अलावा, इस योजना के तहत फीस जमा करने की आखिरी तारीख भी बढ़ाकर 30 मार्च कर दी गई है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ट्विटर पर अपने पोस्ट में कहा है कि सीबीडीटी (CBDT) ने 'विवाद से विश्वास' येजना के तहत संपत्ति की घोषणा करने की समय सीमा बढ़ाकर 31 मार्च, 2020 कर दी है। वहीं, बिना कोई अतिरिक्त राशि के भुगतान की समय सीमा बढ़ाकर 30 अप्रैल, 2021 कर दी गई है।

इतने मामलों का निपटारा
इस योजना के तहत घोषणा करने की समय सीमा 28 फरवरी थी, जबकि विवादित कर राशि भुगतान की सीमा 31 मार्च थी। बता दें कि अब तक 1,25,144 मामलों के निस्तारण के लिए विवाद से विश्वास योजना के विकल्प को चुना गया है। यह लंबित 5,10,491 मामलों का 24.5 प्रतिशत है। करीब 97,000 करोड़ रुपए मूल्य के विवादित कर के मामलों को निपटाने के लिए इस योजना को चुना गया है।

इन मामलों का होता है निपटारा
विवाद से विश्वास योजना में विवादित कर, विवादित ब्याज, विवादित जुर्माना या विवादित शुल्क के निपटारे का विकल्प मिलता है। इसके तहत विवादित कर का 100 फीसदी और विवादित जुर्माना, ब्याज या शुल्क का 25 फीसदी देकर लंबित मामलों का निपटारा किया जा सकता है।

क्या है विवाद से विश्वास स्कीम
विवाद से विश्वास योजना की शुरुआत 17 मार्च, 2020 को केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई। यह वित्त मंत्रालय की योजना है। इस योजना का मकसद लोगों को करों के विवाद से छुटकारा दिलाना है। लोग कोर्ट-कचहरी के झंझट में नहीं पड़ें और अपने मामलों का आसानी से निपटारा कर सकें, इसलिए यह योजना शुरू की गई है। बता दें कि देश में प्रत्यक्ष कर से जुड़े 4 लाख से ज्यादा मामले कोर्ट में लंबित हैं। इससे निपटने के लिए यह योजना कारगर है। इसमें टैक्सपेयर्स को सिर्फ विवादित टैक्स की राशि का भुगतान करना होता है। सरकार ब्याज और जुर्माने पर छूट देती है।

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