देश में कैश की कोई कमी नहीं है, फिर भी ATM पर 'नो कैश' का बोर्ड क्यों दिख रहा है? इसकी वजह नोटों की कमी नहीं, बल्कि बैंकों से ATM तक कैश पहुंचाने के सिस्टम में गड़बड़ी और UPI का बढ़ता इस्तेमाल है।

नई दिल्लीः आजकल ATM जाना और 'नो कैश' का बोर्ड देखकर लौटना आम बात हो गई है। लेकिन क्या देश में सच में नोटों की कमी है? सरकारी आंकड़े तो कुछ और ही कहानी कहते हैं। रिज़र्व बैंक (RBI) के मुताबिक, बाज़ार में मौजूद करेंसी रिकॉर्ड स्तर पर है। यह 12% की सालाना बढ़त के साथ 42.56 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। मतलब, दिक्कत कैश की कमी की नहीं है। असली वजह बैंकों से ATM और फिर ग्राहकों तक पैसा पहुंचाने वाले सिस्टम की बड़ी खामियां हैं।

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1. ATM में कैश भरने में गड़बड़ी

ATM में कैश भरने का काम देखने वाली इंडिपेंडेंट ATM ऑपरेटर्स को बैंकों से पूरा पैसा ही नहीं मिल रहा है। कमर्शियल बैंक उन्हें पहले के मुकाबले बहुत कम कैश दे रहे हैं। नवंबर 2025 में इन ऑपरेटर्स को जरूरत का 80% कैश मिल रहा था। लेकिन मार्च 2026 में यह घटकर 64% और अप्रैल-मई 2026 में सिर्फ 57% रह गया। देश के ATM नेटवर्क को चलाने के लिए हर महीने 94,000 करोड़ रुपये चाहिए, लेकिन ऑपरेटर्स को मिल रहे हैं सिर्फ 54,000 करोड़ रुपये। यही वजह है कि कई ATM दिनों तक खाली पड़े रहते हैं।

2. UPI ने बदला पूरा खेल

UPI से होने वाले लेनदेन में भारी उछाल आया है। इसका सीधा असर ATM के इस्तेमाल पर पड़ा है। पिछले साल के मुकाबले ATM का इस्तेमाल 10% से ज़्यादा घट गया है। ATM ऑपरेटर्स के कॉन्ट्रैक्ट इस अनुमान पर बने थे कि ATM का इस्तेमाल हर साल सिर्फ 3% ही घटेगा। उनकी मुख्य कमाई हर ट्रांजैक्शन पर मिलने वाली फीस से होती है। जब ग्राहक ही कम हो गए, तो इन ऑपरेटर्स के लिए ATM चलाना एक बड़ा घाटे का सौदा बन गया है।

3. खर्च बढ़ा, ग्राहकों का तरीका भी बदला

ATM चलाने का खर्च, जैसे- ईंधन, सिक्योरिटी और कर्मचारियों की सैलरी, दिन-ब-दिन बढ़ रहा है। ऊपर से, 1 अप्रैल से बैंकों ने फ्री लिमिट के बाद हर ट्रांजैक्शन पर चार्ज बढ़ाकर 23 रुपये कर दिया। कई बैंकों ने UPI के जरिए होने वाले कार्डलेस ATM विड्रॉल को भी फ्री लिमिट में शामिल कर लिया। इसका नतीजा यह हुआ कि ग्राहकों ने ATM जाने की संख्या कम कर दी, लेकिन जब भी जाते हैं, तो एक बार में बड़ी रकम निकालने लगे हैं। लोगों के इस बदले हुए तरीके ने ATM में कब और कितना कैश रखना है, इसका अनुमान लगाने वाले सिस्टम का पूरा गणित बिगाड़ दिया है।

RBI और सरकार का क्या कहना है?

कुछ आर्थिक जानकारों का मानना है कि रुपये की गिरावट रोकने के लिए RBI ने जो विदेशी मुद्रा भंडार बेचा, उससे बैंकिंग सिस्टम में कैश की कुछ समय के लिए कमी हुई। हालांकि, RBI का कहना है कि जरूरत के हिसाब से नोट छापे जा रहे हैं और बैंकों के पास भी पर्याप्त कैश है। ATM में कैश की किल्लत की वजह सप्लाई चेन की गड़बड़ियां और इंडिपेंडेंट एजेंसियों के साथ कॉन्ट्रैक्ट की समस्याएं हैं। सरकार ने उन फर्जी खबरों को भी खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा था कि RBI, ATM के जरिए 500 रुपये के नोटों की सप्लाई बंद कर रहा है। अधिकारी 500 रुपये के नोटों की अधिकता और 10, 20, 50 रुपये जैसे छोटे नोटों की कमी से होने वाली दिक्कतों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। बस स्टैंड और बाजार जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर छोटे नोट देने वाले खास ATM और हाइब्रिड ATM भी लगाए जाएंगे।