Corporate Job vs Content Creator Viral Video: कॉरपोरेट जॉब और कंटेंट क्रिएटर की जिंदगी में कितना फर्क है? दो लड़कियों ने वीडियो में सैलरी, आजादी, वर्क-लाइफ बैलेंस और चुनौतियों की तुलना कर दिखाई हकीकत। देखें वायरल वीडियो।
Corporate Job vs Content Creator: आज के दौर में बड़ी संख्या में युवा यह सोचते हैं कि कॉरपोरेट नौकरी बेहतर है या फिर फुल-टाइम कंटेंट क्रिएशन। इसी सवाल को लेकर बेंगलुरु की दो युवतियों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। खास बात यह है कि दोनों ने अपनी-अपनी प्रोफेशनल लाइफ का अनुभव बेहद सरल अंदाज में शेयर किया, जिससे हजारों लोग खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं।
एजुकेशन बराबर लेकिन एक फुल-टाइम कंटेंट क्रिएटर और दूसरी फ्रीलांसर
एक तरफ EY में एनालिस्ट के तौर पर काम करने वाली अनन्या हैं, जबकि दूसरी तरफ मॉनसून डे हैं, जो फुल-टाइम कंटेंट क्रिएटर और फ्रीलांसर हैं। दोनों ने बताया कि उन्होंने Christ University से BBA की पढ़ाई की, लेकिन करियर के लिए अलग-अलग रास्ते चुने।
हर महीने तय सैलरी बनाम अनिश्चित कमाई
वीडियो में सबसे पहले दोनों ने अपनी कमाई के तरीके की तुलना की। अनन्या ने बताया कि उन्हें हर महीने तय तारीख पर सैलरी मिल जाती है। वहीं मॉनसून ने कहा कि फ्रीलांसिंग में पेमेंट का कोई निश्चित समय नहीं होता। कई बार पैसे पाने के लिए क्लाइंट को बार-बार फॉलो-अप करना पड़ता है और इनवॉइस भेजने के बाद भी इंतजार करना पड़ता है। हालांकि मॉनसून का कहना है कि इस प्रोफेशन में कमाई की कोई तय सीमा भी नहीं होती। जितनी बेहतर स्किल और जितना ज्यादा काम, उतनी ज्यादा कमाई की संभावना रहती है।
ऑफिस रूटीन और वर्क फ्रॉम होम का बड़ा अंतर
कॉरपोरेट लाइफ को लेकर अनन्या ने बताया कि उनका पूरा दिन पहले से तय रहता है। काम का शेड्यूल, मीटिंग्स और डेडलाइन सब पहले से प्लान होती हैं। दूसरी ओर मॉनसून ने कहा कि उनका दिन इस बात पर निर्भर करता है कि उस दिन कौन-सा प्रोजेक्ट और कौन-सी डेडलाइन प्राथमिकता में है। आने-जाने की बात करें तो अनन्या रोज बेंगलुरु के ट्रैफिक में करीब एक घंटा बिताती हैं, जबकि मॉनसून का मजाकिया जवाब था कि उनका सफर सिर्फ बिस्तर से डेस्क तक का होता है।
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छुट्टियां, लंच ब्रेक और काम का दबाव
दोनों ने छुट्टियों और लंच ब्रेक को लेकर भी दिलचस्प तुलना की। अनन्या ने बताया कि उन्हें छुट्टी लेने के लिए पहले आवेदन करना पड़ता है, जबकि मॉनसून को किसी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती। वहीं लंच के मामले में अनन्या तय समय पर खाना खाती हैं, जबकि मॉनसून ने माना कि कई बार काम में व्यस्त होने के कारण उन्हें खाना तक याद नहीं रहता। काम के दबाव पर बात करते हुए अनन्या ने कहा कि लगातार मीटिंग्स और डेडलाइन तनाव बढ़ा सकती हैं। वहीं मॉनसून ने बताया कि कंटेंट क्रिएशन में सबसे बड़ी चुनौती अकेले काम करना है, जहां ज्यादातर समय सिर्फ लैपटॉप और खुद का साथ होता है। नीचे देखें वायरल वीडियो-
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सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?
यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने माना कि कंटेंट क्रिएशन में मिलने वाली आजादी सबसे बड़ा फायदा है। वहीं कुछ यूजर्स ने कहा कि हर महीने तय समय पर मिलने वाली सैलरी मानसिक सुकून देती है और फ्रीलांसिंग में आय की अनिश्चितता कई बार तनाव बढ़ा देती है। कुछ यूजर्स ने दोनों करियर को साथ लेकर चलने को सबसे अच्छा विकल्प बताया। उनका कहना था कि फुल-टाइम नौकरी आर्थिक सुरक्षा देती है, जबकि कंटेंट क्रिएशन अपनी पसंद का काम करने और अतिरिक्त कमाई का मौका देता है। यही वजह है कि आज कई प्रोफेशनल्स नौकरी के साथ-साथ कंटेंट क्रिएशन को भी अपना रहे हैं।
