Unique Government School with Single Teacher Student: भारत के एक गांव में एक ऐसा सरकारी स्कूल है जहां सिर्फ एक छात्रा और एक शिक्षिका हैं, लेकिन स्कूल का सालाना खर्च 12 लाख रुपये है। सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने इस यह स्कूल की पूरी कहानी जानिए।

Unique Government School with Single Teacher Student: देश के एक दूरदराज गांव नारापानी, तेलंगाना में एक ऐसा सरकारी स्कूल है, जो अपनी अनोखी कहानी के लिए चर्चा में है। इस स्कूल की लागत हर साल करीब 12 लाख रुपये है, लेकिन यहां सिर्फ एक छात्रा और एक शिक्षिका हैं। क्या आप सोच सकते हैं कि इतने बड़े खर्च पर चलने वाला यह स्कूल आखिर कैसे काम कर रहा है?

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स्कूल की एकमात्र छात्रा की कहानी

इस स्कूल में पढ़ने वाली 9 साल की कीर्तना अकेली छात्रा हैं। उनके पिता ने उन्हें समझाया है कि अगर स्कूल एक बार बंद हो गया, तो उसे फिर से खोलना लगभग असंभव होगा। यही कारण है कि कीर्तना ने ठान लिया है कि वह 7वीं कक्षा तक इसी स्कूल में पढ़ाई करेंगी। उसके बाद वह किसी बड़े स्कूल में दाखिला लेंगी और संभवतः हॉस्टल में रहेंगी।

एक शिक्षिका, जो रोज आती हैं स्कूल

इस स्कूल की एकमात्र शिक्षिका उमा रोजाना स्कूल आती हैं और केवल कीर्तना को पढ़ाती हैं। उमा का कहना है, "स्कूल में चाहे 10 छात्र हों या सिर्फ एक, मेरी कोशिश होती है कि शिक्षा की गुणवत्ता में कोई कमी न हो। लेकिन हां, कम छात्रों के कारण काम का बोझ जरूर हल्का हो गया है।"

15 साल पहले था 70 छात्रों का स्कूल

15 साल पहले, इस स्कूल में करीब 70 छात्र पढ़ते थे। लेकिन समय के साथ, निजी अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की बढ़ती लोकप्रियता ने सरकारी स्कूलों से छात्रों को दूर कर दिया। आज हालात ये हैं कि पूरा स्कूल केवल एक छात्रा और एक शिक्षिका के सहारे चल रहा है।

सोशल मीडिया पर चर्चा में यह स्कूल

जब कीर्तना और इस स्कूल की कहानी सोशल मीडिया पर सामने आई, तो लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आईं। किसी ने इसे "एकता और समर्पण" की मिसाल कहा, तो किसी ने इसे "शिक्षा व्यवस्था की विफलता" का उदाहरण बताया। लोग कीर्तना को "लकी" कह रहे हैं कि उनके पास एक शिक्षक का पूरा ध्यान है, लेकिन सहपाठियों की कमी उनकी सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है।

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'वी कैन लर्न' प्रोग्राम से जगी उम्मीदें

इस स्कूल को फिर से खड़ी करने के लिए 'वी कैन लर्न' नामक एक कार्यक्रम शुरू किया गया है। यह प्रोग्राम छात्रों की अंग्रेजी और कम्युनिकेशन स्किल को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। साथ ही, शिक्षकों के स्किल को भी बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस पहल से छात्रों का नामांकन बढ़ेगा और स्कूल एक बार फिर से गुलजार हो सकेगा।

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स्कूल बंद होने का डर और संघर्ष

इस अनोखे स्कूल की कहानी ने न केवल तेलंगाना बल्कि पूरे देश का ध्यान खींचा है। सवाल उठता है कि क्या सरकारी स्कूलों की यह स्थिति बदलेगी? या फिर यह स्कूल भी इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर रह जाएगा?

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