InstaAstro के CEO ने एक सीनियर कर्मचारी को 'आगे क्या करना है?' पूछने पर निकाल दिया। उनके मुताबिक, सीनियर प्रोफेशनल्स को खुद पहल करनी चाहिए। इस पोस्ट ने लीडरशिप और 'ओनरशिप' पर एक बड़ी बहस शुरू कर दी है।

InstaAstro के फाउंडर और CEO नितिन वर्मा के एक खुलासे ने इंटरनेट पर बवाल मचा दिया है। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने अपने एक सीनियर कर्मचारी को सिर्फ इसलिए नौकरी से निकाल दिया क्योंकि उसने पूछा था, 'आगे क्या करना है?' इस घटना के बाद से लीडरशिप, जवाबदेही और वर्कप्लेस में 'ओनरशिप' यानी काम को अपना समझने की भावना पर जोरदार बहस छिड़ गई है।

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वर्मा ने ये किस्सा एक लिंक्डइन पोस्ट में शेयर किया। उन्होंने समझाया कि सीनियर लेवल के प्रोफेशनल्स से उम्मीद की जाती है कि वे लीडरशिप के निर्देशों का इंतजार करने के बजाय खुद फैसले लेने में सक्षम हों। वर्मा के मुताबिक, उस कर्मचारी को एक खास डिपार्टमेंट की पूरी जिम्मेदारी संभालने के लिए ही हायर किया गया था, ताकि उन्हें खुद रोज-रोज के कामों में शामिल न होना पड़े। उन्होंने बताया कि उस सीनियर कर्मचारी को शुरुआत से ही 'पूरी आजादी' दी गई थी, जिसमें कोई माइक्रोमैनेजमेंट, बार-बार अप्रूवल लेने की जरूरत या लगातार निगरानी शामिल नहीं थी।

वर्मा ने लिखा, “मैंने किसी को इसलिए नौकरी से निकाल दिया क्योंकि उसने मुझसे पूछा, ‘सर बताइए आगे क्या करना है।’” उस बातचीत को याद करते हुए CEO ने बताया कि उन्होंने तुरंत कर्मचारी के इस रवैये पर सवाल उठाया। "उसने कहा, ‘सर आप बेहतर जानते हैं।’ मैंने पूछा, तो फिर मैंने तुम्हें नौकरी पर क्यों रखा है?" वर्मा ने आगे बताया।

इस पोस्ट के बाद मॉडर्न वर्कप्लेस कल्चर पर बहस तेज हो गई। वर्मा का तर्क है कि 'ओनरशिप' यानी जिम्मेदारी लेने की सोच कोई स्किल नहीं है जिसे लीडर समय के साथ कर्मचारियों को सिखा सकें, बल्कि यह एक जन्मजात मानसिकता है। उन्होंने कहा, "आप यह किसी को दे नहीं सकते। या तो वे इसके साथ आते हैं। या वे इसे कभी नहीं ढूंढ पाते।" उन्होंने आगे कहा, "बिना ओनरशिप के आजादी सिर्फ कन्फ्यूजन पैदा करती है। और मैं ऐसे लोगों के भरोसे कंपनी नहीं बना सकता जिन्हें यह बताने की जरूरत पड़े कि क्या सोचना है।"

वर्मा ने इस बात पर भी जोर दिया कि सीनियर प्रोफेशनल्स को खुद से समस्याओं को पहचानना चाहिए, फैसले लेने चाहिए और फाउंडर या मैनेजर से लगातार इजाजत लेने के बजाय काम को आगे बढ़ाना चाहिए। लिंक्डइन पर कई यूजर्स ने वर्मा की इस लीडरशिप सोच को चुनौती दी। उनका कहना था कि अनुभवी प्रोफेशनल्स को भी कंपनी की उम्मीदों, प्राथमिकताओं और विजन के बारे में स्पष्टता की जरूरत होती है।

कई यूजर्स ने यह भी कहा कि हो सकता है कि वह कर्मचारी कोई बड़ा फैसला लेने से पहले फाउंडर की बड़ी स्ट्रैटेजी के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहा हो। वहीं कुछ लोगों ने तर्क दिया कि स्टार्टअप्स अक्सर बाहर से तो इनोवेशन को बढ़ावा देने का दिखावा करते हैं, लेकिन अंदर से सवाल पूछने या टीम के साथ मिलकर चर्चा करने को हतोत्साहित करते हैं।