स्पोर्ट्स डेस्क. सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट का भगवान कहा जाता था। वह दुनिया के महान बल्लेबाजों में शुमार रहे, लेकिन कप्तान के तौर पर उनका रिकॉर्ड ज्यादा प्रभावशाली नहीं रहा। सचिन तेंदुलकर ने 1996 से लेकर 2000 तक टीम इंडिया की कप्तानी की थी। सचिन तेंदुलकर ने 98 इंटरनेशनल मैचों में भारत की कप्तानी की थी, जिसमें से टीम इंडिया को 27 मैचों में जीत जबकि 52 मैचों में हार का सामना करना पड़ा। जिसके बाद सचिन ने चीफ सेलेक्टर के पास जाकर कप्तानी से खुद को कप्तानी से हटाने के लिए कहा था। इसका खुलासा टीम इंडिया के चीफ सेलेक्टर रह चुके चंदू बोर्डे ने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में किया है।

पूर्व चीफ सेलेक्टर चंदू बोर्डे के मुताबिक 'सचिन ने खुद आकर कहा था कि उन्हें कप्तानी से हटा दिया जाए। हमने उन्हें कप्तान के तौर पर ऑस्ट्रेलिया भेजा था। जब सचिन लौटकर आए तो वह कप्तानी नहीं करना चाहते थे।' चंदू बोर्डे ने बताया, 'सचिन ने कहा था कि वह अपनी बल्लेबाजी पर फोकस करना चाहते हैं। मैंने उनसे कहा था कि आप कुछ समय के लिए कप्तानी करें क्योंकि हमें नए कप्तान को ढूंढ़ना होगा। चंदू बोर्डे ने कहा, 'मैं सचिन को ही कप्तान बनाए रखना चाहता था, हम भविष्य की ओर देख रहे थे, लेकिन फिर सचिन के बार-बार मना करने पर चयनसमिति ने गांगुली को नया कप्तान नियुक्त किया। दरअसल सचिन का फोकस अपने खेल को निखारने और अच्छा प्रदर्शन करने पर था।

सचिन की कप्तानी में गिरा था टीम इंडिया की जीत का ग्राफ 
सचिन तेंदुलकर की कप्तानी में भारत को 73 वनडे इंटरनेशनल मैचों में से 23 मुकाबलों में जीत मिली थी। जबकि टेस्ट मैचों में टीम इंडिया ने सचिन की कप्तानी में 25 मैचों में से महज 4 मुकाबले ही जीते थे।

ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद कहा था कप्तानी को अलविदा 
1999 में भारत को सचिन तेंदुलकर की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया में खेली गई टेस्ट सीरीज में 0-3 से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया, भारत और पाकिस्तान के बीच खेली गई वनडे ट्राई सीरीज में भी भारत का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था। ऑस्ट्रेलियाई दौरे के बाद भारत को साल 2000 में घरेलू टेस्ट सीरीज में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 0-2 से हार का सामना करना पड़ा। इस निराशाजनक प्रदर्शन के बाद सचिन ने टीम इंडिया की कप्तानी को अलविदा कह दिया था।