नई दिल्ली. कोरोना वायरस के चलते भले ही भारतीय क्रिकेट बोर्ड पर दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग को कैंसिल करने का दबाव बन रहा हो, पर क्रिकेट फैंस दुआ कर रहे हैं कि जल्द ही यह महामारी खत्म हो और उन्हें IPL देखने का मजा मिल सके। इस बीच टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी राहुल द्रविड़ ने इस टूर्नामेंट की सबसे सफल टीम चेन्नई सुपरकिंग्स और हर टूर्नामेंट में अपने फैंस को निराश करने वाली बेंगलुरू की टीम के बीच तुलना की है। उन्होंने बताया कि क्यों अधिकतर सीजन में चेन्नई अच्छा खेल दिखाती है और प्लेऑफ में पहुंचती है, पर बेंगलुरू की टीम स्टार खिलाड़ियों की भरमार होने के बावजूद आज तक ट्रॉफी नहीं जीत पाई है। 

राहुल द्रविड़ ने 'क्रिकेट 2.0 इनसाइड द T20 रेवोल्यूशन' नाम की किताब में यह तुलना की है। इस किताब को टिम विगमोर और फ्रेडी वाइल्ड ने लिखा है। 

इसलिए IPL की सबसे सफल टीम है चेन्नई 
द्रविड़ ने बताया कि चेन्नई सुपरकिंग्स के मालिक IPL में टीम खरीदने से पहले एक क्रिकेट टीम को मैनेज कर रहे थे। यही वजह थी कि जब यह टूर्नामेंट शुरू हुआ तब चेन्नई के पास बाकी टीमों की तुलना में एक फायदा था कि उनके मालिक पहले से ही क्रिकेट टीम को मैनेज करने के बिजनेस से जुड़े हुए थे। हिंस्दुस्तान टाइम्स से बातचीत में उन्होंने बताया कि इसी वजह से चेन्नई ग्राउंड स्टाफ और स्काउटिंग सिस्टम बाकी टीमों से काफी बेहतर था। चेन्नई की बॉलिंग यूनिट भी काफी बेहतर है, जिससे यह टीम छोटे टारगेट भी डिफेंड कर पाती है। चेन्नई के पास धोनी, रैना और ब्रावो जैसे खिलाड़ी हैं, जो लंबे समय से टीम की जीत में योगदान दे रहे हैं। चेन्नई के पास कई बेहतरीन विदेशी खिलाड़ी होते हैं, पर वो कुछ चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों पर ही निर्भर रहते हैं। इसी वजह से यह टीम IPL की सबसे सफल टीम है। 

क्यों हर बार हार जाती हैं बेंगलुरू 
बेंगलुरू की टीम पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि यह टीम ऑक्शन और खिलाड़ियों को चयन को लेकर बाकी टीमों की तुलना में काफी गलतियां करती है। इस फ्रेंचाइजी ने कभी भी अपनी टीम को ठीक से बैलेंस नहीं किया है। उनके पास मिशेल स्टार्क जैसा गेंदबाज था पर उन्होंने एक विस्फोटक बल्लेबाज के लिए उसे टीम से बाहर रखा। टूर्नामेंट के दौरान भी यह टीम सही प्लेइंग इलेवन मैदान पर नहीं उतार पाती है। ऑक्शन के दौरान भी RCB को अक्सर एक अच्छे तेज गेंदबाज की जरूरत होती है, पर वो युवराज जैसे खिलाड़ियों पर 15 करोड़ खर्च कर देते हैं और बाद में उन्हें समझ में आता है कि उन्हें एक बल्लेबाज की बजाय एक अच्छे गेंदबाज की जरूरत थी, पर अब उनका पर्स खाली हो चुका होता है और अच्छा गेंदबाज खरीदने के लिए उनके पास पैसे नहीं होते हैं।