दो दशक पहले इस जिले में आया था विनाशकारी भूकंप, तब से हुआ जबरदस्त हुआ विकास, जानिए किसका है कब्जा

| Nov 27 2022, 04:50 PM IST

दो दशक पहले इस जिले में आया था विनाशकारी भूकंप, तब से हुआ जबरदस्त हुआ विकास, जानिए किसका है कब्जा
दो दशक पहले इस जिले में आया था विनाशकारी भूकंप, तब से हुआ जबरदस्त हुआ विकास, जानिए किसका है कब्जा
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सार

Gujarat Assembly Election 2022: भाजपा ने इस बार गुजरात चुनाव में भुज विधानसभा सीट से निमाबेन आचार्य का टिकट काट कर कद्दावर नेता केशुभाई पटेल को मौका दिया है। वहीं, कांग्रेस, आप और एआईएमआईएम ने भी अपने-अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। 

गांधीनगर। Gujarat Assembly Election 2022:  गुजरात विधानसभा चुनाव के बीच भुज में विनाशकारी भूकंप को आए भले ही करीब दो दशक का वक्त बीत चुका है, मगर तब से यहां अभूतपूर्व औद्योगिक विकास हुआ है। हालांकि, पर्यावरणविदों और शहर के दिग्गजों का मानना है कि ऐसी किसी प्राकृतिक आपदा का सामना करने के लिए आगे भी तैयार रहना चाहिए और पुरानी गलतियों से सबक सीखना चाहिए। भुज विधानसभा क्षेत्र में इस बार पहले चरण में यानी एक दिसंबर को वोटिंग है। 

पहले चरण की वोटिंग प्रक्रिया के लिए गजट नोटिफिकेशन 5 नवंबर को और दूसरे चरण की वोटिंग प्रक्रिया के लिए 10 नवंबर को जारी हुआ था। स्क्रूटनी पहले चरण के लिए 15 नवंबर को हुई, जबकि दूसरे चरण के लिए 18 नवंबर की तारीख तय थी। नाम वापसी की अंतिम तारीख पहले चरण के लिए 17 नवंबर और दूसरे चरण के लिए 21 नवंबर को हुई। गुजरात विधानसभा चुनाव में दोनों चरणों के लिए नामांकन का दौर समाप्त हो चुका है। राज्य में पहले चरण की वोटिंग 1 दिसंबर को होगी, जबकि दूसरे चरण की वोटिंग 5 दिसंबर को होगी। पहले चरण के लिए प्रचार अभियान 29 नवंबर की शाम पांच बजे खत्म होगा। वहीं, मतगणना दोनों चरणों की 8 दिसंबर को होगी। पहले चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया 14 नवंबर अंतिम तारीख थी। दूसरे चरण के लिए नामाकंन प्रक्रिया की अंतिम तारीख 17 नवंबर थी।  

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2001 में आया था भुज और कच्छ में भूकंप 
बता दें कि जनवरी 2001 में भुज और कच्छ जिले में विनाशकारी भूकंप आया था। इस प्राकृतिक आपदा में 20 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई थी। हजारों घर तबाह हुए और लाखों लोग एक झटके में खुले आसमान के नीचे आ गए। यही नहीं, इस भयानक आपदा के बाद तत्कालीन भाजपा सरकार ने यहां एक प्रमुख पुनर्निर्माण और पुनर्वास नीति का ऐलान किया था, जिसके बाद बीते दो दशक में जबरदस्त औद्योगिक विकास हुआ है। 

देश के एक्टिव भूकंपीय क्षेत्र में है भुज 
हालांकि, वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों की मानें तो कच्छ देश के एक्टिव भूकंपीय क्षेत्र में से एक है और इस वजह से प्रशासन को औद्योगिकरण और नगर के विकास में खास सावधानी बरतनी चाहिए। कच्छ यूनिवर्सिटी में अर्थ एंड एन्वायरमेंट साइंस डिपार्टमेंट के चीफ प्रोफेसर एमजी ठक्कर के मुताबिक, कच्छ में कई एक्टिव फॉल्ट लाइन्स हैं। इनमें एक भुज शहर से होकर गुजरती है। कई रिसर्च पेपर्स में इन गड़बड़ियों की ओर इशार भी किया गया है। हालांकि, शहर के विकास के दौरान इनको ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दो दशक का समय बीत चुका है और हमें पहले की गई कई ऐसी गलतियां हैं, जिसे नहीं दोहराना चाहिए और उनसे सबक सीखना चाहिए। 

आपदा प्रबंधन को अलर्ट करने पर जोर 
उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन ज्यादा से ज्यादा मजबूत और एक्टिव बनाना होगा। यह क्विक रिस्पांस वाला होना चाहिए। सरकार को लोगों को भी ट्रेनिंग देना चाहिए कि अगर ऐसी आपदा फिर आए तो क्या करें और क्या नहीं। उन एक्टिव फाल्ट लाइन्स का रिसर्च करने और उनसे हटकर ही विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर घर और संस्थान में भूकंप किट दिया जाना चाहिए। 

विकास करने और शहर को बसाने के लिए कई सावधानियां 
वहीं, कच्छ जिले के कलेक्टर दिलीप राणा ने भरोसा दिलाया है कि सभी औद्योगिक विकास कार्य और शहरों को बसाने में जरूरी प्रोजेक्ट को पूरी सावधानी से क्रियान्वित किया जा रहा है। निर्माण कार्यों में जरूरी उपाय किए जा रहे, सावधानी बरती जा रही है और उचित पैमाने पूरे किए जा रहे हैं। बता दें कि भुज विधानसभा क्षेत्र में 2 लाख 80 हजार वोटर हैं। इनमें सबसे अधिक आबादी अल्पसंख्यकों की है। इनकी आबादी कुल वोटर्स का 15 प्रतिशत है। करीब 60 के दशक से इस सीट पर कांग्रेस का ही कब्जा था, मगर राम मंदिर आंदोलन के बाद भाजपा ने यहां वर्चस्व बढ़ाया और 1990 में कांग्रेस से यह सीट छीन ली थी। हालांकि, 2002 के गोधरा दंगे के बाद अल्पसंख्यक बाहुल्य यह सीट भाजपा हार गई, मगर अगले ही विधानसभा चुनाव यानी 2007 के चुनाव में इस सीट पर फिर से कब्जा जमा लिया था और तब से यह भाजपा का गढ़ बना हुआ है। 

भाजपा ने मौजूदा विधायक का टिकट काट दिया 
भाजपा ने इस बार यहां से मौजूदा विधायक और विधानसभा अध्यक्ष निमाबेन आचार्य को टिकट नहीं दिया है। वे दो बार यहां से विधायक रही हैं। भाजपा ने इस बार अपने कद्दावर नेता केशुभाई पटेल को मैदान में उतारा है। हालांकि, निमाबेन को टिकट नहीं देने से कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता नाराज भी हैं और माना जा रहा है कि इसका कुछ असर वोटिंग पर पड़ सकता है। बता दें कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को यहां से 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले थे। 

कांग्रेस सत्ता विरोधी लहर की उम्मीद में चल रही 
वहीं, कांग्रेस इस बार रैली और शोर-शराब से दूर चुपचाप प्रचार कर रही है। पार्टी का मानना है कि 27 साल से सत्ता पर काबिज भाजपा के कामकाज से लोग खुश नहीं हैं और इसका फायदा सत्ता विरोधी लहर के तौर पर उसे देखने को मिलेगा। कांग्रेस ने यहां से अर्जुन भूडिया को टिकट दिया है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस दूसरे स्थान पर थी और उसे 42 प्रतिशत वोट मिले थे। इसके अलावा आम आदमी पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन यानी एआईएमआईएम ने भी उम्मीदवार उतारा है। आप ने जहां राजेश पिंडोरा को टिकट दिया है वहीं, एआईएमआईएम ने शकील समा को मैदान में उतारा है। 

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