बेटी की विदाई का जिक्र हो और मोहम्मद रफी की आवाज में गाया यह गीत याद न आए, ऐसा कम ही होता है। फिल्म ‘नील कमल’ का यह गाना विदाई के मौके पर आज भी खूब बजाया जाता है और इसे सुनकर लोगों की आंखें नम हो जाती हैं। आइए जानते हैं उस सदाबहार गीत के बारे में, जिसे आपने भी जरूर सुना होगा।
शादी में बेटी की विदाई का पल आते ही माहौल गमगीन हो जाता है। बेटी बाबुल का आंगन छोड़ कर जा रही होती है। मोहम्मद रफी की दर्दभरी आवाज जरूर गूंजती है। जिसे सुनकर लोगों के आंखों में आंसू निकल आते हैं। खास बात यह है कि यह गीत करीब 58 साल पुराना है, लेकिन इसका भाव आज भी उतना ही ताजा लगता है। उस गाने के बोल को क्या आप गेस कर लिए, नहीं...तो बताते हैं हम बात किसी सॉन्ग की कर रहे हैं।
1968 में आई थी फिल्म ‘नील कमल’
1968 में फिल्म ‘नील कमल’ (Neel Kamal) आई थी। उसमें एक गाना था, ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ जो कल्ट सॉन्ग बन गया है। बेटी की विदाई में यह गाना जरूर बजता है। आवाज सुनकर लोग और भावुक हो जाते हैं। ‘नील कमल’ फिल्म का निर्देशन राम महेश्वरी ने किया था। इसमें वहीदा रहमान, राज कुमार, मनोज कुमार और बलराज साहनी जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आए थे।
किसने गाया था ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’?
इस सदाबहार गीत को मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज दी थी। इसके बोल मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी ने लिखे थे, जबकि संगीत रवि ने तैयार किया था। इन तीनों की जुगलबंदी ने गीत को ऐसा भाव दिया कि यह सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं रहा, बल्कि बेटी की विदाई से जुड़ी भावनाओं की पहचान बन गया।

गाते हुए भावुक हो गए थे मोहम्मद रफी
इस गाने से जुड़ा एक बेहद भावुक किस्सा भी बताया जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाने की रिकॉर्डिंग के समय मोहम्मद रफी अपनी बेटी की शादी को लेकर भावुक थे। इसी वजह से गाते समय उनकी आवाज में भी उस दर्द की झलक सुनाई दी। एक रिपोर्ट में रफी के हवाले से बताया गया है कि गीत रिकॉर्ड करते समय उन्हें अपनी बेटी की शादी का दृश्य याद आ रहा था। यही कारण है कि गाने को सुनते हुए उनकी आवाज में जो भाव महसूस होता है, वह बनावटी नहीं लगता।
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