Soni Razdan statement on Education Minister: NEET पेपर लीक पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। अब अभिनेत्री सोनी राजदान ने धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में हुए कुछ सुधारों की सराहना भी की।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक मामले को लेकर लंबे समय से छात्रों का प्रदर्शन जारी था। इस आंदोलन के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग लगातार उठती रही। आखिरकार 25 जुलाई को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसी घटनाक्रम के बीच अभिनेत्री आलिया भट्ट की मां और वरिष्ठ अभिनेत्री सोनी राजदान की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बन गई, जिसमें उन्होंने छात्रों की पीड़ा को गंभीर बताया, लेकिन साथ ही शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में हुए कुछ महत्वपूर्ण सुधारों का भी उल्लेख किया।

छात्रों की मेहनत को बताया सबसे बड़ी चिंता

सोनी राजदान ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले युवाओं को देखकर उन्हें गहरा दुख हुआ। उनके मुताबिक, ये छात्र किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे थे, बल्कि सिर्फ निष्पक्षता और न्याय चाहते थे। उन्होंने कहा कि कॉम्पटीटिव एग्जाम की तैयारी में छात्र कई महीनों ही नहीं, बल्कि कई वर्षों की मेहनत लगाते हैं। ऐसे में जब परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं तो सिर्फ एक परीक्षा प्रभावित नहीं होती, बल्कि लाखों युवाओं का आत्मविश्वास भी टूटता है।

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सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ परीक्षा कराने तक सीमित नहीं

अपने बयान में सोनी राजदान ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार का दायित्व केवल परीक्षा आयोजित करना नहीं, बल्कि उस पूरी प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बनाए रखना भी होता है। यदि छात्र व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं तो उनकी बातों को गंभीरता से सुनना और उनका समाधान निकालना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं की नाराजगी को केवल विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे व्यवस्था में सुधार का अवसर समझना चाहिए।

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धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल के कई फैसलों की भी की सराहना

हालांकि सोनी राजदान ने छात्रों के पक्ष में अपनी बात रखी, लेकिन उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में किए गए कई सुधारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP), कौशल विकास (Vocational Education), बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने की पहल, शिक्षा के डिजिटलीकरण और उच्च शिक्षा में सुधार जैसे कई कदम महत्वपूर्ण रहे हैं। उनका मानना है कि किसी भी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति के काम का मूल्यांकन संतुलित नजरिए से होना चाहिए। जहां कमियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए, वहीं सकारात्मक कार्यों को भी स्वीकार करना आवश्यक है।

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जवाबदेही और सुधार साथ-साथ चलने चाहिए

सोनी राजदान ने अपने विचारों में यह भी स्पष्ट किया कि जवाबदेही तय करना लोकतंत्र का अहम हिस्सा है। यदि किसी व्यवस्था में लगातार समस्याएं सामने आती हैं तो केवल छात्रों से अपेक्षाएं रखना उचित नहीं है। संस्थानों और उन्हें संचालित करने वाले अधिकारियों को भी अपनी जिम्मेदारियां स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर छात्र ऐसी परीक्षा प्रणाली का हकदार है, जिस पर वह पूरी तरह भरोसा कर सके और जहां उसकी मेहनत का सही मूल्यांकन हो।

सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस

सोनी राजदान के इस संतुलित बयान पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने छात्रों के समर्थन में उनकी आवाज की सराहना की, जबकि कई यूजर्स ने शिक्षा मंत्री के काम का उल्लेख करने को सकारात्मक और संतुलित दृष्टिकोण बताया। वहीं कुछ लोगों का मानना था कि परीक्षा प्रणाली में हुई गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय होना सबसे जरूरी है। पूरे घटनाक्रम के बीच यह स्पष्ट है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों का भरोसा बनाए रखना किसी भी सरकार और संस्थान की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।