Amitabh Bachchan First Fees: आज अमिताभ बच्चन का स्टारडम किसी पहचान का मोहताज नहीं, लेकिन उनकी पहली फिल्म की डील ऐसी थी, जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। कैसे शुरू हुआ था सफर?
आज अमिताभ बच्चन का नाम आते ही हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों की तस्वीर सामने आती है। दशकों के करियर, बेमिसाल लोकप्रियता और यादगार फिल्मों के बीच उनकी शुरुआत का एक किस्सा ऐसा है, जो आपको चौंका सकता है। पहली फिल्म पाने से पहले उन्हें भी रिजेक्शन झेलने पड़े थे। कहीं उनकी लंबाई पर सवाल उठे, तो कहीं उनके लुक को लेकर संदेह जताया गया। फिर एक फिल्मकार ने बिना स्क्रीन टेस्ट के उन्हें मौका दे दिया। लेकिन इस पहली फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन के साथ जो डील हुई थी, उसकी रकम जानकर आज के दौर में यकीन करना मुश्किल हो सकता है।
अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ के लिए कितनी थी फीस?
आज अमिताभ बच्चन भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते हैं, लेकिन उनके फिल्मी सफर की पहली डील बेहद मामूली रकम की थी। ‘सात हिंदुस्तानी’ में काम करने के लिए उन्हें 5,000 रुपए मिले थे। उस वक्त यह फिल्म उनके लिए सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि बड़े पर्दे पर अपनी पहचान बनाने का पहला मौका थी। फिल्मकार के. ए. अब्बास ने अपनी किताब में अमिताभ से पहली मुलाकात का जिक्र किया है। उनके मुताबिक, फिल्म के आर्थिक पक्ष को लेकर कोई भ्रम नहीं रखा गया था। फिल्म में सात प्रमुख किरदार थे और किसी भी कलाकार को 5,000 रुपए से ज्यादा देने की गुंजाइश नहीं थी। अमिताभ ने यह शर्त स्वीकार कर ली।
अमिताभ बच्चन को ‘सात हिंदुस्तानी’ कैसे मिली थी?
‘सात हिंदुस्तानी’ मिलने से पहले अमिताभ बच्चन को कई जगह निराशा का सामना करना पड़ा था। उन्होंने अब्बास को बताया था कि दूसरे निर्माता उनके स्क्रीन टेस्ट ले चुके थे, लेकिन उनकी लंबाई और लुक को लेकर सवाल उठाए गए थे। ऐसे माहौल में के. ए. अब्बास का रवैया अलग था। उन्होंने अमिताभ को स्क्रीन टेस्ट देने के लिए मजबूर नहीं किया और सीधे फिल्म में किरदार की पेशकश कर दी। अमिताभ के लिए यह मौका इसलिए भी खास था, क्योंकि लगातार रिजेक्शन के बाद किसी ने उन्हें अभिनेता के रूप में स्वीकार किया था।
पहली फीस से अमिताभ बच्चन ने क्या कुछ किया था?
अमिताभ ने एक टीवी कार्यक्रम में अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया था कि पहली फिल्म मिलने के बाद उनके मन में यह विचार था कि जो कमाई होगी, वह अपने माता-पिता को देंगे और उन्हें अपने पास बुलाएंगे। यह बात उस समय की उनकी वास्तविक स्थिति को समझने में मदद करती है। फिल्म मिलने से पहले अमिताभ कोलकाता में नौकरी कर चुके थे। वहां उनकी मासिक आय 1,640 रुपए थी। उन्होंने बाद में बताया कि वह आठ लोगों के साथ 10×10 के कमरे में रहते थे। यह वह दौर था जब फिल्मी दुनिया में उनकी कोई स्थायी पहचान नहीं थी।
अमिताभ बच्चन ने ‘सात हिंदुस्तानी’ कब साइन की थी?
अमिताभ बच्चन ने 15 फरवरी 1969 को ‘सात हिंदुस्तानी’ साइन की थी। इस तारीख को उन्होंने बाद में भी अपने फिल्मी सफर की शुरुआत के तौर पर याद किया। आज जब उनके लंबे करियर और स्टारडम की चर्चा होती है, तो यह तारीख उनके शुरुआती संघर्षों की याद दिलाती है।
‘सात हिंदुस्तानी’ की शूटिंग कैसी होती थी?
‘सात हिंदुस्तानी’ की शूटिंग का तरीका आज की बड़े बजट वाली फिल्मों से काफी अलग था। उपलब्ध फिल्मी ट्रिविया के मुताबिक, आउटडोर शूट के दौरान कलाकार और क्रू साधारण तरीके से यात्रा करते थे और अपने बिस्तर तक साथ लेकर चलते थे। यह किस्सा उस दौर के सीमित साधनों की झलक देता है। आज जहां फिल्मों के सेट, कलाकारों की सुविधाएं और प्रोडक्शन बजट अक्सर सुर्खियों में रहते हैं, वहीं अमिताभ के शुरुआती दिनों की यह तस्वीर बताती है कि उनका सफर कितने साधारण माहौल से शुरू हुआ था।
अमिताभ बच्चन के लिए 5,000 रुपए क्यों थे खास?
अमिताभ बच्चन के लिए 5,000 रुपए की फीस का महत्व सिर्फ आर्थिक नहीं था। यह उनके करियर की पहली बड़ी निशानी थी और इस बात का संकेत भी कि उन्हें आखिरकार बड़े पर्दे पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल गया था। हालांकि, पहली फिल्म मिलने के बाद भी सुपरस्टार बनने का रास्ता तुरंत आसान नहीं हुआ। उन्हें अपनी जगह बनाने और दर्शकों के बीच पहचान हासिल करने में वक्त लगा। लेकिन उनकी पहली डील उस सफर की शुरुआत थी, जिसने आगे चलकर उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित नामों में शामिल कर दिया।
अमिताभ बच्चन के 84वें जन्मदिन पर ‘सात हिंदुस्तानी’ का यह किस्सा याद दिलाता है कि बड़े सितारों की कहानियां भी कभी छोटे-से मौके से शुरू होती हैं। आज उनकी पहचान और मुकाम जितना बड़ा है, उस सफर का पहला कदम उतनी ही सादगी से उठा था।
