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90's में गैंगस्टर्स से क्यों थर्राता था बॉलीवुड, गुलशन कुमार से राकेश रोशन..इन 8 पर हुए जानलेवा हमले
टाइगर श्रॉफ पर हमले ने उस दौर की यादें ताजा कर दी हैं, जब मुंबई में अंडरवर्ल्ड का दबदबा था और बॉलीवुड से जुड़े लोगों को लगातार धमकियों और हमलों का सामना करना पड़ता था। 90 के दशक आखिर और 2000 की शुरुआत में ऐसे कई हमले हुए जिनसे इंडस्ट्री दहल गई।

अंडरवर्ल्ड ने किन सेलेब्स को बनाया निशाना
रविवार को 18 अक्टूबर को टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले ने एक बार फिर 90 के उस दौर की यादें ताजा कर दीं, जब बॉलीवुड पर अंडरवर्ल्ड हावी था। उस समय फिल्म निर्माता लगातार खतरे के साये में जीते थे, क्योंकि उन्हें जबरन वसूली या निजी दुश्मनी के कारण निशाना बनाया जाता था। जानते हैं, 90 के आखिर और 2000 की शुरुआत में किन-किन को अंडरवर्ल्ड ने बनाया निशाना।

मुकेश दुग्गल की हत्या (1997)
1997 में फिल्म निर्माता मुकेश दुग्गल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि यह हत्या एक गिरोह से जुड़े विवाद के कारण हुई थी। विवाद उनकी फिल्मों की फाइनेंसिंग यानी फिल्मों में लगाए जाने वाले पैसे को लेकर था। इस घटना ने फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
गुलशन कुमार की दिनदहाड़े हत्या (1997)
1997 में टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार की मुंबई के वर्सोवा इलाके में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में अबू सलेम के गिरोह की भूमिका होने के आरोप लगे थे। बताया गया था कि यह हत्या उसके प्रतिद्वंद्वियों के कहने पर कराई गई थी। गुलशन कुमार की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था और बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड के प्रभाव को लेकर चिंता और बढ़ गई थी।
राजीव राय पर जानलेवा हमला (1997)
इसी साल फिल्म निर्माता राजीव राय पर भी हमला हुआ। छोटा शकील से जुड़े शूटरों ने मुंबई के तारदेव इलाके में उनके कार्यालय के बाहर उन्हें निशाना बनाया था। हमले के समय राजीव राय के साथ मौजूद एक पुलिस कांस्टेबल ने जवाबी फायरिंग की, जिससे फिल्म निर्माता की जान बच गई।
राकेश रोशन पर हमला (2000)
साल 2000 में फिल्म 'कहो ना... प्यार है' की रिलीज के कुछ सप्ताह बाद फिल्म निर्माता राकेश रोशन पर हमला किया गया। छोटा शकील से जुड़े शूटरों ने मुंबई के सांताक्रूज इलाके में उनके ऑफिस के बाहर उन्हें निशाना बनाया था। राकेश रोशन को समय पर इलाज मिलने के कारण उनकी जान बच गई।
अजीत दीवानी की हत्या (2001)
2001 में अभिनेत्री मनीषा कोइराला के सेक्रेटरी अजीत दीवानी की हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि अबू सलेम के गिरोह ने उनकी हत्या इसलिए कराई, क्योंकि उन्होंने जबरन वसूली की मांग मानने से इनकार कर दिया था। यह घटना इस बात का एक और उदाहरण बनी कि अंडरवर्ल्ड की मांगों का विरोध करने पर फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को किस तरह निशाना बनाया जाता था।
लॉरेंस डिसूजा पर हमला (2002)
2002 में फिल्म निर्माता लॉरेंस डिसूजा पर भी हमला हुआ था। बताया जाता है कि गैंगस्टर एजाज लकड़ावाला ने इस हमले को अंजाम दिलवाया था। हालांकि, लॉरेंस डिसूजा इस हमले में बाल-बाल बच गए।
आमिर खान और आशुतोष गोवारिकर के अपहरण की कोशिश
उस दौर में कुछ ऐसी साजिशें भी रची गईं, जिन्हें समय रहते नाकाम कर दिया गया। इनमें फिल्म 'लगान' की सफलता के बाद अभिनेता आमिर खान और फिल्म निर्माता आशुतोष गोवारिकर के अपहरण की कोशिश भी शामिल थी। इन घटनाओं से साफ था कि उस समय अंडरवर्ल्ड का प्रभाव केवल जबरन वसूली तक सीमित नहीं था, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के बड़े नामों को निशाना बनाने की साजिशें भी रची जा रही थीं।
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