आतंकी हमलों और राजनीतिक साजिशों से भरी 'मैच फिक्सिंग' की कहानी आपको चौंका देगी। लेफ्टिनेंट कर्नल की देशभक्ति और सच्चाई की लड़ाई देखने लायक है। विनीत कुमार सिंह की दमदार एक्टिंग फिल्म को और भी खास बनाती है।

एंटरटेनमेंट डेस्क. अगर आप पॉलिटिकल और थ्रिलर फिल्मों के शौकीन हैं, तो फिल्म 'मैच फिक्सिंग' आपको जरूर पसंद आएगी। केदार गायकवाड़ के निर्देशन में बनी यह फिल्म कर्नल कंवर खताणा की किताब 'द गेम बिहाइंड सैफरन टेरर' पर बेस्ड है। यह 2004 से 2008 के बीच हुए आतंकी हमलों की कहानी दिखाती को है। साथ ही इसमें यह भी दिखाया जाता है कि कैसे उस समय सरकार ने वोट पाने के लिए देश में हिंदू आतंकवाद का नैरेटिव लोगों के दिमाग में भरा था। ऐसे में डालते हैं फिल्म के रिव्यू पर नजर..

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क्या है फिल्म 'मैच फिक्सिंग' की कहानी?

फिल्म 'मैच फिक्सिंग' की शुरुआत में दिखाया जाता है कि कैबिनेट मंत्री पाकिस्तानी सरकार से सांठगांठ करते हैं और मालेगांव बम ब्लास्ट में लेफ्टिनेंट कर्नल अविनाश पटवर्धन (विनीत कुमार सिंह) को फंसा देते हैं। ऐसे में अविनाश अपने आपको निर्दोष साबित करने में लगे रहते हैं। इसकी के साथ फिल्म में यह भी दिखाया जाता है कि कर्नल अविनाश को 26/11 हादसे की जानकारी पहले ही पता चल गई थी, लेकिन उसकी किसी ने न सुनी। यहां तक कि उसकी फाइल रद्दी में डाल दी जाती है। ऐसे में अविनाश आगे क्या करता है यह देखने के लिए आपको इस फिल्म को सिनेमाघरों में देखना होगा।

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विनीत कुमार सिंह ने जीता लोगों का दिल

फिल्म 'मैच फिक्सिंग' में कहीं-कहीं राजनीतिक एंगल जबरदस्ती का लगता है, लेकिन तब भी इसकी कहानी दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब रहती है। वहीं इसकी स्टारकास्ट की एक्टिंग की बात करें तो विनीत कुमार सिंह ने लेफ्टिनेंट कर्नल अविनाश के रूप में लोगों का दिल जीत लिया है। इसी के साथ अनुजा साठे, मनोज जोशी, और राज अर्जुन जैसे कलाकारों ने भी दमदार एक्टिंग की है। ऐसे में हम 2 घंटे 30 मिनट की फिल्म 'मैच फिक्सिंग' को चार स्टार देते हैं। 

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