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Don't Be Shy Review: आलिया भट्ट की फिल्म देखने से पहले जानें 5 वजह, क्यों देखें और क्यों छोड़ें?
Don't Be Shy Review: आलिया भट्ट की प्रोड्यूस की फिल्म में कॉलेज रोमांस, दोस्ती और फ्रेश स्टारकास्ट है। लेकिन रिलीज से पहले जान लें 5 वजह, जो इसे देखने लायक बनाती हैं और कुछ वजहें क्यों कर सकते हैं, स्किप।

कॉलेज लाइफ, पहला प्यार, दोस्ती और भविष्य को लेकर बड़े-बड़े सपने... ‘डोंट बी शाय' (Don't Be Shy) की कहानी इन सभी चीजों को एक साथ लेकर चलती है। आलिया भट्ट और शाहीन भट्ट के प्रोडक्शन में बनी यह फिल्म 25 सितंबर को प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई है। फिल्म में चार नए कलाकार लीड रोल में हैं और कहानी 20 साल की श्यामिली यानी ‘शाय’ के इर्द-गिर्द घूमती है।

फिल्म की कहानी
‘डोंट बी शाय' की कहानी 21 साल की श्यामिली दास यानी शाय (आरुशी बजाज) की है, जिसने अपनी जिंदगी का पूरा खाका पहले से तैयार कर रखा है। उसका सपना है कि वह एक सफल करियर बनाए, अच्छी जिंदगी जिए और उसका अमीर बॉयफ्रेंड मयंक (पीयूष खट्टी) उसके इस प्लान का अहम हिस्सा है। लेकिन शाय की बनाई हुई परफेक्ट जिंदगी तब बिखरने लगती है, जब मयंक उससे ब्रेकअप कर लेता है। इसके बाद शाय बदला लेने के इरादे से आगे बढ़ती है, लेकिन कहानी तब दिलचस्प हो जाती है जब उसकी मुलाकात मयंक की नई गर्लफ्रेंड तारा से होती है। शाय की जिंदगी में आगे दोस्ती, प्यार, ब्रेकअप और खुद को समझने का दौर आता है। उसने अपने बारे में और अपनी जिंदगी को लेकर जो छवि बना रखी है, धीरे-धीरे उसकी सच्चाई सामने आती है। आखिरकार उसे यह तय करना पड़ता है कि वह दूसरों के सामने परफेक्ट दिखने की कोशिश जारी रखे या खुद को जैसी है, वैसा स्वीकार करे।
क्यों देखें ‘Don't Be Shy’?
फ्रेश चेहरे देखने को मिलेंगे
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी नई स्टारकास्ट है। आरुशी बजाज, अंश दुग्गल, बियांका अरोड़ा और पीयूष खट्टी लीड भूमिकाओं में हैं। नए कलाकारों की एनर्जी फिल्म को कॉलेज और यंग एडल्ट वाली फील देती है।
दोस्ती और प्यार की हल्की-फुल्की कहानी
अगर आपको कॉलेज लाइफ, दोस्ती, पहला प्यार और रिश्तों में आने वाले उतार-चढ़ाव वाली फिल्में पसंद हैं, तो इसका विषय आपको आसानी से कनेक्ट कर सकता है।
फिल्म का लुक काफी यूथफुल है
फिल्म में चमकीले विजुअल्स, कॉलेज फेस्ट, सोशल मीडिया वाली भाषा और पॉप-कल्चर रेफरेंस का इस्तेमाल किया गया है। इसकी पूरी प्रस्तुति युवा दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
संगीत कहानी को हल्का रखता है
राम संपत का संगीत फिल्म के माहौल को बनाए रखने में मदद करता है। गाने कहानी के रोमांटिक और कॉलेज वाले हिस्से को सपोर्ट करते हैं।
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क्यों न देखें ‘Don't Be Shy’?
कहानी कई जगह पहले से पता चलती है
फिल्म की सबसे बड़ी परेशानी इसकी कहानी का अनुमानित होना है। कुछ घटनाएं आगे क्या होने वाला है, इसका अंदाजा पहले ही दे देती हैं।
गहराई की कमी महसूस होती है
फिल्म महत्वाकांक्षा, दोस्ती, प्यार, असुरक्षा और बड़े होने जैसे कई मुद्दों को छूती है, लेकिन हर विषय पर ज्यादा देर नहीं ठहरती। इसी वजह से कुछ इमोशनल हिस्से उतना असर नहीं छोड़ पाते।
करीब ढाई घंटे की लंबाई
फिल्म की लंबाई कुछ दर्शकों के लिए परेशानी बन सकती है। खासकर तब, जब कहानी के कुछ हिस्से पहले से अनुमानित लगने लगें। एक रिव्यू में भी लंबी अवधि को फिल्म की गति पर असर डालने वाली बात बताया गया है।
जरूरत से ज्यादा 'कूल' बनने की कोशिश
फिल्म युवा दर्शकों की भाषा और पॉप-कल्चर को पकड़ने की कोशिश करती है, लेकिन कुछ जगहों पर यह कोशिश थोड़ी बनावटी महसूस हो सकती है।
इमोशनल असर सीमित रह जाता है
फिल्म का विषय ऐसा है, जिसमें दोस्ती, प्यार, असफलता और खुद को तलाशने जैसे भावनात्मक पहलू हैं। लेकिन कहानी इन भावनाओं को ज्यादा गहराई से एक्सप्लोर नहीं कर पाती।
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