कन्नड़ अभिनेता दिलीप राज का निधन। 'हिटलर कल्याणा' के जेके के रूप में लोकप्रिय, वे एक बहुमुखी अभिनेता, निर्देशक और निर्माता थे। उनके निधन से इंडस्ट्री में शोक है।
‘अरे उठो... देखो, कहानी वाले आए हैं। स्टोरी डिस्कस करनी थी न तुम्हें, देखो वो लोग आए हैं...’

पत्नी श्रीविद्या, सोए हुए पति दिलीप का कंधा पकड़कर उन्हें ऐसे हिला रही थीं, मानो वो अभी उठेंगे, हाथ मिलाएंगे और कहानीकारों से बात करने लगेंगे।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। हमेशा नई कहानियों की तलाश में रहने वाले दिलीप, तब तक एक नई कहानी की खोज में उस दुनिया की ओर निकल चुके थे, जहां से कोई वापस नहीं आता।
दिलीप राज ने अपनी आखिरी फिल्म ‘लव मॉकटेल 3’ में एक वकील का किरदार निभाया था, जो एक मां की तरफ से केस लड़ता है और हार जाता है। उस किरदार में उन्होंने बड़ी संजीदगी से जान फूंकी थी और दर्शकों का दिल जीत लिया था। आज वही वकील, मौत के सामने अपनी जिंदगी का केस हार गया। लेकिन एक इंसान के तौर पर वो कितने सफल थे, इसका सबूत उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ दे रही थी।
दिलीप के व्यक्तित्व को याद करते हुए सीनियर डायरेक्टर टी.एन. सीताराम कहते हैं, ‘उसके पास चार जन्मों के बराबर एनर्जी थी। हर मिनट कुछ नया करता रहता था। मेरे सीरियल 'मलेबिल्लु' में उसने मुख्य भूमिका निभाई थी। कितनी भी टेंशन हो, वो हमेशा मुस्कुराता रहता था। जहां वो होता था, वहां हंसी की कोई कमी नहीं होती थी। लेकिन आज वो ऐसे सोया है कि फिर कभी नहीं हंसेगा।’
गोल्डन स्टार गणेश ने कहा, ‘दिलीप एक शानदार इंसान और बेहतरीन परफॉर्मर थे। साल 2000 में हम सब कॉलेज खत्म करके एक साथ एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में आए थे। हमारा एक छोटा सा ग्रुप था। दिलीप को सबसे पहले सीरियल में रोल मिला। हम सब बहुत खुश हुए थे। फिर धीरे-धीरे सब आगे बढ़ते गए। पंद्रह दिन पहले ही मेरी उनसे बात हुई थी। अब ये खबर आ गई। मैं अभी भी इस सदमे से उबर नहीं पा रहा हूं।’
कभी हिम्मत नहीं हारी दिलीप राज ने
साल 2005 में जब दिलीप राज ने ‘बॉयफ्रेंड’ फिल्म से सैंडलवुड में कदम रखा, तो उनकी आंखों में हीरो बनकर चमकने का सपना था। लेकिन इंडस्ट्री ने उनके साथ लुका-छिपी का खेल ज्यादा खेला। दिलीप ने हिम्मत नहीं हारी और सीरियल्स में काम करना जारी रखा। इसी बीच उन्हें पुनीत राजकुमार की फिल्म ‘मिलन’ में विलेन का रोल मिला। उस किरदार ने इंडस्ट्री को दिलीप की एक्टिंग का दम दिखा दिया। इसके बाद कुछ फिल्में तो मिलीं, लेकिन उनकी प्रतिभा के साथ पूरा न्याय नहीं हो पाया। हालांकि, उन्होंने ‘ऑर्केस्ट्रा मैसूर’ और ‘निम्म वरुवुगलिगे नीवे जवाब्दरारु’ जैसी फिल्मों में बेहतरीन काम किया।
जब फिल्मों में सही मौके नहीं मिले, तो टीवी इंडस्ट्री ने उन्हें थाम लिया। ‘मलेबिल्लु’ के आदित्य, ‘प्रीति इल्लद मेले’ के किशोर, ‘पुरुषोत्तम’ के पुरुषोत्तम और आखिर में ‘हिटलर कल्याणा’ के जेके के किरदार में लोगों ने उन्हें सिर आंखों पर बिठाया।
2021 से 2024 तक चले सीरियल ‘हिटलर कल्याणा’ के बाद तो लोग उन्हें जेके के नाम से ही पहचानने लगे थे।
इस सीरियल में उनकी मां का किरदार निभाने वालीं विद्यामूर्ति ने रोते हुए कहा, ‘हिटलर कल्याणा के बाद सब मुझे जेके की मां कहकर ही बुलाते थे। अब जेके ही स्क्रीन से चला गया।’
मौत की खबर से सन्न हूं
इसी सीरियल की हीरोइन रहीं मलाइका वासुपाल, जो अब फिल्मों में काम कर रही हैं, ने कहा, ‘सर, आपके डायरेक्शन में बने सीरियल से ही मैंने इंडस्ट्री में कदम रखा था। आपकी मौत की खबर ने मुझे सन्न कर दिया है।’
दिलीप एक बेहतरीन डबिंग आर्टिस्ट भी थे। डायरेक्टर के.एम. चैतन्य ने लिखा, ‘2005 में मैंने ‘किच्चू’ सीरियल बनाया था, जिसमें दिलीप ने मुख्य भूमिका निभाई थी। मेरी फिल्म ‘आ दिनगलु’ में एक्टर चेतन के किरदार के लिए दिलीप ने अपनी आवाज दी थी। उनकी प्रतिभा को और भी मौके मिलने चाहिए थे।’
यह सच है कि ‘आ दिनगलु’ और ‘मैना’ जैसी फिल्मों में दिलीप ने एक्टर चेतन के लिए इतनी शानदार डबिंग की थी कि ज्यादातर लोग उसे चेतन की ही असली आवाज समझते थे। इसके अलावा, दिलीप ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर ‘कृष्ण रुक्कु’ और ‘ब्रह्मगंटु’ जैसे हिट सीरियल्स का निर्माण भी किया। इन सबके बीच, एक दीपक बुझ गया है, लेकिन उसकी रोशनी हमेशा चमकती रहेगी।
- ऋषभ शेट्टी
दिलीप एक अच्छे एक्टर, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और सबसे बढ़कर एक अच्छे इंसान थे। मुलाकातें भले ही गिनी-चुनी हों, लेकिन उनका व्यक्तित्व दिल में बस गया था, जो कभी नहीं मिटेगा।
- शिव राजकुमार
दिलीप राज का जाना मन को बहुत दुख दे गया। वो जिस तरह से प्रोग्राम होस्ट करते थे, उनकी भाषा पर पकड़ और बोलने का अंदाज सुनने में बहुत अच्छा लगता था।
