Kavita Devi Wrestler: दक्षिण एशिया की स्वर्ण पदक विजेता पहलवान कविता देवी ने 'तुम हो ना – घर की सुपरस्टार' में बताया कि कैसे उन्होंने ओलंपिक के सपने से पहले मातृत्व को चुना। जानिए उनके संघर्ष, परिवार के सहयोग और खेल में वापसी की प्रेरक कहानी।
Tum Ho Naa Ghar Ki Superstar: दक्षिण एशिया की स्वर्ण पदक विजेता पहलवान और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित कविता देवी ने अपने जीवन के सबसे कठिन फैसलों में से एक का खुलकर जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि ओलंपिक मेडल का सपना उनके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य था, लेकिन जब बात उनके बच्चे की आई तो उन्होंने खेल से ब्रेक लेकर मातृत्व को प्राथमिकता दी। टीवी शो 'तुम हो ना – घर की सुपरस्टार' में होस्ट राजीव खंडेलवाल से बातचीत के दौरान कविता ने अपने संघर्ष, परिवार के सहयोग और दोबारा खेल में वापसी की प्रेरक कहानी साझा की।
22 साल की उम्र में शुरू किया कुश्ती का सफर
कविता देवी ने बताया कि वह हरियाणा के ऐसे माहौल में पली-बढ़ीं, जहां महिलाओं को खुलकर अपने सपने पूरे करने की आजादी नहीं मिलती थी। उन्होंने कहा कि बचपन में कभी नहीं सोचा था कि एक दिन भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।
उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने 22 साल की उम्र में कुश्ती शुरू की। उनके मुताबिक अगर सही मार्गदर्शन पहले मिल जाता तो शायद वह और जल्दी सफलता हासिल कर सकती थीं। उन्होंने कहा कि उम्र से ज्यादा जरूरी हिम्मत और कोशिश होती है, इसलिए मौका मिलता तो वह किसी भी उम्र में अपने सपनों के लिए संघर्ष करतीं।
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माता-पिता के संघर्ष और पति के साथ ने बदली जिंदगी
कविता ने अपने किसान माता-पिता के संघर्ष को याद करते हुए भावुक होकर कहा कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी उनकी डाइट या ट्रेनिंग में कमी नहीं आने दी। उन्होंने कहा कि माता-पिता का त्याग ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
बातचीत के दौरान कविता ने महिलाओं के लिए भी खास संदेश दिया। उन्होंने कहा कि महिलाएं कमजोर नहीं होतीं, उन्हें केवल एक अवसर, सही मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग की जरूरत होती है। यही भरोसा उन्हें हर मुश्किल के बाद दोबारा खड़ा होने की ताकत देता रहा।
'ममता जीत गई, लेकिन सपना छोड़ा नहीं'
राजीव खंडेलवाल ने जब उनसे मां बनने के बाद खेल से दूरी बनाने पर सवाल किया तो कविता ने भावुक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जिस सपने के लिए उन्होंने समाज और परिस्थितियों से लड़ाई लड़ी थी, उसी सफर में जब उनके बच्चे की बात आई तो उन्होंने मातृत्व को प्राथमिकता दी।
हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि उनके पति ने उनकी खामोशी को समझा और दोबारा अभ्यास शुरू करने के लिए प्रेरित किया। उन्हीं की मदद से उनकी मुलाकात द ग्रेट खली से हुई, जिसके बाद उन्होंने फिर से अपने खेल करियर की शुरुआत की। कविता देवी की यह कहानी बताती है कि सपनों की राह कभी आसान नहीं होती, लेकिन परिवार का साथ, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प किसी भी चुनौती को पार करने की ताकत दे सकते हैं।
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