Mallika Dua Vegetarian Hospital Questions: 17 सितंबर को मल्लिका दुआ ने अस्पताल की वेजिटेरियन फूड पॉलिसी पर सवाल उठाया। इससे सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है।
एक्ट्रेस और कॉमेडियन मल्लिका दुआ इन दिनों अस्पताल में हैं और उन्होंने अस्पताल में मिलने वाले खाने को लेकर एक ऐसा सवाल उठाया है, जिस पर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है। मल्लिका ने अस्पताल के खाने की पॉलिसी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर कोई अस्पताल पूरी तरह वेजिटेरियन कैसे हो सकता है? उन्होंने अपने पुराने अनुभव को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने हिंदुजा अस्पताल में पाया सूप मांगा था, तो उन्हें नॉन-वेज की जगह दाल का सूप ऑफर किया गया था।
मल्लिका दुआ ने शेयर की अस्पताल की तस्वीर
मल्लिका दुआ ने 17 सितंबर को सोशल मीडिया पर अस्पताल के बेड से अपनी एक तस्वीर शेयर की। इसी पोस्ट में उन्होंने अस्पतालों में वेजिटेरियन खाने की पॉलिसी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने बताया कि एक बार हिंदुजा अस्पताल में उन्होंने पाया सूप मांगा था, लेकिन वहां उन्हें बताया गया कि अस्पताल में नॉन-वेज खाना नहीं मिलता और इसके बदले उन्हें दाल का सूप दिया गया। मल्लिका ने सवाल उठाया कि क्या अस्पतालों को मरीजों की डाइट और उनकी पसंद को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग तरह के खाने के विकल्प नहीं देने चाहिए।
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‘आखिर अस्पताल वेजिटेरियन कैसे हो सकता है?’
मल्लिका ने अपनी पोस्ट में ‘वेजिटेरियन अस्पताल’ की अवधारणा पर ही सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने लिखा कि अस्पताल कोई रेस्टोरेंट नहीं है, जहां धार्मिक भावनाओं के आधार पर मेन्यू तय किया जाए। उन्होंने फोर्टिस का भी जिक्र करते हुए अस्पतालों में नॉन-वेज खाने के विकल्प नहीं होने पर सवाल उठाया। मल्लिका का कहना था कि मरीज अस्पताल में इलाज और रिकवरी के लिए जाता है, ऐसे में उसके खाने की जरूरतों को भी महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने दाल के सूप और पाया सूप के बीच पोषण की तुलना करते हुए भी अपनी बात रखी।
डॉक्टरों के व्यवहार पर भी उठाया सवाल
मल्लिका दुआ ने सिर्फ अस्पताल के खाने तक अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने डॉक्टरों के मरीजों के साथ व्यवहार यानी ‘बेडसाइड मैनर्स’ का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि अस्पतालों में खाने को लेकर जिस तरह की संवेदनशीलता दिखाई जाती है, अगर उतनी ही संवेदनशीलता मरीजों के साथ डॉक्टरों के व्यवहार में भी दिखाई जाए तो बेहतर होगा। हालांकि, बाद में मल्लिका ने यह भी साफ किया कि वह सभी डॉक्टरों को एक जैसा नहीं बता रही हैं। उन्होंने माना कि कई डॉक्टर बेहद अच्छे और संवेदनशील होते हैं, जो मरीजों की देखभाल और इलाज दोनों को महत्व देते हैं।
मल्लिका की पोस्ट पर दो हिस्सों में बंटे लोग
मल्लिका की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय देखने को मिली। कुछ यूजर्स ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा कि अस्पतालों में मरीज की डाइट और पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर ऑप्शन होने चाहिए। वहीं, कुछ लोगों ने मल्लिका की बात से असहमति जताई। कुछ यूजर्स ने कहा कि वेजिटेरियन खाना भी पौष्टिक हो सकता है और हर व्यक्ति की खाने की पसंद अलग होती है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि शाकाहार को सिर्फ धार्मिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इसके पीछे व्यक्तिगत, सांस्कृतिक और नैतिक कारण भी हो सकते हैं।
आयरन इन्फ्यूजन भी ले रही हैं मल्लिका
मल्लिका ने अपनी पोस्ट में यह भी बताया कि वह अस्पताल में आयरन इन्फ्यूजन ले रही हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि एक बार उनका आयरन इन्फ्यूजन पूरा हो जाए, उसके बाद वह खुद को ‘इनविंसिबल’ महसूस करेंगी। मल्लिका ने आखिर में एक बार फिर सवाल दोहराया कि ‘वेजिटेरियन अस्पताल’ आखिर होता क्या है और कहा कि उन्हें लगता था कि मेडिकल फील्ड में शिक्षा और मरीज की जरूरतों को ज्यादा महत्व दिया जाता है। मल्लिका दुआ की इस पोस्ट ने अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाले खाने, वेज और नॉन-वेज विकल्पों और मरीजों की व्यक्तिगत डाइट से जुड़े सवालों को सोशल मीडिया की बहस का मुद्दा बना दिया है।
