Nana Patekar Famous Dialogue: नाना पाटेकर की आवाज और संवाद अदायगी ने कई किरदारों को अमर बना दिया। उनके निधन के बाद एक बार फिर याद आ रहे हैं वो डायलॉग, जिन्हें सुनते ही किरदार आंखों के सामने आ जाते हैं।
नाना पाटेकर के निधन की खबर 8 अक्टूबर 2026 की सुबह सामने आई। 75 वर्षीय अभिनेता का गोवा स्थित आवास पर कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हुआ और करीब 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित किया गया। उनकी सबसे बड़ी पहचान सिर्फ दमदार अभिनय नहीं, बल्कि ऐसी संवाद अदायगी थी, जो पर्दे से निकलकर लोगों की जुबान पर चढ़ गई। ‘क्रांतिवीर’ से ‘अब तक छप्पन’, ‘प्रहार’ से ‘वेलकम’ तक नाना के कई डायलॉग आज भी उतने ही असरदार हैं। उनकी याद में पेश हैं नाना पाटेकर के 30 अमर फिल्मी डायलॉग, जो उनके अभिनय और आवाज की ताकत को हमेशा जिंदा रखेंगे।
नाना पाटेकर के यादगार डायलॉग्स
- आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने। - क्रांतिवीर (1994)
- ये मुसलमान का खून, ये हिंदू का खून...बता इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा? - क्रांतिवीर (1994)
- हाथ पकड़ना सीखो, गला पकड़ना नहीं! - क्रांतिवीर (1994)
- सिस्टम नहीं बदलेगा… आदमी बदलना पड़ेगा। - क्रांतिवीर (1994)
- इंसान को उसकी औकात से ज़्यादा इज़्ज़त मत दो।- क्रांतिवीर (1994)
- एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है!- यशवंत (1997)
- धंधा गलत नहीं होता साहब, करने वाला गलत होता है।- अब तक छप्पन (2004)
- मैं गोली नहीं चलाता…मैं खामोशी से खून करता हूं।- अब तक छप्पन (2004)
- पुलिस की नौकरी में दोस्ती नहीं होती। - अब तक छप्पन (2004)
- ज़ख्म दिखाई देते हैं…दर्द नहीं।- प्रहार: द फाइनल अटैक (1991)
- जिसे डर नहीं लगता, वो सबसे बड़ा डर होता है।- प्रहार (1991)
- देश के लिए मरना आसान है… देश के लिए जीना मुश्किल।- प्रहार (1991)
- तुम्हारा गुस्सा तुम्हारी कमजोरी है, मेरा गुस्सा मेरी ताकत!- अंगार (1992)
- हम जो करते हैं, खुल्लम-खुल्ला करते हैं… छुप-छुप के नहीं।- वेलकम (2007)
- मैं जो बोलता हूं, वो करता हूं… और जो नहीं बोलता, वो ज़रूर करता हूं।- वेलकम (2007)
- कंट्रोल उदय, कंट्रोल!- वेलकम (2007)
- शब्द चुभ जाते हैं साहब… और मैं तो लफ़्ज़ों का सौदागर हूं।- वजूद (1998)
- मैं जो हूं, वो हूं… मुझे बदलने की कोशिश मत करना।- वजूद (1998)
- जान मत मांगना… इसकी बाज़ार में कोई कीमत नहीं।- गुलाम-ए-मुस्तफ़ा (1997)
- मैं जान दे सकता हूं… जान ले नहीं सकता।- गुलाम-ए-मुस्तफ़ा (1997)
- हाथ लगाओ तो हाथ जले, मुंह लगाओ तो मुंह जले।- गुलाम-ए-मुस्तफ़ा (1997)
- दुख नाम की बीमारी का इलाज किसी डॉक्टर के पास भी नहीं है।- परिंदा (1989)
- तुझे ऐसी मौत मारूँगा कि तेरी पापी आत्मा अगले सात जन्म तक कांप उठेगी।- तिरंगा (1993)
- गलती तेरी नहीं है… तेरी परवरिश ही ऐसी हुई है।- तिरंगा (1993)
- बहारें हमको ढूंढेंगी, न जाने हम कहां होंगे।- अग्निसाक्षी (1996)
- प्यार में हक़ होता है… और हक़ में ज़िद।- अग्निसाक्षी (1996)
- ईमानदारी और बहादुरी अब फिल्मों में ही अच्छी लगती है।- अपहरण (2005)
- राजनीति में रिश्ते नहीं होते… समीकरण होते हैं।- राजनीति (2010)
- भगवान का दिया सब कुछ है… दौलत है, शोहरत है।- वेलकम बैक (2015)
- बात करने का तरीका बदलो…वरना हम बदल देंगे।- तिरंगा (1993)
