नाना पाटेकर ने पुराने इंटरव्यू में पिता को खोने का दर्द साझा किया था। इलाज के लिए पैसे नहीं थे और अस्पताल के बाहर बिताई रातें उन्हें ताउम्र उन्हें रुलाती रहीं।

दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर को उनके दमदार अभिनय के साथ जिंदगी के संघर्षों के लिए भी याद किया जाता है। साल 2024 में फिल्म ‘वनवास’ के प्रमोशन के दौरान NDTV को दिए एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने अपने जीवन के उस दर्द को साझा किया था, जिसे वह कभी नहीं भुला पाए। उन्होंने बताया था कि जब उनके पिता बीमार थे, तब उनके पास इलाज के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। बाद में फिल्मों से खूब कमाई हुई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पिता को खोने का यह पछतावा नाना पाटेकर के साथ ताउम्र रहा। नाना पाटेकर के निधन के बाद उनका यह किस्सा तेजी से वायरल हो रहा है।

नाना पाटेकर के पिता की मौत कैसे हुई थी?

पुराने इंटरव्यू में नाना पाटेकर ने बताया था कि उनके करियर की शुरुआत में आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। फिल्मों में काम मिलने के बाद धीरे-धीरे उनकी कमाई बढ़ी और फिर उन्होंने काफी पैसा कमाया। लेकिन जब उनके पिता बीमार पड़े, तब वह उनके इलाज का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं थे। नाना ने कहा था, “मैंने फिल्मों से पैसे कमाने शुरू किए। शुरुआत में थोड़े पैसे मिलते थे, फिर मैं खूब कमाने लगा। लेकिन जब मेरे पिता बीमार थे, तब मेरे पास उनके इलाज के लिए पैसे नहीं थे और अस्पताल में ही उनकी मौत हो गई।”

पिता के इलाज के दौरान अस्पताल के बाहर रातें क्यों बिताते थे नाना?

नाना पाटेकर ने उस मुश्किल दौर को भी याद किया था, जब उन्हें अपने बीमार पिता के पास अस्पताल के अंदर रात बिताने की इजाजत नहीं थी। ऐसे में वह अपने एक दोस्त के साथ अस्पताल की सीढ़ियों या फुटपाथ पर बैठकर रात गुजारते थे। उस वक्त उनके मन में यही चिंता रहती थी कि कहीं कोई आकर उनके पिता के गुजर जाने की खबर न सुना दे। उन्होंने बताया कि अनिश्चितता से भरी उन रातों में दोनों दोस्त अंताक्षरी खेलकर वक्त काटने की कोशिश करते थे।

अस्पताल के बाहर दोस्त के साथ अंताक्षरी क्यों खेलते थे नाना पाटेकर?

पिता के इलाज के दौरान बिताई गई रातों का जिक्र करते हुए नाना ने कहा था, “हम अस्पताल के बाहर सीढ़ियों या फुटपाथ पर बैठा करते थे। हमें रात में अंदर रुकने की इजाजत नहीं थी, इसलिए हम बाहर बैठकर अंताक्षरी खेलते थे। मेरा एक दोस्त भी मेरे साथ था। पता ही नहीं होता था कि कब कोई बाहर आकर बता देगा कि आपके पिता अब नहीं रहे।” उनके इस बयान से उस समय की बेचैनी और बेबसी का अंदाजा लगाया जा सकता है, जब हर पल किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती थी।

पिता को बेहतर अस्पताल नहीं ले जाने का पछतावा क्यों रहा?

नाना पाटेकर के मन में सबसे बड़ा मलाल यह था कि आर्थिक तंगी के कारण वह अपने पिता को बेहतर इलाज नहीं दिला सके। उन्हें लगता था कि अगर उनके पास पैसे होते, तो वह बेहतर दवाइयों का इंतजाम कर सकते थे और पिता को किसी अच्छे अस्पताल में ले जा सकते थे। उन्होंने अपने पछतावे को बयां करते हुए कहा था, “अगर मेरे पास पैसे होते, तो मैं उन्हें बेहतर दवाइयां दिला सकता था और किसी अच्छे अस्पताल में ले जा सकता था। लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाया। वह झिझक और बेबसी आपके भीतर रह जाती है।”

पिता को याद कर आज भी भावुक हो जाते थे नाना पाटेकर?

पिता को खोने का दर्द नाना पाटेकर के मन में लंबे समय तक बना रहा। उन्होंने इंटरव्यू में बताया था कि उस दौर को याद करना आज भी उनके लिए आसान नहीं है। एक्टर ने कहा था, “आज भी जब मैं उन दिनों को याद करता हूं, तो मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं।” फिल्मों में सफलता और आर्थिक मजबूती हासिल करने के बाद भी वह उस समय को नहीं बदल सके, जब उनके पिता को इलाज की जरूरत थी। यही वजह थी कि पिता के इलाज के लिए पैसे नहीं जुटा पाने का अफसोस उनके दिल में गहराई से बसा रहा।