Salman Khan Maatrubhumi Release Update: लंबे इंतजार के बाद सलमान खान की गलवान संघर्ष पर बनी फिल्म की रिलीज तारीख सामने आ गई है। अभिनेता ने देरी की वजह भी बताई है।
सलमान खान की युद्ध पर आधारित फिल्म 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' को आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज करने की तारीख मिल गई है। लंबे समय से अटकी इस फिल्म को लेकर अभिनेता ने मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि फिल्म कब दर्शकों के सामने आएगी और इसकी रिलीज में इतनी देरी क्यों हुई। सलमान के मुताबिक, निर्माता फिल्म के दृश्य प्रभावों को बेहतरीन बनाना चाहते थे, ताकि दर्शकों को बड़े पर्दे पर शानदार अनुभव मिले। फिल्म की कहानी 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई भिड़ंत से प्रेरित है।
सलमान खान की 'मातृभूमि' किस दिन सिनेमाघरों में रिलीज होगी?
सलमान खान ने शुक्रवार को मुंबई में फिल्म के प्रचार कार्यक्रम के दौरान घोषणा की कि 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' देशभर के सिनेमाघरों में 4 दिसंबर को रिलीज होगी। अभिनेता इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं और इसका निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है। फिल्म का नाम पहले 'बैटल ऑफ गलवान' रखा गया था, लेकिन बाद में इसे बदलकर 'मातृभूमि' कर दिया गया।
फिल्म की रिलीज में देरी की वजह क्या है? सलमान ने क्या बताया?
रिलीज में देरी को लेकर सलमान ने कहा कि उनकी टीम फिल्म के दृश्य प्रभावों को लेकर कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती थी। उन्होंने बताया, "आज बहुत से ऐसे विशेषज्ञ हैं, जो किसी फिल्म के हर दृश्य को बारीकी से देखते हैं। हम नहीं चाहते कि कोई किसी दृश्य को बड़ा करके उसके दृश्य प्रभावों की आलोचना करे। हम चाहते हैं कि फिल्म के दृश्य हर किसी को हैरान कर दें। इसे बहुत खूबसूरती से फिल्माया गया है।"
सलमान के मुताबिक, टीम को पहले लगा था कि फिल्म 45-50 दिनों में पूरी हो जाएगी, लेकिन चित्रांगदा सिंह के चोटिल होने और उनके ठीक होने में समय लगने के कारण काम प्रभावित हुआ। उन्होंने बताया कि फिल्म पहले जनवरी या जून में रिलीज होने वाली थी, फिर इसे अगस्त तक टाला गया और अब इसकी तारीख 4 दिसंबर तय की गई है।
गलवान घाटी की घटना पर आधारित फिल्म में सलमान किसका किरदार निभा रहे हैं?
'मातृभूमि' की कहानी पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में वर्ष 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुए संघर्ष से प्रेरित है। सलमान फिल्म में 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बिक्कुमल्ला संतोष बाबू की भूमिका निभा रहे हैं। इस संघर्ष में उन्होंने अपने 19 साथी सैनिकों के साथ देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। गलवान की भिड़ंत में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे।
'बैटल ऑफ गलवान' का नाम बदलकर 'मातृभूमि' क्यों रखा गया?
फिल्म की घोषणा पहले 'बैटल ऑफ गलवान' के नाम से हुई थी। बाद में निर्माताओं ने इसका नाम बदलकर 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' कर दिया। निर्देशक अपूर्व लाखिया के मुताबिक, फिल्म सिर्फ सैनिकों के बीच हुई भिड़ंत तक सीमित नहीं है। इसमें इंसानियत, बलिदान और युद्ध के कारण परिवारों पर पड़ने वाले भावनात्मक असर को भी दिखाया जाएगा।
फिल्म के टीजर पर चीन के अखबार ने क्या आपत्ति जताई थी?
सलमान ने पिछले साल दिसंबर में अपने 60वें जन्मदिन पर फिल्म का पहला टीजर जारी किया था। इसके बाद चीन के सरकारी समाचार पत्र 'ग्लोबल टाइम्स' ने फिल्म को लेकर आलोचना की थी। अखबार ने इसे सिनेमाई अतिशयोक्ति बताते हुए वास्तविक घटनाओं को गलत ढंग से दिखाने का आरोप लगाया था। उस समय भारत सरकार के एक सूत्र ने जवाब दिया था कि भारत में फिल्मों के जरिए कलात्मक अभिव्यक्ति की परंपरा रही है। उन्होंने 1964 की 'हकीकत' और '120 बहादुर' जैसी फिल्मों का उदाहरण भी दिया था।












