गोरखपुरः  मामला गोरखपुर का है और यह 26 जुलाई को सामने आया। एक युवक लंबे समय से शादी के लिए परेशान था। रिश्ते तो कई आए लेकिन किसी न किसी वजह से मामला रास्ते में अटक जाता था। युवक ने लंबा-चौड़ा दोस्तों का ग्रुप बना रखा था। हर कोई मजा ले रहा था कि भई उम्र निकलती जा रही है। वो हर दिन हंसी का पात्र बन रहा था। ये बात वो माता-पिता से भी नहीं कह पा रहा था। इस दौरान एक दोस्त ने किसी बिचौलिये के बारे में बताया। दोस्त ने कहा- ये रिश्ता पक्का करवा देगा। इतना सुनते ही युवक के मन में गुब्बारे फूटने लगे। दोस्त ने युवक और बिचौलिए की मीटिंग फिक्स करवा दी।

अब देखिए क्या हुआ...यहीं से शुरू हो गई धोखे की कहानी...
दोस्त ने कहा- अगर बिचौलिए से बात फिक्स हो गई तो लगे हाथ लड़की भी वो दिखवा देगा। लड़का संज-संवरकर दोस्त के साथ बिचौलिए के पास चल पड़ा। बिचौलिए ने लड़के के बारे में विस्तार से पूछा। मामला चूंकि लड़की का था इसलिए लड़का ज्यादा कुछ पूछ नहीं पा रहा था। वो सिर्फ बिचौलिए को अपने ही बारे में बता रहा था। दोस्त ने इशारा किया कि लड़की के बारे में पूछो। उसने बिचौलिए से पूछा- लड़की कौन है। उसके बारे में कुछ बताइए। बिचौलिआ बोला- इतनी भी क्या जल्दी है। पहले बात तो पक्की कर लो। यह सुन वो सकपका गया। पूछा- पक्की मतलब। उसने कहा- 1 लाख रु. लूंगा। लड़की पढ़ी-लिखी और खूबसूरत है। घर का सारा कामकाज कर लेती है। ढूंढ़ने पर भी ऐसी लड़की नहीं मिलेगी। तारीफ सुनकर लड़का मन ही मन प्रसन्न हो रहा था। उसने दोस्त से कहा- बार्गेनिंग करो। मैं 40 हजार रु. तक दूंगा। फिर क्या था- सौदेबाजी का दौर शुरू हो गया। बात 40 हजार रु. पर डन हो गई। बिचौलिए ने लड़के के हाथ में लड़की की फोटो रख दी। लड़की वाकई सुंदर थी। फोटो देखकर लड़के ने लड़की को सामने देखने वाला प्लान कैंसल कर दिया। सगाई की बात को भी लड़के ने रिजेक्ट कर दी। कहा- अब तो सीधे फेरे होंगे। माता-पिता राजी थी, इसलिए पंडित को बुलाकर शादी की डेट फिक्स हो गई। जगह भी फाइनल हो गई।

मंदिर में हुई शादी, सिंदूरदान के वक्त गदगद हो गया दूल्हा
21 जुलाई को लड़का दूल्हा बनकर बिचौलिए द्वारा बताए गए मंदिर पर पहुंच गया। इस दौरान लड़की घूंघट में थी। लड़का फेरे से पहले एक बार उसका चेहरा देखना चाहता था। कई प्रयास के बाद भी वो कामयाब नहीं हुआ और बात फेरे तक पहुंच गई। दूल्हा-दुल्हन ने सात फेरे लिए। इसी बीच दूल्हे की मुराद पूरी हो गई। सिंदूरदान के वक्त दुल्हनियां का चेहरा उसने देख लिया। खुश होकर उसने 5 हजार रु. बिचौलिए को यूं ही दे दिया।

सुहागरात पर दूल्हा-दुल्हन के बीच में आ गए पंडित जी
घर वालों ने धूम-धाम से नई-नवेली दुल्हन का गृह प्रवेश किया। मुंह दिखाई की रस्म पर क्षमतानुसार नात-रिश्तेदारों ने दूल्हन को कुछ न कुछ दिया। इस दौरान दूल्हे के दोस्त दुल्हन का कमरा सजाने में जुट गए। लड़का रात होने का इंतजार करता रहा। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार वो रात आ ही गई। वो सोच रहा था दुल्हन के पास वो खुद चला जाएगा लेकिन ऐसा किया तो घरवाले हंसेंगे। इसलिए वह भाभियों के इर्द-गिर्द चक्कर काटने लगा। भाभियां भी समझ गईं। उन्होंने बहाने से दुल्हन के कमरे में देवरजी को बुलाया और दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। वो यही चाहता था। इसके बाद शुरू हुआ ड्रामा। दूल्हा 4 दिन इंतजार करता रहा कि कब वो रात आएगी। हुआ कुछ यूं कि दुल्हन पूरी तरह फर्जी थी। उसका प्लान इस ग्राहक को लूटकर दूसरे ग्राहक की तलाश करना था। इसलिए दुल्हन ने नाटक किया। दूल्हे ने जैसे घूंघट उठाया, दुल्हन दो कदम पीछे हो गई। लेकिन संस्कार दिखाते हुए उसने पतिदेव के पैर छुए। काफी लंबी-चौंड़ी बातचीत के बाद दुल्हन ने कहा- अजी आपसे एक जरूरी बात करनी है। दूल्हे ने कहा- हां, बताओ-बताओ। दुल्हन बोली- पंडित जी ने बताया था कि पहली रात दोनों एक-दूसरे से दूर रहना। अगर ऐसा हुआ तो पति के ऊपर संकट आ सकता है। यह सुनकर दूल्हा अंदर ही अंदर तड़प उठा। बेबस भरी नजरों से दुल्हन की तरफ देखा और कहा- यह सब पूछने कोई पंड़ित के पास जाता है क्या। खैर जब कह ही दिया है तो गुड नाइट।

3 दिन तक चला सुहागरात का खेल, चौथे दिन बहू ने जीता सबका दिल लेकिन...
सुहागरात तो नहीं हो सकी। तीन दिन तक पतिदेव को घुमाने के बाद चौथे दिन दुल्हन ने सबका दिल जीत लिया। पतिदेव की खुशी देखने लायक थी। घरवाले पड़ोसियों के पास पहुंच गए बहू की तारीफ करने। हुआ कुछ यूं कि चौथे दिन सुबह-सुबह घरवालों की नींद खुली तो हर कोई हैरान था। बहू झाड़ू-पोछा, बर्तन सब कर चुकी थी। चाय भी सबको दे डाला और खाना बनाने में जुट गई। एक से बढ़कर एक शानदार पकवान बनाया। आदर-सत्कार देख घरवालों ने कहा- अब लगता है बहू हमारे माहौल में ढल गई है। किसी को नहीं पता था कि बहू खतरनाक प्लान बन चुका है। उसी के लिए यह आव-भगत हो रही है। रात 9 बजे दुल्हन का भाई (गैंग का सरगना) आ पहुंचा। प्लान इसी के बाद स्टार्ट होना था। सास-ससुर और जीजा के साथ दुल्हन का भाई बैठ गया। हालचाल लेने के बाद सासू मां ने कहा- रात हो गई है, अब चाय वाय रहने दो सीधा खाना ही खिला दो। यह सुनते ही बहू ने तपाक से कहा- मेरे भइया को रात 9 बजे चाय पीने की आदत है। यह सुनकर घरवालों ने कुछ नहीं कहा और अगले 15 मिनट में सबके लिए चाय हाजिर हो गई। यह देख घरवालों ने एक स्वर में कहा- अरे हम सब तो खाना खा चुके हैं, अपने भैया को ही चाय पिलाओ। यह सुनकर बहू रुहांसी हो गई और कहा- भैया तो सुबह होते ही निकल जाएंगे। एक चाय तो इनके साथ पी ही सकते हैं। बहू का प्यार देख सबने चाय की चुस्कियां लेनी शुरू कर दी। चाय की चुस्कियों के बीच जो जहां था वहां लुढ़कने लगा। अगले 10 मिनट में हर कोई नींद के आगोश में पहुंच गया।

पांचवें दिन सुबह नींद खुली तो लड़के की निकली चीख और थाने पहुंच गया परिवार
चाय पीते ही जो जहां था वो वहां सो गया। सुबह सबसे पहले लड़के की नींद खुली। उसने पत्नी को आवाज दी। कोई जवाब न आने पर वो कमरे में गया। चारों तरफ देखते ही उसको सारा गेम समझ में आ गया। वो चीखने-चिल्लाने लगा। आवाज सुनकर घरवालों की भी नींद खुली। हर कोई समझ गया क्योंकि कोई जमीन पर सो रहा था, कोई कुर्सी पर, कोई तखत पर। लड़की सोने-चांदी के गहने, पैसे और कपड़े लेकर फरार हो चुकी थी। घर में चीखना-चिल्लाना मच गया। घरवालों ने बिचौलिए और महिला के भाई को फोन लगाया लेकिन वो स्विचऑफ था। लड़का तत्काल थाने पहुंचा। जांच पड़ताल में पता चला मामला लुटेरी दुल्हन गैंग का है। एक पूरी गैंग है जो ऐसे ही लड़कों को फंसाती है जिसकी शादी नहीं हुई होती है। फिलहाल पुलिस ने गैंग के सरगना और लड़की को गिरफ्तार कर लिया है।