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कभी मिट्टी के घर में रहने को मजबूर हो गए थे रवि किशन, नहीं थे मां के पास साड़ी खरीदने तक के पैसे

First Published Feb 22, 2020, 11:18 AM IST
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मुंबई. उत्तर प्रदेश के जौनपुर में जन्मे भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। आज वो एक्टर होने के साथ-साथ बीजेपी से गोरखपुर के सांसद हैं। उनकी इस सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत है। रवि किशन आज जिस मुकाम पर खड़े हैं उससे पहले उन्होंने गरीबी के दिन भी देखे हैं। साथ ही जीवन में कई उतार-चढ़ाव भी देखे हैं। कभी ऐसा भी हुआ है कि उनकी मां के पास साड़ी तक खरीदने के पैसे नहीं थे।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जाता है कि रवि के पिता पहले दूध की डेयरी चलाते थे। साथ ही वे ये भी चाहते थे कि रवि भी इसी काम में लगें। लेकिन, किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था साथ ही रवि को भी इस काम में कोई दिलचस्पी नहीं थी। एक समय ऐसा आया जब रवि के पिता का बिजनेस ठप्प हो गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जाता है कि रवि के पिता पहले दूध की डेयरी चलाते थे। साथ ही वे ये भी चाहते थे कि रवि भी इसी काम में लगें। लेकिन, किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था साथ ही रवि को भी इस काम में कोई दिलचस्पी नहीं थी। एक समय ऐसा आया जब रवि के पिता का बिजनेस ठप्प हो गया था।

इसके बाद रवि किशन और उनका पूरा परिवार जौनपुर लौटने को मजबूर हो गया, यहां आने के बाद उनके परिवार की हालत और भी ज्यादा खराब हो गई। पैसों की तंगी होने के चलते उनके परिवार और उनको मिट्टी से बने घर में रहना पड़ा। एक बार इंटरव्यू के दौरान रवि ने कठिन समय की बात करते हुए बताया था कि, उनके पास मां के लिए साड़ी खरीदने के भी पैसे नहीं बचे थे।

इसके बाद रवि किशन और उनका पूरा परिवार जौनपुर लौटने को मजबूर हो गया, यहां आने के बाद उनके परिवार की हालत और भी ज्यादा खराब हो गई। पैसों की तंगी होने के चलते उनके परिवार और उनको मिट्टी से बने घर में रहना पड़ा। एक बार इंटरव्यू के दौरान रवि ने कठिन समय की बात करते हुए बताया था कि, उनके पास मां के लिए साड़ी खरीदने के भी पैसे नहीं बचे थे।

मगर रवि किशन भी कहा मानने वाले थे। वो बचपन से ही बहुत मेहनती थे। उन्होंने मां के लिए साड़ी खरीदने के लिए 3 महीने तक लगातार अखबार बेचा और मां के लिए आखिरकार रवि ने साड़ी खरीद ही ली। मगर, अफसोस इसके बदले उन्हें मां के हाथों से थप्पड़ खाना पड़ा। जब उन्होंने मां को बताया कि कैसे ये साड़ी उन्होंने खरीदी तो मां ने उन्हें गले से लगा लिया।

मगर रवि किशन भी कहा मानने वाले थे। वो बचपन से ही बहुत मेहनती थे। उन्होंने मां के लिए साड़ी खरीदने के लिए 3 महीने तक लगातार अखबार बेचा और मां के लिए आखिरकार रवि ने साड़ी खरीद ही ली। मगर, अफसोस इसके बदले उन्हें मां के हाथों से थप्पड़ खाना पड़ा। जब उन्होंने मां को बताया कि कैसे ये साड़ी उन्होंने खरीदी तो मां ने उन्हें गले से लगा लिया।

रवि किशन के गरीबी के दिन सुनना और परिवार की हालत को जानना काफी इमोशनली होता है। इनकी जब भी कोई सुनता है तो एक्टर और सुनने वाले लोग भी काफी इमोशनल हो जाते हैं।

रवि किशन के गरीबी के दिन सुनना और परिवार की हालत को जानना काफी इमोशनली होता है। इनकी जब भी कोई सुनता है तो एक्टर और सुनने वाले लोग भी काफी इमोशनल हो जाते हैं।

बता दें, बचपन से रवि किशन को बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन काफी पसंद थे और आज उनको खुद भोजपुरी सिनेमा का बिग बी कहा जाता है। रवि किशन ने बॉलीवुड की कई फिल्मों में काम किया है जिसमें 'तेरे नाम', 'फिर हेरा फेरी', 'लक', 'रावन', 'मोहल्ला अस्सी' और 'तनु वेड्स मनु' जैसी फिल्में शामिल हैं।

बता दें, बचपन से रवि किशन को बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन काफी पसंद थे और आज उनको खुद भोजपुरी सिनेमा का बिग बी कहा जाता है। रवि किशन ने बॉलीवुड की कई फिल्मों में काम किया है जिसमें 'तेरे नाम', 'फिर हेरा फेरी', 'लक', 'रावन', 'मोहल्ला अस्सी' और 'तनु वेड्स मनु' जैसी फिल्में शामिल हैं।

रवि किशन रियल लाइफ में चार बच्चों के पिता हैं। इनमें उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है। तीन बेटियों के होने के नाते रवि खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं। क्योंकि, वो उन्हें देवी मानते हैं।

रवि किशन रियल लाइफ में चार बच्चों के पिता हैं। इनमें उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है। तीन बेटियों के होने के नाते रवि खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं। क्योंकि, वो उन्हें देवी मानते हैं।

बहरहाल, रवि किशन के वर्कफ्रंट की बात की जाए तो वो आखिरी बार बॉलीवुड फिल्म 'मरजावां' में पुलिस के रोल में नजर आए थे। लंबे समय से रवि किशन ने भोजपुरी से दूरियां बनाई हुई है।

बहरहाल, रवि किशन के वर्कफ्रंट की बात की जाए तो वो आखिरी बार बॉलीवुड फिल्म 'मरजावां' में पुलिस के रोल में नजर आए थे। लंबे समय से रवि किशन ने भोजपुरी से दूरियां बनाई हुई है।

इसके अलावा वो गोरखपुर के सांसद के तौर पर अपनी भूमिका अदा कर रहे हैं और राजीनीति में एक्टिव हैं।

इसके अलावा वो गोरखपुर के सांसद के तौर पर अपनी भूमिका अदा कर रहे हैं और राजीनीति में एक्टिव हैं।

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