सुबह 5.30 बजे निर्भया के दरिंदों को जल्लाद ने दी फांसी, इन दरिंदों पर कब होगा फैसला?
पटना। दिल्ली के चर्चित निर्भया गैंगरेप केस में कई बार डेथ वारंट जारी होने के बावजूद कानूनी पेंच का फायदा उठाकर दोषी फांसी की सजा से बचते रहे। शुक्रवार को दी जाने वाली फांसी को लेकर दोषियों की ओर से याचिका दायर की गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
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सुबह 5.30 बजे निर्भया के सभी दोषियों को फांसी दी गई। हालांकि निर्भया केस में सजा पाने के बावजूद दरिंदे तीन बार फांसी के तख्त पर पहुंचने से बचते रहे। निर्भया को न्याय तो मिल गया मगर अभी तमाम केसों में फांसी पाए अपराधियों को सजा नहीं मिली है। फांसी की सजा पाने तमाम अपराधी सुरक्षित जेलों में पड़े हुए हैं।
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अकेले बिहार में कई कैदी हैं जिन्हें फांसी की सजा तो मिल गई, प्रेसिडेंट के यहां से दया याचिका भी खारिज हो चुकी है, मगर अलग अलग कारणों से सभी फांसी के फंदे तक नहीं पहुंच पाए हैं। बिहार के शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारागार में फांसी की सजा पाए 11 कैदी हैं। इनमें से सात कैदियों पर दुष्कर्म कर हत्या के आरोप हैं। दुष्कर्म और हत्या के एक मामले में सजा पाए दरभंगा के मोहम्मद मन्नान की तो गंभीर बीमारी की वजह से फांसी से पहले ही मौत भी हो गई।
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15 साल पहले बिहार के एक खौफनाक हत्याकांड में फांसी की सजा पाए दोषियों को अब तक मुकाम तक नहीं पहुंचाया जा सका है। ये जघन्यतम मामला जुब्बा साहनी कारागार में बंद जगत राय का जुड़ा है।
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दो साल पहले ही जगत राय की दया याचिका को प्रेसिडेंट खारिज कर चुके हैं। दया याचिका खारिज होने के बाद निचली अदालत ने डेथ वारंट जारी किया था। मगर दिल्ली हाई कोर्ट ने डेथ वारंट पर रोक लगा दी।
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दरअसल, तब जगत राय के मामले में वकीलों की एक संस्था ने फांसी पर रोक लगाने की याचिका दाखिल कर दी थी। जेल प्रशासन को हाईकोर्ट के आदेश के प्रति रिसीव होने के बाद उसकी फांसी टल गई थी। जगत की फांसी अभी तक रुकी हुई है। (फोटो: निर्भया के माता पिता। )
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जगत राय का मामला बेहद अमानवीय है। 15 साल पहले बिहार के हाजीपुर जिले में एक खौफनाक वारदात हुई थी। रामपुर श्यामचंद गांव के निवासी जगत राय ने भैंस चोरी विवाद में एक साथ सात लोगों को जिंदा जलाकर मार दिया था। केस हिस्ट्री के मुताबिक रात में करीब एक बजे जगत राय लोगों के साथ मिलकर विजेंद्र महतो के घर पर मिट्टी का तेल और पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी थी। जिस वक्त आग लगाई गई घर में बेबी कुमारी, नीलम कुमारी, पूनम कुमारी, सूरज कुमार, अनिल कुमार और राजेश कुमार थे। (फोटो: निर्भया के माता पिता। )
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इस आगजनी में सभी जिंदा जल गए थे। हालांकि विजेंद्र महतो बुरी तरह आग में जल गए थे मगर उनकी मौत तुरंत नहीं हुई। इलाज के दौरान विजेंद्र की मौत हुई थी। इस जघन्यतम मामले में 2009 को जगत को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
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अब निर्भया के दोषियों को सजा के बाद बिहार में यह चर्चा आम है कि सजा पाने वालों को कब फांसी के तख्त पर ले जाया जाएगा। (तस्वीरों का इस्तेमाल स्टोरी प्रेजेंटेशन के लिए हुआ है।)
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