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दोस्‍त की मौत के बाद छोड़ दी नौकरी, फ्री में बांट रहे हैं हेलमेट, यूपी में हेलमेट मैन बना बिहार का ये लाल

First Published Sep 20, 2020, 10:58 AM IST
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कैमूर (Bihar) । बिहार के एक लाल की यूपी में अलग पहचान बन गई है। पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के संसदीय क्षेत्र वाराणसी |(Varanasi) में उसे लोग हेलमेट मैन के नाम से पुकारते हैं। दरअसल वह लोगों को फ्री में हेलमेट बांटते हैं। साथ ही एक्सीडेंटल बीमा भी करते हैं। बता दें कि यह सब वह अपने दोस्त की एक्सीडेंट में हेलमेट न लगाने से हुए मौत के बाद कर रहे हैं। इतना ही नहीं प्राइवेट नौकरी (Private job)  छोड़कर उन्होंने गरीब बच्चों को फ्री में बुक भी देने का काम शुरू किया है।
(बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनावी हलचल के बीच हम अपने पाठकों को 'बिहार के लाल' सीरीज में कई हस्तियों से रूबरू करा रहे हैं। इस सीरीज में राजनीति से अलग उन हस्तियों के संघर्ष और उपलब्धि के बारे में बताया जा रहा है जिन्होंने न सिर्फ बिहार बल्कि देश दुनिया में भारत का नाम रोशन किया।)


बिहार के कैमूर जिले के रहने वाले राघवेंद्र वाराणसी के लंका चौराहे पर लोगों को फ्री में हेलमेट बांटते हैं। हालांकि उन्होंने इसके लिए कुछ शर्त भी रखते हैं, जिसे पूरा करने वालों को ही फ्री में हेलमेट देते हैं।


बिहार के कैमूर जिले के रहने वाले राघवेंद्र वाराणसी के लंका चौराहे पर लोगों को फ्री में हेलमेट बांटते हैं। हालांकि उन्होंने इसके लिए कुछ शर्त भी रखते हैं, जिसे पूरा करने वालों को ही फ्री में हेलमेट देते हैं।


राघवेंद्र उनलोगों को फ्री में हेलमेट देते हैं, जिनका हाल ही में चालान कटा हो। चालान जमा वाली रसीद दिखाने पर ही वह लोगों को फ्री में हेलमेट देते हैं। 
 


राघवेंद्र उनलोगों को फ्री में हेलमेट देते हैं, जिनका हाल ही में चालान कटा हो। चालान जमा वाली रसीद दिखाने पर ही वह लोगों को फ्री में हेलमेट देते हैं। 
 


राघवेंद्र जरूरतमंद व्यक्ति का 5 लाख का एक्सिडेंटल इंश्योरेंस भी करवाते हैं। हालांकि इसके एवज में वह मात्र एक हजार रुपये लेते हैं, बदले में लोगों को रसीद देते हैं।
 


राघवेंद्र जरूरतमंद व्यक्ति का 5 लाख का एक्सिडेंटल इंश्योरेंस भी करवाते हैं। हालांकि इसके एवज में वह मात्र एक हजार रुपये लेते हैं, बदले में लोगों को रसीद देते हैं।
 


राघवेंद्र बताते हैं वह अबतक 42000 हजार लोगों को हेलमेट बांट चुके हैं। राघवेंद्र हर शहर में जाकर 10 दिन बिताते हैं और उन दस दिनों में जरूरतमंदों में हेलमेट बांटते हैं।
 


राघवेंद्र बताते हैं वह अबतक 42000 हजार लोगों को हेलमेट बांट चुके हैं। राघवेंद्र हर शहर में जाकर 10 दिन बिताते हैं और उन दस दिनों में जरूरतमंदों में हेलमेट बांटते हैं।
 


राघवेंद्र अब तक दो लाख बच्चों को फ्री में किताबें भी बांट चुके हैं। जिनके दिए गए बुक से कई स्टूडेंट की जिंदगी भी सवर चुकी है। हालांकि लोग पुराने बुक भी दान में उन्हें देते हैं।


 


राघवेंद्र अब तक दो लाख बच्चों को फ्री में किताबें भी बांट चुके हैं। जिनके दिए गए बुक से कई स्टूडेंट की जिंदगी भी सवर चुकी है। हालांकि लोग पुराने बुक भी दान में उन्हें देते हैं।


 


राघवेंद्र ने बताया कि उन्होंने ऐसा करने का फैसला 2014 में अपने दोस्त की मौत के बाद लिया। दोस्त की मौत सड़क दुर्घटना में हो गई। उनका मानना है कि यदि उनका दोस्त हेलमेट पहने हुए होता तो शायद उसकी जान बच जाती। तब से वह लोगों के बीच हेलमेट बांट रहे हैं।


राघवेंद्र ने बताया कि उन्होंने ऐसा करने का फैसला 2014 में अपने दोस्त की मौत के बाद लिया। दोस्त की मौत सड़क दुर्घटना में हो गई। उनका मानना है कि यदि उनका दोस्त हेलमेट पहने हुए होता तो शायद उसकी जान बच जाती। तब से वह लोगों के बीच हेलमेट बांट रहे हैं।

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