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बिहार की बेटी ज्योति के पिता की मौत, जिस बापू को साइकिल पर 1200 KM का सफर तय कर ले गई घर..वही नहीं रहे

First Published May 31, 2021, 2:08 PM IST
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दरभंगा (बिहार). साइकिल गर्ल के नाम से अपनी पहचान बनानी वाली बिहार की बेटी ज्योति के पिता मोहन पासवान का सोमवार को निधन हो गया। बताया जा रहा है कि  हार्ट अटैक की वजह से उनकी मौत हुई है। बता दें कि ज्योति कुमारी पिछले साल लॉकडाउन के दौरान अपने पिता को साइकिल पर बैठाकर गुरुग्राम से दरभंगा पहुंची थीं। जिसकी वजह वह देश ही नहीं बल्कि विदेशी मीडिया में भी सुर्खियों में आई थीं और 'साइकिल गर्ल' के नाम से चर्चित हुईं।

दरअसल, ज्योति के चाचा की 10 दिन पहले मौत हुई थी। उनके पिता अपने भाई की रसोई को लेकर परिवार और समाज के लोगों के साथ बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान वह अचानक जमीन में गिर पड़े और उनकी मौत हो गई। ग्रामीणों के मुताबिक, उनकी मौत  हृदय गति रुकने से हुई है। बेटी ज्योति का रो-रोकर बुरा हाल है।

(फाइल फोटो)

दरअसल, ज्योति के चाचा की 10 दिन पहले मौत हुई थी। उनके पिता अपने भाई की रसोई को लेकर परिवार और समाज के लोगों के साथ बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान वह अचानक जमीन में गिर पड़े और उनकी मौत हो गई। ग्रामीणों के मुताबिक, उनकी मौत  हृदय गति रुकने से हुई है। बेटी ज्योति का रो-रोकर बुरा हाल है।

(फाइल फोटो)

13 साल की ज्योति पासवान मूल रूप से दरभंगा जिले सिरहुल्ली गांव की रहने वाली है। यहीं उनके पिता मोहन पासवान अपने परिवार के साथ रहते थे। हालांकि एक साल पहले तक मोहन पासवान दिल्ली में ऑटो चलाकर अपने परिवार पालन-पोषण करते थे। लेकिन यहां उनका अचानक एक्सीडेंट हो गया था। इसी दौरान लगे लॉकडाउन के चलते कोई काम काज नहीं मिल पा रहा था। आलम यह हो गया था कि वह दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज तक हो गए थे। 

13 साल की ज्योति पासवान मूल रूप से दरभंगा जिले सिरहुल्ली गांव की रहने वाली है। यहीं उनके पिता मोहन पासवान अपने परिवार के साथ रहते थे। हालांकि एक साल पहले तक मोहन पासवान दिल्ली में ऑटो चलाकर अपने परिवार पालन-पोषण करते थे। लेकिन यहां उनका अचानक एक्सीडेंट हो गया था। इसी दौरान लगे लॉकडाउन के चलते कोई काम काज नहीं मिल पा रहा था। आलम यह हो गया था कि वह दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज तक हो गए थे। 

बेटी ज्‍योति से पिता की ये मजबूरी देखी नहीं जा रही थी। इसके लिए उसने 400 रुपये में एक पुरानी साइकिल खरीदी और अपने पिता को दरभंगा ले जाने की ठानी। इस तरह ज्योति ने बीमार पिता को साइकिल पर बैठाकर 8 दिनों तक 1200 किमी की यात्रा तय कर उन्हें अपने गांव सिरहुल्ली लेकर लाई। 

बेटी ज्‍योति से पिता की ये मजबूरी देखी नहीं जा रही थी। इसके लिए उसने 400 रुपये में एक पुरानी साइकिल खरीदी और अपने पिता को दरभंगा ले जाने की ठानी। इस तरह ज्योति ने बीमार पिता को साइकिल पर बैठाकर 8 दिनों तक 1200 किमी की यात्रा तय कर उन्हें अपने गांव सिरहुल्ली लेकर लाई। 

ज्योति इस साहस को देखकर देश-विदेश में खूब तारीफ हुई। रातोरात वह एक सिंपल लड़की से स्टार बन गई थी। इतना ही नहीं अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी ने भी ज्योति की तारीफ की थी। इवांका ट्रंप ने कहा था कि इस तरह का साहसिक कार्य भारत की बेटी ही कर सकती है।
 

ज्योति इस साहस को देखकर देश-विदेश में खूब तारीफ हुई। रातोरात वह एक सिंपल लड़की से स्टार बन गई थी। इतना ही नहीं अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी ने भी ज्योति की तारीफ की थी। इवांका ट्रंप ने कहा था कि इस तरह का साहसिक कार्य भारत की बेटी ही कर सकती है।
 

वहीं इस होनहार बेटी से 25 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्चुअल बात की थी। इतना ही नहीं ज्योति को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2021 से भी सम्मानित किया गया है।

वहीं इस होनहार बेटी से 25 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्चुअल बात की थी। इतना ही नहीं ज्योति को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2021 से भी सम्मानित किया गया है।

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