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सुबह से ही अक्षय ठाकुर के घरवालों ने खुद को बंद कर लिया घर के अंदर, ऐसा है दोषी के गांव का हाल
पटना/औरंगाबाद। 2012 के चर्चित निर्भया केस के चारों दोषियों पवन गुप्ता, अक्षय ठाकुर, मुकेश और विनय को सुबह 5:30 बजे तिहाड़ जेल में फांसी पर लटकाया गया। निर्भया गैंगरेप का एक दोषी बिहार के औरंगाबाद जिले के एक गांव का रहने वाला था। उसका नाम अक्षय ठाकुर है।
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अक्षय ठाकुर के फांसी पर लटकाए जाने के बाद उसके इलाके में लोग खुश भी हैं और दुखी भी। फांसी की सुबह अक्षय के गांव लोग अपने घरों में ही बंद हैं। गलियां सूनी पड़ी हैं। अक्षय का घर सुबह से ही बंद पड़ा है। घर का कोई सदस्य किसी से मिलने को तैयार नहीं है।
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अक्षय के घर में उसकी पत्नी, बेटा, पिता, मां और भाई रहते हैं। गांव में सुबह इक्का दुक्का जो लोग इधर-उधर नजर आ रहे हैं वो फांसी पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। गांव में अक्षय के पिता की काफी इज्जत है। इस वजह से कई लोग घटना पर दुख भी जताते हैं। हालांकि अपराध को कमतर बिलकुल नहीं मानते हैं।
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गांव वालों का आरोप है कि निर्भया केस की वजह से पूरे गांव की बहुत थू थू हुई है। और इसके लिए गांव वाले मीडिया के सिर पर दोष मढ़ते हैं। वैसे औरंगाबाद समेत बिहार के तमाम दूसरे गांवों में दोषियों की फांसी का स्वागत किया जा रहा है।
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अक्षय ठाकुर नौकरी के लिए दिल्ली गया था। यहीं पर वो बस कंडक्टरी का काम किया करता था। इसी काम के दौरान अक्षय की मुलाक़ात निर्भया केस के मुख्य आरोपी राम सिंह से हुई थी। राम सिंह ने 2013 में जेल में ही आत्महत्या कर ली थी।
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16 दिसंबर 2012 को निर्भया के साथ हैवानियत के बाद अक्षय ठाकुर गांव भाग आया था। उसे पांच दिन बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया था। कहा यह भी जाता है कि केस में नाम सामने आने के बाद खुद अक्षय के पिता ने अपने बेटे को पुलिस के हाथ सौंपा था।
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निर्भया का मामला दिसंबर 2012 का है। चलती बस में फिजियोथेरेपी स्टूडेंट के साथ न सिर्फ गैंगरेप हुआ बल्कि अमानवीयता की हद तक क्रूरता की गई। (फोटो: निर्भया की मां)
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खराब हालत में निर्भया को असपतला ले जाया गया। पर लाख कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। इस मामले में कुल छह आरोपी थे।
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एक आरोपी नाबालिग होने की वजह से बच गया। जबकि मुख्य आरोपी ने आत्महत्या कर ली थी।
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सात साल की कानूनी लड़ाई के बाद 20 मार्च 2020 को निर्भया के चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
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