इज्जत, फर्ज, देश सब एक चुटकी में धुआं...जॉन अब्राहम की बटला हाउस के 7 फेमस डायलॉग

First Published 15, Aug 2019, 12:25 PM IST

मुंबई। जॉन अब्राहम की मोस्टअवेटेड फिल्म 'बटला हाउस' स्वतंत्रता दिवस पर रिलीज हो चुकी है। फिल्म दिल्ली में हुए बटला हाउस एनकाउंट पर बेस्ड है। फिल्म अपने शानदार डायरेक्शन के साथ ही बेहतरीन डायलॉग्स की वजह से भी सुर्खियों में है। फिल्म के डायलॉग लोगों के दिलों में देशभक्ति की भावना भर देते हैं। फिल्म में जॉन अब्राहम के डायलॉग दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर देते हैं। हम बता रहे हैं, फिल्म के कुछ चुनिंदा Dialogues के बारे में। 

किससे सच सुनना है आपको, एक पुलिसवाले से। कभी बुलेटप्रूफ जैकेट पहनी है आपने? आपका सच और मेरा सच एक कैसे हो सकता है...

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सस्पेंड होने के बस इतना करीब हो तुम...

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चलें, कहां? जीतने...

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इज्जत, फर्ज, देश सब एक चुटकी में धुआं...ऐसे। वो चुटकी तो शायद कबकी बज चुकी है सर...और धुआं आप सबको सच देखने से रोक रहा है।

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जिन लड़कों को आपने मारा वो सारे के सारे स्टूडेंट्स थे। हां...। बेकसूर स्टूडेंट्स, स्टूडेंट्स कहा मैंने, बेकसूर नहीं।

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हमारी पाक किताब में ये लिखा है कि जुल्म के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। तो माहिम के 100 लोगों ने ही ये पाक किताब पढ़ी है, बाकी के हमारे 17 करोड़ मुसलमानों को पढ़ना नहीं आता।

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एक टेररिस्ट को मारने के लिए सरकार जो रकम देती है, उससे ज्यादा तो एक ट्रैफिक पुलिस हवलदार एक हफ्ते में कमा सकता है।

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