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महाभारत का दूसरा नाम है जया, कुछ ऐसे दमदार Dialogues से भरी है कंगना की फिल्म थलाइवी

First Published Mar 23, 2021, 3:10 PM IST
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मुंबई। कंगना रनोट (Kangana Ranaut) की मोस्टअवेटेड फिल्म 'थलाइवी' (Thalaivi) का ट्रेलर लॉन्च हो गया है। कंगना ने अपने बर्थडे के दिन ही इसे लॉन्च कर फैन्स बड़ा गिफ्ट दिया है। फिल्म 23 अप्रैल को रिलीज होगी। फिल्म में कंगना तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयलल‍िता (jayalalitha) के रोल में दमदार एक्टिंग करती नजर आ रही हैं। ट्रेलर की शुरुआत जयलल‍िता के फिल्मी कर‍ियर से होती है और इसके बाद वो किस तरह पॉलिटिक्स में आती हैं, इसे बखूबी दिखाया गया है। भरी सभा में जयललिता के साथ हुई बदतमीजी ने कैसे उनकी जिंदगी को बदलकर रख दिया, फिल्म में इसे बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है। इसके साथ ही फिल्म के दमदार डायलॉग्स भी ध्यान खींचते हैं। ट्रेलर की शुरुआत इस लाइन से होती है- वो फिल्म वाली हमें बताएगी कि राजनीति कैसे की जाती है? उसके बाद एक और आवाज आती है- ये मर्दों की दुनिया है और हम एक औरत को आगे करके खड़े हैं। इस पैकेज में हम बता रहे हैं 'थलाइवी' के दमदार डायलॉग्स के बारे में।

कहा जाता है कि 1977 में तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री रामचंद्रन जयललिता को राजनीति में लेकर आए थे, लेकिन खुद जयललिता इस बात से इनकार करती रहीं। 

कहा जाता है कि 1977 में तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री रामचंद्रन जयललिता को राजनीति में लेकर आए थे, लेकिन खुद जयललिता इस बात से इनकार करती रहीं। 

1982 में उन्होंने रामचंद्रन की पार्टी ऑल इंडिया अन्ना ड्रविड़ मुनेत्र कझगम (AIADMK) ज्वाइन कर ली। 1983 में उन्हें प्रचार समिति का सचिव बनाया गया और यही वह साल था जब वे पहली बार तिरुचेंदूर विधानसभा सीट से विधायक चुनी गईं।

1982 में उन्होंने रामचंद्रन की पार्टी ऑल इंडिया अन्ना ड्रविड़ मुनेत्र कझगम (AIADMK) ज्वाइन कर ली। 1983 में उन्हें प्रचार समिति का सचिव बनाया गया और यही वह साल था जब वे पहली बार तिरुचेंदूर विधानसभा सीट से विधायक चुनी गईं।

जयललिता की धाराप्रवाह अंग्रेजी के कारण रामचंद्रन चाहते थे कि वे राज्यसभा में आएं और 1984 से 1989 तक वो बतौर राज्यसभा सदस्य संसद में अपनी जगह बनाए रहीं।

जयललिता की धाराप्रवाह अंग्रेजी के कारण रामचंद्रन चाहते थे कि वे राज्यसभा में आएं और 1984 से 1989 तक वो बतौर राज्यसभा सदस्य संसद में अपनी जगह बनाए रहीं।

1989 में जयललिता ने तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष की नेता के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाली और 24 जून को वे पहली बार राज्य की मुख्यमंत्री के पद पर आसीन हुईं।

1989 में जयललिता ने तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष की नेता के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाली और 24 जून को वे पहली बार राज्य की मुख्यमंत्री के पद पर आसीन हुईं।

साउथ फिल्मों के सुपरस्टार रहे एमजी रामचंद्रन से जयललिता के अफेयर ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। खास बात यह है कि उस वक्त एमजी पहले से शादीशुदा और दो बच्चों के पिता थे। जब रामचंद्रन का निधन हुआ तो जयललिता ने खुद को विधवा की तरह पेश किया था।

साउथ फिल्मों के सुपरस्टार रहे एमजी रामचंद्रन से जयललिता के अफेयर ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। खास बात यह है कि उस वक्त एमजी पहले से शादीशुदा और दो बच्चों के पिता थे। जब रामचंद्रन का निधन हुआ तो जयललिता ने खुद को विधवा की तरह पेश किया था।

जयललिता का नाम दुनिया की सबसे महंगी शादी/रिसेप्शन के लिए गिनीज बुक में दर्ज है। 7 सितंबर, 1995 को उनके दत्तक पुत्र सुधाकरन की शादी चेन्नई में हुई थी। इसके लिए 6 करोड़ रुपए खर्च किए गए और 50 एकड़ में पंडाल बना था। करीब 1.5 लाख मेहमान शामिल हुए थे। सुधाकरन जयललिता के भतीजे हैं, जिसे उन्होंने गोद लिया था। 

जयललिता का नाम दुनिया की सबसे महंगी शादी/रिसेप्शन के लिए गिनीज बुक में दर्ज है। 7 सितंबर, 1995 को उनके दत्तक पुत्र सुधाकरन की शादी चेन्नई में हुई थी। इसके लिए 6 करोड़ रुपए खर्च किए गए और 50 एकड़ में पंडाल बना था। करीब 1.5 लाख मेहमान शामिल हुए थे। सुधाकरन जयललिता के भतीजे हैं, जिसे उन्होंने गोद लिया था। 

जयललिता ज्योतिष में विश्वास रखती थीं। इसीलिए उन्होंने अंग्रेजी में अपना नाम Jayalalitha से Jayalalithaa कर लिया था। ​ज्योतिष के चलते ही वे आमतौर पर साड़ी, पेन और बाकी चीजें हरे रंग की यूज करती थीं। माना जाता है कि ये रंग उनके लिए बहुत लकी रहा।

जयललिता ज्योतिष में विश्वास रखती थीं। इसीलिए उन्होंने अंग्रेजी में अपना नाम Jayalalitha से Jayalalithaa कर लिया था। ​ज्योतिष के चलते ही वे आमतौर पर साड़ी, पेन और बाकी चीजें हरे रंग की यूज करती थीं। माना जाता है कि ये रंग उनके लिए बहुत लकी रहा।

जयललिता अपने साथ एक खास कुर्सी लेकर चलती थीं। एक बार जब वे नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने दिल्‍ली पहुंची थीं तो एक स्‍पेशल कुर्सी नॉर्थ ब्‍लॉक पहुंची। वे अरुण जेटली, राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने के दौरान भी इसी स्‍पेशल कुर्सी पर बैठी नजर आई थीं। इस मुलाकात के बाद कुर्सी वापस तमिलनाडु भवन भेज दी गई थी। 
 

जयललिता अपने साथ एक खास कुर्सी लेकर चलती थीं। एक बार जब वे नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने दिल्‍ली पहुंची थीं तो एक स्‍पेशल कुर्सी नॉर्थ ब्‍लॉक पहुंची। वे अरुण जेटली, राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने के दौरान भी इसी स्‍पेशल कुर्सी पर बैठी नजर आई थीं। इस मुलाकात के बाद कुर्सी वापस तमिलनाडु भवन भेज दी गई थी। 
 

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